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गोरखपुर हादसे में डॉक्टर कफील निर्दोष हैं तो दोषी कौन

पुलिस ने गोरखपुर में 33 बच्चों की मौत के मामले में डॉक्टर कफील खान के ऊपर से भ्रष्टाचार और प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप हटा लिए हैं

Updated On: Nov 26, 2017 12:10 PM IST

FP Staff

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गोरखपुर हादसे में डॉक्टर कफील निर्दोष हैं तो दोषी कौन

डॉक्टर कफील खान, गोरखपुर के बाबा राघव दास अस्पताल हादसे के तुरंत बाद ये नाम रातों-रात फरिश्ते की तरह उभरा. इसके कुछ ही दिन बाद वो खलनायक बन गए. पहले कहा गया अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से मरते बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टर कफील दोस्तों से मांगकर ऑक्सीजन सिलिंडर लाए. इसके अलावा भी जो कुछ कर सकते थे किया. इसके बाद कहा गया कि डॉक्टर कफील इस हादसे के जिम्मेदार लोगों में से थे. अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस चलाने के लिए वो अस्पताल से सिलिंडर निजी क्लीनिक पर ले जाते थे. जब अचानक से स्थिति बिगड़ गई तो वो गड़बड़ सुधारने की कोशिश कर रहे थे.

बहराल, खबर ये है कि पुलिस ने गोरखपुर हादसे में डॉक्टर कफील खान पर पुलिस ने प्राइवेट प्रैक्टिस और भ्रष्टाचार के आरोप हटा लिए हैं. कफील खान के खिलाफ इन दो मामलों में कोई सबूत नहीं मिला है. इस मामले में डॉक्टर कफील के करीबियों का कहना है कि रातों-रात उनके नायक बनने से परेशान नेताओं और अधिकारियों ने डॉक्टर कफील को बलि का बकरा बनाया था. बिना तथ्यों के आधार पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सकते थे.

गोरखपुर में 33 बच्चे मारे गए ये सच है. इनके मारे जाने के पीछे ऑक्सीजन न मिलना था ये भी सच है. ऑक्सीजन न मिलने के पीछे पेमेंट न होना सबसे बड़ा कारण था ये भी सच है. इस तरह के पेमेंट न होने के पीछे भ्रष्टाचार सबसे बड़ी वजह होती है, सब जानते हैं. अब सवाल है कि अगर ये भ्रष्टाचार डॉक्टर कफील खान ने नहीं किया तो किसने किया. अगर एक सरकारी अस्पताल का प्रशासन दोषी नहीं है तो क्या सरकारी अमले पर दोष डाला जाना चाहिए?

इसके साथ ही घटना का एक पहलू और भी है. जब डॉक्टर कफील खान आरोप लगाए गए तो सोशल मीडिया, राजनीतिक पार्टियों और मीडिया के एक बड़े तबके ने उन्हें दोषी की तरह पेश किया. उनके धर्म, उनकी राजनीतिक विचारधारा और रहन-सहन के बहाने उन्हें घेरा गया. जिस पर अब कोई बात नहीं होगी.

Gorakhpur Child Death

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल से बच्चों के शव लेकर जाते हुए उनके परिजन

डॉक्टर कफील खान के खिलाफ लगे चार्ज भले ही हटा लिए गए हों मगर गोरखपुर में हुई बच्चों की मौतों से जुड़े कुछ सवाल हैं जो और भी बड़े हो गए हैं.

क्या किसी भी व्यक्ति की नैतिकता को सिर्फ उसकी सोच या धर्म के आधार पर खत्म किया जा सकता है? क्या अब नए सिरे से जांच होगी और असल दोषी कौन है इसका पता लगाया जाएगा? अस्पताल में सारे काम एक सिस्टम में होते हैं. अस्पताल की व्यवस्था किसी कच्चे माल की मंडी की तरह नहीं होती कि गड़बड़ी पता नहीं चल पाए, तो क्या कुछ बड़े लोगों को बचाने में सही में बलि के बकरे इस्तेमाल किए जा रहे थे? आगे ऐसी घटना न हो इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

कुल मिलाकर एक साथ 33 बच्चों की मौत इस देश में कोई मुद्दा नहीं बन सकता. हां, अगर उसमें धर्म और जाति से जुड़े कुछ दूसरे मुद्दे निकाले जा सकते हैं. अगली बार जब भी चुनाव होंगे तो हर पार्टी के नेता आपसे विकास के लिए वोट मांगेगे. सड़कें बनेंगी और उसे विकास बताया जाएगा, इन बच्चों का क्या है, वो किसी विचारधारा का झंडा उठाने वाले नहीं थे तो उनके जाने का इतना फर्क नहीं पड़ता.

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