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आप के अयोग्य विधायकः तारीखों में जानिए कब क्या हुआ

संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है

Updated On: Jan 19, 2018 04:13 PM IST

FP Staff

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आप के अयोग्य विधायकः तारीखों में जानिए कब क्या हुआ

शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई के तहत चुनाव आयोग ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. इसे दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी के लिए भारी झटका माना जा रहा है. आयोग ने विधायकों की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी है. इसी के साथ दिल्ली की 20 सीटों पर उपचुनाव की नौबत आ गई है.

जानकारों का कहना है कि संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है. यह लाभ का पद केंद्र और राज्य किसी भी सरकार का हो सकता है.

प्रवीण कुमार (जंगपुरा), शरद कुमार (नरेला), आदर्श शास्त्री (द्वारका), मदन लाल (कस्तूरबा नगर), शिव चरण गोयल (मोती नगर), संजीव झा (बुरारी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), नरेश यादव (मेहरौली), जरनैल सिंह (तिलक नगर), राजेश गुप्ता (वाजीपुर), अलका लांबा (चांदनी चौक), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), विजेंद्र गर्ग (राजिंदर नगर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), अनिल कुमार वाजपेयी (गांधी नगर), सोमदत्त (सदर बाजार), सुखबीर सिंह डाला (मुंडका), मनोज कुमार (कोंडली, एससी), अवतार सिंह (कालकाजी)

पूरा मामला तारीखों में

13 मार्च 2015 को अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था.

पहले मई 2015 में चुनाव आयोग के पास एक जनहित याचिका भी डाली गई थी.

19 जून को प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया. इसके बाद जरनैल सिंह के पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए राजौरी गार्डन के विधायक के रूप में इस्तीफा देने के साथ उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई थी. आयोग का कहना है कि जब हाई कोर्ट ने विधायकों की नियुक्ति को असंवैधानिक बताकर उन्हें दरकिनार कर दिया था, तब ये विधायक

13 मार्च 2015 से आठ सितंबर 2016 तक ‘अघोषित तौर पर’संसदीय सचिव के पद पर थे.

8 सितंबर 2016 को अदालत ने 21 आप विधायकों की संसदीय सचिवों के तौर पर नियुक्तियों को दरकिनार कर दिया था. अदालत ने पाया था कि इन विधायकों की नियुक्तियों का आदेश उप राज्यपाल की सहमति के बिना दिया गया था.

22 जून को को राष्ट्रपति की ओर से यह शिकायत चुनाव आयोग में भेज दी गई. शिकायत में कहा गया था कि यह ‘लाभ का पद’ है इसलिए आप विधायकों की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए.

67 सीटें जीतकर केजरीवाल ने रचा था इतिहास

अन्ना आंदोलन के बाद 2013 के आखिरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पहली बार चुनाव में खड़ी हुई थी. चुनाव में पार्टी ने 28 सीटें हासिल की थीं जो बहुमत के लिए जरूरी 36 सीटों से 8 कम थीं. कांग्रेस के सहयोग से आप ने सरकार बनाई लेकिन 49 दिनों बाद ही अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था.

इस तरह की खबरें भी आईं कि केजरीवाल के इस निर्णय से दिल्ली की जनता में नाराजगी है. 2015 में जब दोबारा चुनाव हुए तो केजरीवाल ने लोगों के बीच जाकर अपने इस्तीफे के लिए माफी भी मांगी. लोगों ने उनकी माफी स्वीकारी और 67 सीटें जिताकर दिल्ली विधानसभा के इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें देने का कारनामा किया

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