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Firstpost National Trust Survey: महागठबंधन पर मोदी भारी, लोगों ने पीएम पद के लिए बताई पहली पसंद

Firstpost National Trust Survey: लोकसभा चुनाव नजदीक है. इस बार भी मोदी सरकार विरोधियों पर भारी पड़ती नजर आ रही है

Updated On: Jan 25, 2019 07:36 PM IST

FP Staff

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Firstpost National Trust Survey: महागठबंधन पर मोदी भारी, लोगों ने पीएम पद के लिए बताई पहली पसंद

लोकसभा चुनाव नजदीक है. वहीं इस बार भी मोदी सरकार विरोधियों पर भारी पड़ती नजर आ रही है. फर्स्टपोस्ट नेशनल ट्रस्ट सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे ज्यादा लोगों के जरिए पंसद किया गया है.

2019 के लोकसभा चुनाव की दौड़ अपने अंतिम पड़ाव में एंट्री कर चुकी है. वहीं नरेंद्र मोदी और बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन महागठबंधन पर साफ तौर पर बढ़त बनाए हुए हैं. फर्स्टपोस्ट और इप्सोस के जरिए किए गए नेशनल ट्रस्ट सर्वे के निष्कर्षों में मोदी सरकार को बढ़त मिलती हुई देखी गई है. वहीं इस सर्वे में लोगों ने नरेंद्र मोदी को ही प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पहली पसंद बताई है तो वहीं राहुल गांधी दूसरे नंबर पर हैं.

- स्टडी का उद्देश्य स्थानीय राजनीतिक स्थिति का पता लगाना और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों (एससीआर) और राज्य स्तर पर ट्रस्ट फैक्टर की पहचान करना था. इस दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से अलग और कुछ ध्यान के साथ परखा गया कि कैसे और क्यों लोग एक निश्चित तरीके से मतदान कर सकते हैं.

- इस टारगेट को पूरा करने के लिए, एक सैंपलिंग प्रोटोकॉल अपनाया गया जो भारत की जनसंख्या के आधार की विषमता को पकड़ने के लिए सबसे उपयुक्त था.

- सैंपलिंग प्रोटोकॉल को सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र और राज्य स्तर पर अनुमान प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था, जिसमें 95 प्रतिशत आत्मविश्वास अंतराल और त्रुटि का पांच प्रतिशत मार्जिन (सटीक स्तर वांछित) था.

इसमें सबसे ज्यादा जरूरी-

- खासतौर पर एक व्यापक राष्ट्रीय सैंपल फ्रेम और नमूना चयन के हर स्तर पर जांच की गई.

- प्रत्येक एससीआर में वार्डों और गांवों के चयन के लिए पीपीएस (आकार के अनुपातिक संभावना) सैंपल प्रक्रिया अपनाई गई थी

- भारत के 23 राज्यों में 285 जिलों में फैले 320 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को कवर करते हुए 57 एससीआर में 291 शहरी वार्डों और 690 गांवों से कुल 34,470 व्यक्तियों का सर्वेक्षण किया गया.

- सर्वेक्षण के माध्यम से एकत्र किए गए सैंपल को तब 2011 की राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल करके करेक्ट किया गया था.

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