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ईवीएम पर केजरीवाल और चुनाव आयोग के बीच तेज हुई जुबानी जंग

आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल के एक नेता ने बेबुनियाद टिप्पणियां कीं और निराधार आरोप लगाए

Bhasha Updated On: Apr 04, 2017 11:53 AM IST

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ईवीएम पर केजरीवाल और चुनाव आयोग के बीच तेज हुई जुबानी जंग

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रयुक्त ईवीएम का उपयोग भिण्ड उपचुनाव में किए जाने संबंधी अरविंद केजरीवाल के आरोप के बाद सोमवार आप प्रमुख और भारत निर्वाचन आयोग के बीच वाक्युद्ध और तेज हो गया. हालांकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को ‘आधारहीन’ बताया है.

अपने आवास पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ईवीएम में ‘बड़े पैमाने पर छेड़छाड़’ किए जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि दिल्ली के राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने के लिए उत्तर प्रदेश से वीवीपीएटी मशीनें लाई जा रही हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह उस नियम के विरूद्ध है कि एक बार चुनाव में प्रयुक्त ईवीएम का प्रयोग अगले कम से कम 45 दिनों के लिए किसी अन्य चुनाव में नहीं किया जा सकता.’ आप नेता ने दावा किया कि मध्यप्रदेश के भिण्ड में होने वाले उपचुनाव के लिए भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रयुक्त ईवीएम भेजी जा रही हैं.

भिण्ड में परीक्षण के दौरान वीवीपीएटी से जुड़ी ईवीएम से बीजेपी का चुनाव चिन्ह निकला था, इसे विपक्षी दल बड़ा मुद्दा बना रहे हैं.

केजरीवाल के आरोपों को किया खारिज

निर्वाचन आयोग का कहना है कि उत्तर प्रदेश चुनावों में इस्तेमाल किसी भी ईवीएम को मध्य प्रदेश के उपचुनावों के लिए नहीं भेजा गया. आयोग ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता केजरीवाल के आरोपों को आधारहीन बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया.

आयोग ने कल कहा था कि ईवीएम को दोषी बताने के स्थान पर आप को पंजाब में अपनी हार पर आत्ममंथन करना चाहिए.

आयोग ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी उम्मीदवार द्वारा कोई चुनाव याचिका दाखिल किए जाने की 45 दिन की अवधि तक एक स्ट्रांग रूम में रखा जाता है.

हालांकि वीवीपीएटी मशीनों के मामले में छपी हुई पर्चियों को मतगणना के समय रखा जाता है और कागज के लिफाफे में सील कर दिया जाता है और इन सीलबंद पर्चियाें को ईवीएम के साथ स्ट्रांग रूम में रखना होता है.

मतदाता वीवीपीएटी पर्ची को सात सेकेंड के लिए देख सकते हैं, जो चुनाव में उनके मतदान की पावती होती है. वीवीपीएटी एक मशीन है जो मतदान के वक्त ईवीएम से जुड़ी होती है. जब मतदाता वोट डालने के लिए बटन दबाता है तो मशीन से एक पर्ची निकलती है, जिसपर वोट पाने वाली पार्टी.उम्मीदवार का निशान होता है. पर्ची वहां रखे बक्से में चली जाती है, मतदाता उसे अपने साथ नहीं ले जा सकता.

राजनीतिक दल के नेता ने की बेबुनियाद टिप्पणियां

लीड ईवीएम दो अंतिम आयोग ने एक बयान में कहा, ‘कानून के मुताबिक वीवीपीएटी मशीनों को चुनाव याचिका के मकसद से स्ट्रांग रूम में रखना जरूरी नहीं है और उन्हें किसी भी अन्य चुनाव में इस्तेमाल किया जा सकता है.’ आयोग ने केजरीवाल का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि एक राजनीतिक दल के नेता ने संवाददाता सम्मेलन में बेबुनियाद टिप्पणियां की हैं और निराधार आरोप लगाए हैं.

आप संयोजक ने सोमवार आरोप लगाया कि कानून के मुताबिक ईवीएम को परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिन तक बाहर नहीं ले जाया जा सकता लेकिन मध्य प्रदेश में उपचुनावों के लिए मशीनों को उत्तर प्रदेश से ले जाया गया जहां 11 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था और 45 दिन की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है.

arvind kejriwal evm

आयोग ने बयान में कहा है, ‘भारत निर्वाचन आयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं कि उत्तर प्रदेश से ईवीएम को मध्यप्रदेश के भिण्ड ले जाया गया है. आयोग यह स्पष्ट करना चाहेगा कि, यह आरोप पूर्णतया आधारहीन हैं और तथ्यों की जांच किए बगैर लगाए गए हैं. मध्यप्रदेश में उपचुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से कोई ईवीएम नहीं ले जाया गया है.’ आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग की मौजूदा नीति के अनुसार, उपचुनाव के लिए विभिन्न राज्यों से वीवीपीएटी मशीनें मंगवाई गई हैं.

उसमें कहा गया है, ‘ऐसा इसलिए हैं क्योंकि आयोग के पास उपलब्ध 53,500 वीवीपीएटी मशीनों को हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के लिए भेजा गया था.’ आयोग का कहना है कि चुनाव से इतर रखे गए ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पूरी जांच की जाती है.

ऐसे में, भिण्ड भेजी गई वीवीपीएटी मशीन में उत्तर प्रदेश चुनाव के मतदान के दौरान के चिन्ह मौजूद थे.

आयोग का कहना है, ‘यह मानक प्रक्रिया है, कोई गड़बड़ी नहीं है. मानक प्रक्रिया के तहत, अगले चुनाव में मशीनों के प्रयोग से पहले जांच के पहले चरण में पुराने चिन्हों को मिटाया जाता है. हालांकि, भिण्ड में 31 मार्च को प्रदर्शन के दौरान ऐसा नहीं किया गया. इसी कारण से आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को बदल दिया है.’ आयोग ने यह भी कहा कि भिण्ड के अटेर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के चुनाव चिन्ह प्रकाशित होने के मामले की जांच कर रहे विशेष अधिकारी की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाएगी.

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