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मेरे पास शीला दीक्षित के मुकाबले 10 फीसदी भी ताकत नहीं, पीएम करें हस्तक्षेप: केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा 'मैं पीएम से आग्रह करता हूं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, वह पिता के समान हैं, दिल्ली राजधानी है, देश का गौरव है, विश्व को क्या संदेश जा रहा होगा?'

Updated On: Jun 16, 2018 06:12 PM IST

FP Staff

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मेरे पास शीला दीक्षित के मुकाबले 10 फीसदी भी ताकत नहीं, पीएम करें हस्तक्षेप: केजरीवाल

शनिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके तीन मंत्रियों का धरने का छठां दिन था. सीएम केजरीवाल और दिल्ली सरकार के तीन मंत्री, उपराज्यपाल के आवास पर 'धरना' दे रहे हैं. इसी मुद्दे पर CNN-News18 की रुपाश्री नंदा से बात करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने पूर्व सीएम शीला दीक्षित के आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि उनके पास शीला दीक्षित को मिली कुल शक्तियों का 10 फीसदी भी नहीं है. केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से मांग की कि वह मौजूदा स्थिति में हस्तक्षेप करें.

आप दिल्ली के सीएम हैं और 11 जून से अपने तीन प्रमुख मंत्रियों के साथ धरने पर हैं. यह एक कठोर कदम हैं. क्यों और कैसे आपने यह फैसला किया? और कितने समय तक आप इस पर डटे रहेंगे?

मैं, अपने तीन मंत्रियों के साथ बीते 6 दिनों से यहां हूं. यह हमारे लिए खुशी नहीं है. हम इसका आनंद नहीं ले रहे हैं. हमें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा. आईएएस अधिकारी तीन महीनों से धरने पर हैं. वह ऑफिस आते हैं लेकिन सिर्फ औपचारिकता के लिए. वह अधिकारिक मीटिंगों में शामिल नहीं होते. अगर कोई इमरजेंसी हो तो वह संपर्क करने पर मौजूद नहीं रहते. जब उनसे संपर्क किया जाए तो वह जवाब नहीं देते. वह फील्ड इंस्पेक्शन के लिए नहीं जाते. इस तरह से सरकार नहीं चलती.

बीते 3 महीने से हड़ताल की वजह से शासन प्रणाली रुकी हुई है. हम इस स्थिति को खत्म करना चाहते हैं. मैं निजी तौर पर एलजी से बीते 3 महीने में 4 बार मिला. मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, सत्येंद्र जैन सभी ने उनसे निजी मुलाकात की. वह हमेशा हमें इसका आश्वासन देते रहते कि एक हफ्ते में सब खत्म हो जाएगा. यह कभी नहीं हुआ. अब हम यहां खत्म कराने आए हैं. हम चाहते हैं कि दरवाजे पर राशन डिलीवरी करने का हमारा प्रस्ताव भी माना जाए. हम यहां खुश नहीं है. शासन प्रणाली, हड़ताल की वजह से रुकी है ना कि हमारे धरने से.

जिस तरह से आपको राजनीतिक समर्थन मिला क्या आपको उसकी उम्मीद थी? कोई आश्चर्य है? क्या आपको कांग्रेस से समर्थन ना मिलने पर निराशा है?

मैं सभी विपक्षी दलों, उनके नेताओं और मुख्यमंत्रियों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. केरल, आंध्र प्रदेश और ममता बनर्जी, सभी को. कांग्रेस की बात करें तो देश में हर कोई राहुल गांधी से सवाल कर रहा है कि क्या वह बीजेपी के साथ हैं या दिल्ली की जनता के साथ.

क्या आपको इसकी चिंता नहीं है कि अगर आपका धरना लंबा खिंचा, तो दिल्ली निवासी आपको समर्थन नहीं देंगे? वह उम्मीद करते हैं की सीएम काम करें, ना कि धरने पर बैठें. शासन प्रणाली गतिहीन हो गई है.

शासन प्रणाली मेरी वजह से नहीं, बल्कि आईएएस अधिकारियों की वजह से गतिहीन हुई है. हम इस स्थिति को खत्म करने के लिए यहां हैं. मनीष और मैं, ज्यादा से ज्यादा स्कूल और अस्पताल चाहते हैं, हम आईएएस अधिकारियों के मीटिंगों में ना आने की वजह से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं.

आपके खिलाफ यह आलोचना हो रही है कि दिल्ली के इतिहास में ऐसा संवैधानिक संकट कभी नहीं रहा. अगर अन्य सीएम तालमेल बिठा सकते हैं, तो आपकी सरकार क्यों नहीं? इस संकट के लिए कौन जिम्मेदार है?

यह सवाल कई बार पूछा गया है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बात करें तो उनकी शक्तियों के मुकाबले मेरे पास 10 फीसदी भी शक्तियां नहीं है. भ्रष्टाचार के मामले में जेल, किसी भी काम के मामले में स्थानांतरित करने, पोस्टिंग करने और निलंबित करने की शक्ति मेरे पास नहीं है. मोदी सरकार ने इन सभी शक्तियों को हमसे छीन लिया है. आज, दिल्ली का मुख्यमंत्री किसी भी अधिकारी को निलंबित नहीं कर सकता या जेल में नहीं डाल सकता.

हमें यह सोचने की जरूरत है कि धरना इतना लंबा क्यों चला? यह उन पर थोपा जा रहा है. कुछ आईएएस अधिकारी बहुत अच्छे हैं. वह हमें बताते हैं कि उन्हें धमकी दी जा रही है कि अगर वह काम करते हैं, तो उनका करियर खत्म हो जाएगा. ऐसा क्यों हो रहा है?

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने पिछले तीन वर्षों में बहुत कुछ किया है; स्कूल, अस्पतालों और 'बिजली-पानी'. अब बीजेपी पर दबाव है क्योंकि लोग पूछ रहे हैं कि केजरीवाल स्कूल बेहतर कर सकते हैं, तो बीजेपी मध्य प्रदेश के 15 वर्षों में, गुजरात के 20 सालों में ऐसा क्यों नहीं कर सकती. बीजेपी ने सोचा कि हम ऐसा नहीं कर सकते हैं इसलिए हमें केजरीवाल को ऐसा करने से रोक सकें. मैं अभी यहां बैठा हूं क्योंकि वह मेरी सरकार में बाधा डाल रहे हैं. जब तक वह हड़ताल खत्म नहीं करेंगे तब तक मैं नहीं उठूंगा.

आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्र पर फिर से निशाना साध रहे हैं? इससे पहले यह आपके लिए कारगर नहीं रहा है. इस बार रणनीति में क्या बदलाव है?

हम व्यक्तिगत रूप से किसी के खिलाफ नहीं हैं. मैं यहां काम करने के लिए हूं. मैं आपके चैनल के माध्यम से पीएम से आग्रह करता हूं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, वह पिता के समान हैं. दिल्ली राजधानी है, देश का गौरव है. विश्व को क्या संदेश जा रहा होगा? अधिकारी हड़ताल पर हैं और सीएम उसे खत्म करने के लिए धरने पर बैठा है. पीएम इस पर कुछ नहीं कह रहे हैं.

लोग तो संदेह कर रहे हैं कि पीएम और एलजी मिल कर ऐसा कर रहे हैं. हर कोई कह रहा है कि जल्द ही हड़ताल खत्म होनी चाहिए. स्ट्राइक खत्म करने के लिए आपका एक फोन कॉल ही बहुत है. कल, हमें संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान से एक पत्र मिला कि वह यहां मोहल्ला क्लीनिक देखने आ रहे हैं. यह आपके लिए, देश और दिल्ली के लिए एक गर्व का क्षण है. कृपया अच्छे काम का समर्थन करें और जितनी जल्दी हो सके इस हड़ताल को खत्म करें.

दिल्ली सरकार के आईएएस अधिकारियों के लिए कोई संदेश? वह कहते हैं कि अविश्वास का माहौल है, उन्हें आश्वासन दिया जाना चाहिए कि उनकी गरिमा सुरक्षित रहेगी.

आईएएस अधिकारियों की गलती नहीं है. वह जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहे हैं. उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जा रहा है. क्या आपने कभी सुना है कि यदि एक आईएएस अधिकारी की हत्या हो जाती है या जो भी हो, तो क्या वह हड़ताल पर जाते हैं? यह उन पर थोपा जा रहा है. उन्हें मेरी बैठक में भाग ना लेने या कार्यालय ना जाने की धमकी दी जा रही है. आईएएस अधिकारियों की गलती नहीं है.

(साभार सीएनएन न्यूज18)

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