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मायावती को वाकई भारी पड़ सकती है 'नोटबंदी की कार्रवाई'

बसपा जैसी पार्टी को यह कार्रवाई चुनावों के मद्देनजर भारी पड़ सकती है.

Updated On: Dec 26, 2016 11:38 PM IST

Krishna Kant

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मायावती को वाकई भारी पड़ सकती है 'नोटबंदी की कार्रवाई'

प्रवर्तन निदेशालय को मायावती के भाई आनंद कुमार के बैंक खाते से 1.43 करोड़ रुपये मिले हैं. इसी ब्रांच में बहुजन समाज पार्टी के खाते में 104 करोड़ रुपये बरामद हुए हैं.

सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की दिल्ली स्थित करोलबाग ब्रांच पर छापेमारी की और यह रकम पकड़ी गई.

आयकर विभाग ने इसके पहले आनंद कुमार को नोटिस भी भेजा था. विभाग के पास जानकारियां हैं कि आनंद कुमार के पास कई बेनामी संपत्तियां जमा किए हुए हैं. इस संबंध में नोएडा के कई बिल्डर्स को भी नोटिस भेजे गए हैं. आनंद कुमार पर आरोप है कि उन्होंने बिल्डरों के साथ मिलकर बेनामी संपत्तियां बनाई हैं.

नोटबंदी के बाद से ही इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सबसे ज्यादा हमला करने वालों में मायावती ही रही हैं. सोमवार को भी उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर हमला बोला था.

लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के चेहरे का नूर उतर रहा है. चुनाव में जनता उन्हें सबक सिखाएगी.

नोटबंदी के बाद से वे लगातार प्रधानमंत्री को घेरने का प्रयास कर रही थीं. भाजपा को वे उत्तर प्रदेश में मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानकर बात कर रही थीं. मायावती अब तक भाजपा के खिलाफ आक्रामक थीं और नोटबंदी को इस तरह पेश कर रही थीं कि यह फैसला गरीबों और आम जनता के खिलाफ है.

यह मामला सामने आने के बाद मायावती बचाव की मुद्रा में आ जाएंगी और भाजपा बसपा और मायावती के खिलाफ आक्रामक मुद्रा में होगी.

जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नोटबंदी के मसले को ऐसे पेश कर रहे हैं कि जो लोग नोटबंदी का विरोध कर रहे हैं, वे काला धन का समर्थन कर रहे हैं या फिर जिनके पास काला धन है, वे ही लोग परेशान है. इस बरामदगी के बाद भाजपा और प्रधानमंत्री के आरोपों को बल मिलेगा.

भाजपा इस मामले को प्रचारित करके आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को भ्रष्टाचारी साबित करने का प्रयास करेगी. मायावती नोटबंदी के बाद से ही यह सफाई देती रही हैं कि उनकी पार्टी को कोई कॉरपोरेट फंडिंग नहीं मिलती और बसपा कार्यकर्ताओं के सहयोग से चलती है.

जो नागरिक नोटबंदी के फैसले को तकलीफ के बावजूद भी अच्छा बता रहे हैं, उनका भरोसा यही है कि इससे काला धन रखने वाले बर्बाद होंगे. भाजपा के लिए ऐसी जनता को समझाना आसान होगा कि मायावती को परेशानी इसीलिए हो रही थी क्योंकि उनके पास बेहिसाब संपत्ति है.

हालांकि, भाजपा को यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है क्योंकि लोगों को नोटबंदी से खासी परेशानी हुई है और अब तक यह परेशानी बनी हुई है. इसके अलावा, भाजपा खुद भी सवालों के घेरे में है.

नोटबंदी के ठीक पहले भाजपा के खाते में बड़ी संख्या में पैसे जमा होने के आरोप हैं. भाजपा द्वारा बड़ी संख्या में जमीनों की खरीद का भी मामला सामने आया है. नोटबंदी के बाद नये-पुराने नोटों के साथ भाजपा से जुड़े कई नेताओं-कार्यकर्ताओं के पकड़े जाने के मामलों पर भी भाजपा को संतोषजनक जवाब देना होगा.

भाजपा को फायदा हो या नुकसान, लेकिन बसपा जैसी पार्टी को यह कार्रवाई चुनावों के मद्देनजर भारी पड़ सकती है.

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