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कार्ति चिदंबरम पर चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पूरी कहानी, जानिए कब क्या हुआ

यह मामला वर्ष 2006 में फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी से जुड़ा है जो तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की ओर से दी गई थी

Updated On: Jan 13, 2018 04:25 PM IST

FP Staff

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कार्ति चिदंबरम पर चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की पूरी कहानी, जानिए कब क्या हुआ

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली. ईडी एयरसेल-मैक्सिस केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर कार्ति के ठिकानों पर छापेमारी कर रहा है.

इडी की यह छापेमारी पांच जगहों पर चल रही हैं जिनमें एक स्थान दिल्ली में तो चार चेन्नई में हैं. ईडी ने पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्ति के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था. शनिवार की छापेमारी उसी सिलसिले में की जा रही है.

आइए जानते हैं इस पूरे मामले में कब क्या-क्या हुआ

- इससे पहले 1 दिसंबर को ईडी ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के रिश्तेदारों के ठिकाने पर छापेमारी की थी.

- इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी का रोल अहम रहा. उन्होंने लगातार पूर्व वित्त मंत्री और उनके बेटे पर हमला करते रहे. स्वामी ने 21 फरवरी, 2017 को सेंट्रल इंवेस्टिगेटिव एजेंसी को कार्ति के विदेशी बैंकों में 21 गोपनीय खातों की जानकारी दी थी.

- सीबीआई ने 16 मई, 2017 को चिदंबरम के घर पर छापा मारा था. यह छापेमारी दिल्ली और चेन्नई में 14 से ज्यादा ठिकानों पर की गई थी. इसके बाद सीबीआई ने कार्ति के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की थी.

- इसी बीच सीबीआई जांच का सामना कर रहे कार्ति चिदंबरम 19 मई, 2017 को लंदन रवाना हो गए. कार्ति के विदेश जाने पर चर्चा यह हो रही थी कि वो भी माल्या की तरह अब वापस नहीं लौटेंगे, लेकिन उनके पिता ने कहा कि वो पूर्व के निर्धारित योजना के मुताबिक वहां गए हैं और कुछ समय में लौट आएंगे. उनकी यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था जांच में सहयोग करने का निर्देश

- कार्ति चिदंबरम के खिलाफ लुक आउट नोटिस पर मद्रास हाई कोर्ट के अंतरिम रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए. सीबीआई ने कहा कि लुकआउट नोटिस (एलओसी) का मतलब यह नहीं है कि कार्ति को जेल भेज दिया जाएगा. ये इसलिए किया गया ताकि वो विदेश जाने से पहले एजेंसियों को सूचित करें.

14 अगस्त, 2017 को हुई इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति के विदेश यात्रा पर रोक लगा दी थी और जांय में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था.

- इस मामले में ईडी ने 25 सितंबर, 2017 को कार्ति की संपत्तियां जब्त की. ईडी का कहना था कि कार्ति चिदंबरम अपनी संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रहे थे और सभी अकाउंट भी बंद कर रहे थे.

- 9 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान कार्ति ने माना था कि उनका विदेश में एक खाता है. इस सुनवाई के दौरान उन्होंने विदेश जाने की इजाजत भी मांगी थी.

मामला 2006 में विदेश निवेश से जुड़ा है

यह मामला वर्ष 2006 में फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी से जुड़ा है जो पी. चिदंबरम की ओर से दी गई थी. एजेंसी ने कहा था कि वो तत्कालीन वित्त मंत्री की ओर से दी गई एफआईपीबी मंजूरी की परिस्थितियों की जांच कर रही है.

उसने आरोप लगाया कि कार्ती ने पीएमएलए के तहत जब्ती की कार्रवाई से बचने के लिए कुछ बैंक खातों को भी बंद कर दिया. साथ ही चार अन्य बैंक खातों को बंद करने की कोशिश की.

एजेंसी ने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में मार्च 2006 में एफआईपीबी की मंजूरी दी जबकि वह 600 करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं को ही मंजूरी दे सकते थे और उससे ज्यादा की परियोजना के लिए आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति की मंजूरी की जरूरत थी.

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