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पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने आ रहा है चुनावी बॉन्ड

वित्त मंत्री ने बजट में चुनावी बॉन्ड की घोषणा करते हुए कहा था, ‘भारत में राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया को साफ सुथरा बनाने की आवश्यकता है

Bhasha Updated On: Dec 12, 2017 03:14 PM IST

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पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने आ रहा है चुनावी बॉन्ड

राजनीतिक दलों को चंदा उपलब्ध कराने की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित चुनावी बॉन्ड की वैध अवधि को 15 दिन रखा जा सकता है. कम अवधि के लिए जारी करने से बॉन्ड के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चुनावी बॉन्ड के लिए दिशानिर्देश करीब-करीब तैयार कर लिए गए हैं. वित्त मंत्रालय इन्हें देख रहा है और अंतिम रूप दे रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी बॉन्ड की घोषणा वर्ष 2017-18 के बजट में की है.

सूत्रों के अनुसार चुनावी बॉन्ड एक प्रकार के धारक बॉन्ड होंगे. जिस किसी के भी पास ये बॉन्ड होंगे वह इन्हें एक निर्धारित खाते में जमा कराने के बाद भुना सकता है. हालांकि यह काम तय अवधि के भीतर करना होगा.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हर राजनीतिक दल का एक अधिसूचित बैंक खाता होगा. उस राजनीतिक दल को जो भी बॉन्ड मिलेंगे उसे वह उसी खाते में जमा कराने होंगे. यह एक प्रकार की दस्तावेजी मुद्रा होगी और उसे 15 दिन के भीतर भुनाना होगा वर्ना इसकी वैधता समाप्त हो जाएगी.’ अधिकारी ने कहा कि बॉन्ड को कम अवधि के लिए वैध रखे जाने के पीछे उद्देश्य इसके दुरुपयोग को रोकना है साथ ही राजनीतिक दलों को वित्त उपलब्ध कराने में कालेधन के उपयोग पर अंकुश रखना है.

अधिकारी ने कहा कि चुनावी बॉन्ड के लिए नियमों को जल्द ही जारी कर दिया जाएगा और इस तरह के बॉन्ड से जुड़ी कुछ अन्य जानकारी इस काम के लिए प्राधिकृत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जारी की जाएगी.

किसने चंदा दिया यह नहीं पता चलेगा

चुनावी बॉन्ड एक प्रकार के प्रॉमिसरी नोट यानी वचनपत्र होंगे और इन पर किसी तरह का ब्याज नहीं दिया जाएगा.

चुनावी बॉन्ड में राजनीतिक दल को दान देने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी. ये बॉन्ड 1,000 और 5,000 रुपए मूल्य के होंगे.

वित्त मंत्री ने बजट में चुनावी बॉन्ड की घोषणा करते हुए कहा था, ‘भारत में राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया को साफ सुथरा बनाने की आवश्यकता है. चंदा देने वाले राजनीतिक दलों को चेक के जरिए अथवा अन्य पारदर्शी तरीकों से दान देने से कतराते हैं क्योंकि वह अपनी पहचान नहीं बताना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि किसी एक राजनीतिक दल को चंदा देने पर उनकी पहचान सार्वजनिक होने का अंजाम उन्हें भुगतना पड़ सकता है.’ वित्त मंत्री ने तब कहा था कि सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श कर वह चुनावी बॉन्ड के लिए नियम तैयार करेंगे.

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