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जन्मदिन विशेष: भारत के प्रथम राष्ट्रपति बनते-बनते रह गए थे सी राज गोपालाचारी

राजा जी ने 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' का समर्थन नहीं किया था. इसीलिए जब जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव किया तो कांग्रेस पार्टी ने उनका कड़ा विरोध किया

Surendra Kishore Surendra Kishore Updated On: Dec 10, 2017 04:15 PM IST

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जन्मदिन विशेष: भारत के प्रथम राष्ट्रपति बनते-बनते रह गए थे सी राज गोपालाचारी

सी.राज गोपालाचारी यानी राजा जी कई बातों के लिए याद किए जाते हैं. वो न सिर्फ आजाद भारत के पहले और आखिरी भारतीय गवर्नर जनरल थे बल्कि उन्होंने 1959 में एक ऐसी गैर कांग्रेसी पार्टी यानी स्वतंत्र पार्टी बनाई जिसे 1967 में लोकसभा चुनावों में 44 सीटें मिलीं.

तब तक इतनी अधिक सीट किसी अन्य विपक्षी पार्टी को नहीं मिल सकी थी. आजादी के बाद तब के गवर्नर जनरल लाॅर्ड माउंटबेटन वापस जाने लगे तो सवाल उठा कि उनकी जगह कौन लेगा.

कांग्रेस पार्टी की राय सरदार बल्लभ भाई पटेल के पक्ष में थी किंतु प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जिद पर राज गोपालाचारी गवर्नर जनरल बने. उससे पहले राजा जी पश्चिम बंगाल के गवर्नर रह चुके थे.

सन 1950 में जवाहर लाल राजा जी को राष्ट्रपति बनवाना चाहते थे पर, सरदार पटेल की जिद पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने.

सरदार पटेल के निधन के बाद राजा जी देश के गृह मंत्री बने थे. पर नेहरू के साथ सैद्धांतिक मतभेद के कारण वो उस पद से मात्र 10 महीने में ही हट गए. हालांकि बाद में राजा जी मद्रास के मुख्यमंत्री बने. वो 1937-39 में भी वहां के मुख्यमंत्री यानी प्रीमियर रह चुके थे. पर कभी उन्होंने अपने विचारों से समझौता नहीं किया.

Rajgopalachari with Nehru and Patel

जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ सी राजगोपालाचारी

सी राज गोपालाचारी को जवाहर लाल नेहरू पसंद करते थे

राजा जी खुली अर्थव्यवस्था के कट्टर समर्थक थे. इसीलिए जब उन्होंने स्वतंत्र पार्टी बनाई तो उससे बड़े-बड़े उद्योगपति और राजा-महाराजा जुड़े. फिर भी कुछ कारणवश जवाहर लाल नेहरू उन्हें पसंद करते थे.

राजा जी 1952 से 1954 तक मद्रास के मुख्यमंत्री थे. उनके ही मुख्यमंत्रित्व काल में भाषा के आधार पर मद्रास से अलग होकर 1953 में आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना.

गांव के स्कूल से अपनी शिक्षा प्रारंभ करने वाले राजा जी विद्वान लेखक, वकील और राजनेता थे. उन्होंने ऊंची शिक्षा हासिल की थी. राजा जी का जन्म मद्रास प्रेसिडेंसी के एक गांव में 10 दिसंबर, 1878 को हुआ था. उनका निधन 25 दिसंबर, 1972 को हुआ.

उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के प्रभाव में आकर 1911 में सार्वजनिक जीवन की शुरूआत की. सन 1919 में वो महात्मा गांधी से जुड़े. वो गांधी जी से पारिवारिक रूप से भी जुड़ गए थे.

राजा जी की बेटी लक्ष्मी की शादी महात्मा गांधी के चौथे पुत्र देवदास गांधी से हुई थी. देवदास गांधी हिंदुस्तान टाइम्स के प्रबंध संपादक थे. देवदास गांधी-लक्ष्मी के बेटे राज मोहन गांधी, राम चंद्र गांधी और गोपाल कृष्ण गांधी हुए. राम चंद्र गांधी का वर्ष 2007 में निधन हो गया. गोपाल कृष्ण गांधी पश्चिम बंगाल के गवर्नर थे.

Gandhi Ji-Rajagopalachari

महात्मा गांधी के साथ सी राजगोपालाचारी (फोटो: विकीपीडिया से साभार)

1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' का समर्थन नहीं किया

राजा जी हमेशा ही स्वतंत्र विचार के राज नेता रहे. वो जो ठीक समझते थे, वही करते थे. उन्होंने 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' का समर्थन नहीं किया था. इसके पीछे उनके अपने तर्क थे जो गांधी जी से नहीं मिलते थे. इसीलिए जब जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव किया तो कांग्रेस पार्टी ने उनका कड़ा विरोध कर दिया.

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विरोध इसी आधार पर हुआ कि जिस व्यक्ति ने कांग्रेस की सबसे कठिन लड़ाई में हमारा साथ नहीं दिया, उसे हम राष्ट्रपति कैसे बनाएं. हालांकि दूसरी ओर अपने निधन से पहले राजा जी ने एक बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि आजादी के बाद यदि जवाहर लाल नेहरू की जगह सरदार पटेल प्रधानमंत्री बने होते तो देश के लिए बेहतर होता.

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