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बीजेपी की जीत पर क्यों गरमाता है ईवीएम टैंपरिंग का मुद्दा?

गुजरात चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बाद से ही कांग्रेस और हार्दिक पटेल ने ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे थे

Updated On: Dec 19, 2017 12:54 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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बीजेपी की जीत पर क्यों गरमाता है ईवीएम टैंपरिंग का मुद्दा?

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजे सामने आने के बाद एक बार फिर ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है. कांग्रेस पार्टी और गुजरात में अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर ईवीएम में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने पहले भी ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.

गुजरात-हिमाचल के नतीजों के बाद एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए ईवीएम पर चुनाव आयोग के दावों को गलत करार दिया है. अरविंद केजरीवाल ने जनता के रिपोर्टर नाम की एक वेबसाइट की एक खबर को रिट्वीट करते हुए लिखा है, ‘इस खबर ने ईवीएम के दावों को पंचर कर दिया है. इस खबर के मुताबिक चुनाव आयोग के दावे गलत हैं.’

क्या है चुनाव आयोग का दावा?

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने दावा किया था कि ईवीएम में कोई गडबड़ी नहीं हो सकती है. चुनाव आयोग ने कहा था कि ईवीएम वन टाइम प्रोग्राम मशीन है जिसे ना तो कोई कम्प्यूटर कंट्रोल करता है, न ही कोई इंटरनेट या अन्य कोई नेटवर्क. इसलिए ईवीएम को हैक किया ही नहीं जा सकता.

कांग्रेस और दूसरी पार्टियों का कहना है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. ईवीएम में छेड़छाड़ करके गड़बडी भी की जा सकती है. गुजरात चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बाद से ही कांग्रेस और हार्दिक पटेल ने ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे थे.

गुजरात चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद एक बार फिर हार्दिक पटेल ने ईवीएम पर सवाल उठाया. जबकि कुछ पार्टियों ने हार्दिक पटेल और कांग्रेस के दावों को गलत करार दिया. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा रविवार को ट्वीट कर कहा था कि लोग हार के डर से ईवीएम में गड़बड़ी की बात कर रहे हैं.

शिकायत होने पर क्या करेगा चुनाव आयोग?

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने साफ कर रखा है कि अगर किसी को कोई शिकायत है तो रिटर्निंग अधिकारी के पास जा कर शिकायत कर सकता है. गड़बड़ी होने की आशंका पर पेपर ट्रेल की गिनती करवाई जा सकती है. कांग्रेस पार्टी ने राज्य में दूसरे फेज के मतदान के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर एक अपील दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.

शीतकालीन सत्र के दौरान संसद के बाहर जीत की निशान दिखाते गृह मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो:पीटीआई)

शीतकालीन सत्र के दौरान संसद के बाहर जीत की निशान दिखाते गृह मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो:पीटीआई)

ईवीएम टैंपरिंग को लेकर हाल के दिनों में कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने सवाल उठाए हैं. यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भी एसपी, कांग्रेस, और बीएसपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. यूपी के दो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती ने चुनाव आयोग को खुली चुनौती देते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी, जिसे चुनाव आयोग ने अस्वीकार दिया था.

कुछ महीने पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का स्पेशल सत्र बुला कर ईवीएम पर एक लाइव डेमो भी किया था. जिसमें आप के ग्रेटर कैलाश के विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा के अंदर यह साबित करने की कोशिश की थी किस प्रकार से ईवीएम को हैक किया जाता है.

चुनाव आयोग ने दी थी चुनौती

ईवीएम पर बढ़े बवाल पर चुनाव आयोग ने इसी साल मई महीने में देश के सभी राजनीतिक दलों की चुनौती स्वीकार करते हुए चुनाव आयोग के दफ्तर में ईवीएम हैक करने की चुनौती थी.

चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर कहा था कि मई के पहले हफ्ते से लेकर 10 मई तक कोई भी शख्स या पार्टी ईवीएम हैक करके दिखाए. चुनाव आयोग की इस चुनौती को एनसीपी, सीपीएम जैसे पार्टियों ने स्वीकार जरूर किया पर ईवीएम हैक करने में वे नाकाम रहे. इसके बाद चुनाव आयोग ने इस तरह की बातों को सिरे से खारिज कर दिया था.

एक बार फिर से गुजरात चुनाव के नतीजे के बाद अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने हमला बोला है. हार्दिक ने कहा है कि अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में जिन सीटों पर जीत का अंतर कम है वहां ईवीएम को लेकर संदेह पैदा होने लगा है. 10 से 15 सीटों पर हार-जीत का अंतर बहुत कम है, इससे ईवीएम टैंपरिंग की बात को बल मिल रहा है.

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