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एक्जिट पोल, तू तो सेहत के लिए लाभदायक है...

क्या बादशाह, क्‍या गुलाम सभी के दिल में एक्जिट पोल से गुदगुदी होती है.

Updated On: Mar 10, 2017 11:49 AM IST

Shivaji Rai

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एक्जिट पोल, तू तो सेहत के लिए लाभदायक है...

न्‍यूज चैनलों पर 'एक्जिट पोल' के नतीजे आ चुके हैं. उम्‍मीद-नाउम्‍मीदी का आंकड़ा शेयर बाजार की तरह बढ़ घट रहा है. चित्रगुप्त के दत्‍तक पुत्र बिना तोते के ही सरकार की भविष्‍यवाणी कर रहे हैं.

'एक्जिट पोल' के आंकड़ों में कहीं लहर गुम तो कहीं 'माननीय' की धूम दिख रही है. कहीं टकराहट तो कहीं दिल मिलने के आसार दिख रहे हैं. कुछ वर्षों के धुरविरोधी पुरानी दुश्‍मनी भुलाकर फिर से 'बुआ-बबुआ' के रिश्‍ते में बंधने की कोशिश में लगे हैं… तो कुछ म्‍यान से तलवार निकाले की जुगत में लगे हैं.

राजनीति संभावनाओं का खेल भले ही हो, 'एक्जिट पोल' पर भले ही शत प्रतिशत भरोसा न हो, पर आलाकमान से लेकर आम कार्यकर्ता तक सभी 'एक्जिट पोल' के गीत गुनगुना रहे हैं.

एक्जिट पोल 'एक्जैक्ट' भले न निकले. चुनावी पंडितों की राय में यह सबके हित में है. एक्जिट पोल बगैर किसी भेदभाव के सभी को कुछ न कुछ जरूर देता है. जीतने वाले उम्‍मीदवार को जहां सतरंगी सपने बुनने और ख्‍याली पुलाव पकाने के लिए समय देता है, वहीं संभावित हार वाले उम्‍मीदवार को सहज बनने के लिए पर्याप्त मौका.

एक्जिट पोल जहां विजयी उम्‍मीदवारों के समर्थकों फूल का टोकरा खरीदने का समय देता है, वहीं पराजित होने वाले उम्‍मीदवार को हार का कोई ठीकरा ढूंढने के लिए भरपूर वक्‍त.

न्‍यूज चैनलों पर मगजमारी करने वाले स्‍वनामधन्‍य पत्रकारों को भी इतना वक्‍त देता है कि पराजित उम्‍मीदवारों की खामियां और जीतने वाले की खूबियां ढूंढ सकें. साथ ही जीतने वाले की हर खामी को उसकी चतुराई भरी चाल के रूप में तब्‍दील करने के लिए शब्‍दजाल बुन सकें.

एक्जिट पोल से जीतने वाले को जहां अपनी पार्टी और सरकार की प्राथमिकतायें गिनाने का वक्‍त मिलता है. दूसरी ओर हारने वाले को असल परिणाम आने तक दम साधे रखने का अभ्‍यास- हारने वाले की जुबान अब फिसलती नहीं, बल्कि अब वह जीतने का दावा नहीं करता और निवेदन करता है कि आख़िरी परिणाम उसके पक्ष में ही आएंगे.

न्‍यूज चैनलों के तो दोनों हाथों में लड्डू होता है. एक तरफ जहां इनकी दर्शकों की तादाद एक झटके से बढ़ जाती है, वहीं मांग और आपूर्ति के सिद्यांत पर टीआरपी भी आसमान छूने लग जाती है. लिहाजा एक्जिट पोल 'एग्जेक्ट' भले न हो, लेकिन यह होमियोपैथी दवाओं की तरह किसी के लिए भी नुकसानदायक नहीं है. जहां एक्जिट पोल में कांटे की टक्‍कर दिखती है वहां तो सभी दावेदारों को हंसने और सपने संजोने का मौका मिल जाता है.

कुल मिलाकर क्या बादशाह, क्‍या गुलाम सभी के दिल में एक्जिट पोल से गुदगुदी होती है, जो हर हाल में सेहत के लिए लाभदायक होती है.

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