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अब फर्जी नोट सरकार का नया सिरदर्द

नोटबंदी के बाद अब बैंकों के पास पहुंचे फर्जी नोट

Updated On: Dec 12, 2016 09:01 PM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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अब फर्जी नोट सरकार का नया सिरदर्द

पिछले शनिवार तक के आंकड़ों के अनुसार मोदी सरकार की नोटबंदी योजना के तहत 15.50 लाख करोड़ में से 13 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं. बाकी बचे तीन सप्ताह में शेष बचे नोट भी बैंकों में जमा होने की पूरी संभावना है.

देश भर में लोगों द्वारा बैंकों में जमा किए गए नोटों में बड़ी संख्या में वे नोट भी शामिल हैं, जिन्हें जाली नोट कहा जाता है. ‍मोदी के इस महायज्ञ में बैंकों की शाखाएं इस बात की जांच नहीं कर पाई हैं कि लोगों द्वारा जमा कराए गए नोटों में जाली नोटों की संख्या कितनी है? कहा जा रहा है कि ग्रामीण इलाकों के डाकघरों में सबसे अधिक जाली नोट जमा कराए गए हैं.

मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैंकों के पास काम का इतना अधिक दबाव था कि वे इस बात का पता लगाने की कोशिश ही नहीं कर सके कि जमा किए गए नोटों में कोई जाली नोट भी था? रिजर्व बैंक द्वारा विशेष मशीनों के द्वारा जब इन नोटों को गिनने की प्रक्रिया शुरू होगी तभी पता चलेगा कि जमा किए गए नोटों में जाली नोटों की संख्या कितनी है?

सैंकड़ों करोड़ के जाली नोट पहुंचे

यह तय माना जा रहा है कि सैकड़ों करोड़ रुपए के जाली नोट रिजर्व बैंक के चेस्ट में पहुंच गए हैं. इसलिए यह संभव है कि 15.50 लाख करोड़ रुपए की कुल वैधानिक राशि की तुलना में अधिक राशि बैंकों में जमा हो जाए. रिजर्व बैंक व मोदी सरकार के लिए यह एक नई मुसीबत होगी कि इन जाली नोटों के बदले में दिए जानेवाले नए नोटों की राशि का अतिरिक्त वित्तीय बोझ कौन उठाएगा?

रिजर्व बैंक द्वारा सभी बैंकों को जारी सर्कुलर के अनुसार जाली नोटों की पहचान करने व उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की जिम्मेदारी उस बैंक ब्रांच की है, जहां जाली नोट जमा करने के लिए पेश किया गया है.

इतना ही नहीं यदि संबंधित बैंक जाली नोट रिजर्व बैंक के चेस्ट में भेज देती हैं तो उस बैंक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाती है. इतना ही नहीं यदि कोई बैंक अपनी एटीएम मशीन के माध्यम से जमाकर्ताअों को जाली नोट वितरित करती है तो यह माना जाएगा कि संबंधित बैंक जाली नोट चला रही है.

जाली नोटों के संदर्भ में रिजर्व बैंक के नियम व दिशा-निर्देशों को अक्षरश: लागू किया जाएगा तो लगभग सभी बैंक जाली नोट चलाने की दोषी पाई जाएंगी. सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि सैकड़ों करोड़ रुपए के जाली नोटों का वित्तीय बोझ कौन उठाएंगा?

70 करोड़ रुपए नोट खपाता है पाकिस्तान 

सरकारी व गैर-सरकारी वित्तीय संस्थाअों द्वारा अनुमान लगाया गया है कि प्रतिवर्ष पाकिस्तान 70 करोड़ रुपए के जाली नोट भारतीय अर्थव्यवस्था में खपाने में सफल होता है. रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया द्वारा सरकार को दी गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में दस लाख  करेंसी नोट में से 4 नोट जाली है.

2010 की इस रिपोर्ट के अनुसार जाली नोटों का कुल मूल्य 3200 करोड़ रुपए के आसपास था,  जो अब संभवत: बढ़कर 6000 करोड़ तक पहुंच सकता है. भारत में जाली नोट फैलाने की साजिश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा ही की जाती है.

अगले साल जनवरी के मध्य में ही इस बात का पता चलेगा कि रिजर्व बैंक के चेस्ट में कितनी राशि के जाली नोट जमा हुए हैं. देश के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि रिजर्व बैंक को जाली नोटों के बदले असली नोटों का भुगतान करना पड़ेगा.

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