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योगी के दावे की हवा निकली: पिछले 24 घंटे में 6 से ज्यादा मौतें

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन से कमी की मौत के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों से ऑक्सीजन सिलेंडर का ब्योरा मांगा है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 14, 2017 03:32 PM IST

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योगी के दावे की हवा निकली: पिछले 24 घंटे में 6 से ज्यादा मौतें

गोरखपुर में तीन दिन पहले से बच्चों की मौत का जो सिलसिला शुरू हुआ है वह अभी भी जारी है. सरकार ने 13 अगस्त रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बच्चों की मौत पर दुख जताते हुए भावुक जरूर हुए. लेकिन उनकी कोशिशों का असर अभी बच्चों पर नजर नहीं आ रहा है.

ताजा खबरों के मुताबिक, बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले 24 घंटे में 6 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है. गोरखपुर में लिक्विड ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत के बाद योगी सरकार हरकत में आई है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हालात पहले से बेहतर हैं लेकिन अभी पूरी तरह काबू नहीं पाया दा  पहले की तुलना में स्थिति फिलहाल निंयत्रण में है.

कॉलेज प्रशासन के द्वारा लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. कॉलेज प्रशासन कोशिश कर रही है कि दवा के अलावा भी और चिकित्सीय संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दिया जाए. रविवार देर रात ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 8 हजार लीटर लिक्विड ऑक्सीजन पहुंचा है. साथ ही 288 गैस सिलेंडर भी लाए गए हैं. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रविवार तड़के सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन लोड कर दिया गया है.

हालात पर काबू पाने की कोशिश 

बीआरडी कॉलेज के 100 बेड वाले इंसेफेलाइटिस वॉर्ड में स्थिति सुधारने की लगातार कवायद चल रही है. इस सबके बावजूद भी पिछले 24 घंटे में ईलाज के दौरान 10 लोगों की मौत हुई है. जिसमें 3 बच्चे की इंसेफेलाइटिस के कारण जान गई है.

हम आपको बता दें कि पुष्पा सेल्स ने 68 लाख के बकाए के चलते पिछले गुरुवार को लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी. जिससे पिछले गुरुवार को प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो गई थी और कई बच्चों की मौत हो गई थी. गुरुवार की घटना के बाद भी रविवार तक कॉलेज प्रशासन ने जुगाड़ से ही स्थिति संभालने की कोशिश कर रही थी. इस बीच अस्पताल प्रशासन ने 11 अगस्त को पुष्पा सेल्स को 40 लाख रुपए का बकाया राशि भुगतान कर दिया था.

बीआरडी मेडिकल ने 11 अगस्त को ही कंपनी को यह रकम भेज कर ऑक्सीजन की सप्लाई फिर से शुरू करने को कहा था. हलांकि, 11 अगस्त को ही लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई दोबारा से शुरू कर दिया गया था पर वॉर्डों में ऑक्सीजन का प्रेशर लो था.

क्या है सरकार का दावा?

सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत नहीं हुई थी. पर, जिस तरह से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को आनन-फानन में पेमेंट किए गए हैं और ऑक्सीजन आपूर्ति दोबारा से बेहतर तरीके से बहाल किए जा रहे हैं, उससे ऑक्सीजन रुकने के कारण ही बच्चों की मौत की बात को बल मिला है.

रविवार को भी ऑक्सीजन सप्लाई में दिक्कत की वजह से एक हादसा होते-होते बचा. गायनी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक ठप हो गई. वहां मौजूद एक जूनियर डॉक्टर ने सतर्कता दिखाते हुए मरीज की जान बचा ली.

रविवार दो बजे के आस-पास स्त्री एवं प्रसूति विभाग के ऑपरेशन थियेटर में एक मरीज का ऑपरेशन हो रहा था. इस बीच पाइप से दी जा रही ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक ठप हो गई. डॉक्टर ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ऑपरेशन थियेटर में मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर मरीज को लगाया. तब जा कर मरीज की जान बची.

बीआरडी कॉलेज प्रशासन ने ऑक्सीजन व्यवस्था फिर से इतनी बड़ी मात्रा में चालू होने पर राहत की सांस ली है. कॉलेज प्रशासन का पूरा अमला अब पूरी तरह से हरकत में है. सरकारी अमला मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं के साथ-साथ मरीजों के परिजनों को भी सही तरीके से हैंडल कर रही है.

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के आने के बाद अस्पताल में भर्ती तीमारदारों में भी एक आश्वासन नजर आ रहा है. ये तीमारदार पिछले काफी दिनों से दहशत में जी रहे थे.

टेक्निकल एक्सपर्ट की मांग

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ वाईडी सिंह मीडिया से बात करते हुए कहा है कि, यूपी सरकार ने मेडिकल कॉलेज में हुए मौतों पर जो कमेटी बनाई है, उसमें टेक्निकल एक्सपर्ट का होना जरूरी है. मेडिकल फील्ड का टेक्निकल एक्सपर्ट ही बता पाएगा कि ऑक्सीजन की कमी होने पर मौत के मामलों में क्या लक्षण होते हैं. इसके अलावा अन्य कई रिपोर्ट भी टेक्निकल एक्सपर्ट की ओपिनियन से ही आएगी.

दूसरी तरफ गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन से कमी की मौत के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों से ऑक्सीजन सिलेंडर का ब्योरा मांगा है. साथ ही राज्य सरकार ने सभी जिलों में ऑक्सीजन सिलेंडर भंडारण करने के निर्देश भी जारी किए हैं.

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