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फेसबुक डेटा लीक साल 2019 के चुनाव में बनेगा बड़ा सियासी मुद्दा?

देश की राजनीति में फेसबुक की वजह से सियासी भूचाल आ गया है क्योंकि बीजेपी ने कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका से संबंध रखने का आरोप लगाया है

Updated On: Mar 22, 2018 10:11 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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फेसबुक डेटा लीक साल 2019 के चुनाव में बनेगा बड़ा सियासी मुद्दा?

राजनीति में मुद्दों का अभाव नहीं होता और कोई मुद्दा कभी पुराना नहीं होता. बस निर्भर ये करता है कि चुनाव में कौन सा मुद्दा मतदाता को प्रभावित कर सकता है. ऐसे ही मुद्दों की तलाश और राजनीतिक हवा का रूख भांपने वाली इंग्लैंड की डेटा कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप लगा है कि उसने फेसबुक के पांच करोड़ यूजर के डाटा जुटा कर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को जीत दिलाने में मदद की. कैंब्रिज एनालिटिका चुनावी डेटा का विश्लेषण करती है.

फेसबुक विवाद और कैंब्रिज एनालिटिका

अब देश की राजनीति में भी फेसबुक की वजह से सियासी भूचाल आ गया है. ये भूचाल इसलिए क्योंकि बीजेपी ने कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका से संबंध रखने का आरोप लगाया है. फेसबुक डेटा लीक मामले में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा ‘मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैंब्रिज एनालिटिका भारत में कांग्रेस पार्टी के संपर्क में थी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए रणनीति बनाने के काम में जुटी हुई थी.’

जबकि कांग्रेस ने बीजेपी पर ही साल 2010 में कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से चुनाव में मदद लेने का आरोप लगाया है. खुद कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी का ये कहना है कि उसने साल 2010 में बिहार विधानसभा चुनाव में विश्लेषण किया था जिसकी वजह से उसके क्लाइंट को 90 फीसदी से ज्यादा सीटें मिलीं. वहीं कैंब्रिज एनालिटिका से भारत में जुड़े हुए जेडीयू नेता के बेटे अमरीश त्यागी का कहना है कि उन्होंने बीजेपी, कांग्रेस और जेडीयू के लिए भी काम किया.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के कैंब्रिज एनालिटिका के साथ वाकई रिश्ते हैं? हालांकि कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. लेकिन, कैंब्रिज एनालिटिका की बदनामी की वजह से देश की राजनीति में नया मुद्दा जरूर गरमा गया है.

FILE PHOTO: A 3D-printed Facebook logo is seen in front of a displayed stock graph in this illustration taken

ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या अब फेसबुक डेटा लीक साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ा सियासी मुद्दा बनने जा रहा है?

वैसे भी देश की राजनीति में गर्म मुद्दों की कमी नहीं तो मुद्दों को गरमाने के तरीकों में भी कमी नहीं है. देश की राजनीति को लंबे समय से प्रभावित करने वाला राम मंदिर का मुद्दा सैकड़ों साल पुराना होने के बावजूद आज भी जिंदा है जिसकी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. राम मंदिर आंदोलन की ही वजह से बीजेपी आज देश की सबसे बड़ी सियासी पार्टी बन सकी है तो इस मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और दूसरे दल भी अपनी राजनीति करते आए हैं.

राम मंदिर मुद्दे की ही तरह लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने वाले देश में कई मुद्दे हैं तो कई नए भी हो सकते हैं. कभी-कभी क्षेत्रीय मुद्दे ही राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण प्रभावित करने का काम कर जाते हैं.

kar sevak in ayodhya ram mandir temple

तीन तलाक, जाट आरक्षण, पटेल आरक्षण आंदोलन, पंजाब-हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना विवाद, दक्षिण भारत में उबलता कावेरी विवाद जैसे मुद्दे हर चुनाव में जोर मारते हैं. कर्नाटक में लिंगायत समाज को धर्म का दर्जा देना एक मुद्दा है तो आंध्रप्रदेश सरकार का ‘विशेष राज्य’ के दर्जे की मांग भी बड़ा सियासी मुद्दा है. धारा 370 और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे अभी ठंडे बस्ते में सांस भर रहे हैं.

गरीबी, किसानों की दुर्दशा और बेरोजगारी हर दौर की सरकार के वक्त एक आम मुद्दा रहे. इन मुद्दों को जातीय समीकरणों ने सिर उठाने का मौका नहीं दिया क्योंकि कहीं धर्म आड़े आया तो कहीं जाति. खास बात ये है इन मुद्दों से  आबादी का बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है. इसके बावजूद ये हमेशा समस्या के रूप में ही सरकारों को दिखते आए. जबकि अचानक किसी विवाद की वजह से हुई घटना ने जब मुद्दे का रूप धरा तो केंद्र की सरकारों के सिंहासन डोल गए और चुनाव में हार का सामना तक करना पड़ा. अस्सी के दशक में पूर्व पीएम स्वर्गीय राजीव गांधी की सरकार बोफोर्स के मुद्दे पर घिर गई तो कांग्रेस की यूपीए सरकार के वक्त भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों ने बीजेपी को ब्रम्हास्त्र दे दिया था.

BJP

इस वक्त बीजेपी सत्ता में है और विपक्ष ने केंद्र सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों को सियासी मुद्दा बनाया है.

दरअसल राजनीतिक दलों को जनभावना को प्रभावित करने वाले मुद्दों की तलाश रहती है. ऐसे में फेसबुक डेटा लीक भी एक ऐसा मामला है जो लोगों की निजता और संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है. लोगों की निजी जानकारियों का लीक होना एक संवेदनशील मामला है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में डेटा लीक का रोल देखने के बाद इनका राजनीतिक इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए भी खतरा है.

bjp amit shah

सोशल मीडिया इस वक्त दुनिया में अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा प्लैटफॉर्म है. बीजेपी ये जानती है कि सोशल मीडिया की ताकत ने ही उसे साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बेहद फायदा पहुंचाया था. सोशल मीडिया पर कोई भी कैम्पेन रातों-रात सड़कों पर आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर जाती है. साल 2010 में अन्ना के आंदोलन के वक्त भी सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका थी. तभी सरकार को भी कहीं न कहीं इस बात का अंदेशा है कि फेसबुक के 20 करोड़ भारतीय यूजर्स की निजी जानकारियों का कांग्रेस या फिर दूसरी पार्टियां राजनीतिक लाभ न ले लें. ऐसे में साल 2019 के लोकसभा चुनाव आते आते फेसबुक डेटा लीक का मामला बड़े सियासी तूफान में तब्दील हो सकता है.

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