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शिमला का नाम बदलने से जयराम सरकार का कौन सा चुनावी वायदा पूरा होगा?

नाम बदलने की राजनीति यूपी के इलाहाबाद, हरियाणा के गुड़गांव के बाद अब हिमाचल प्रदेश के शिमला तक आ पहुंची है.

Updated On: Oct 22, 2018 07:05 PM IST

Matul Saxena

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शिमला का नाम बदलने से जयराम सरकार का कौन सा चुनावी वायदा पूरा होगा?
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर रविवार को दौरे पर सोलन पहुंचे तो शिमला के नए नामकरण को लेकर चलती सुगबुगाहटों पर उनसे सवाल किए गए. सीएम ने कहा कि शिमला का नाम बदलने का प्रस्ताव उनके समक्ष आया था लेकिन उन्होंने इस पर कोई बात नहीं की है, अगर हिमाचल के लोग इस बात पर ज्यादा जोर डालेंगे तो इस पर विचार किया जाएगा.

हालांकि इससे पहले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का नाम बदल कर इसे श्यामला करने के प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन देकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विश्व हिन्दू परिषद् की हिमाचल इकाई को प्रसन्न करने की थी.

कहा जा रहा है गुड़गांव और इलाहाबाद के बाद अब शिमला के नाम बदलने के प्रस्ताव से जयराम ठाकुर हरियाणा और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों की कतार में स्वयं को खड़ा देखना चाहते हैं. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के इस बयान से प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है. प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने शिमला का नाम बदलने की इस मुहीम का कड़ा विरोध करने निर्णय लिया है.

हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर

बीजेपी सरकार के चुनावी घोषणा-पत्र में इस तरह का कोई भी प्रस्ताव शामिल नहीं रहा है.

छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा यह शहर लगभग 35 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है. इस शहर को अंग्रेजों ने सन 1864 में देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था. आज़ादी के बाद यह पंजाब सरकार की ग्रीष्मकालीन और 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद इसे हिमाचल की राजधानी घोषित किया गया. अंग्रेजी हुकूमत ने इस शहर को विरासत के रूप में ढेरों भवन दिए हैं जो आज भी सही-सलामत हैं और अपने होने का इतिहास पर्यटकों को सुनाते हैं. शिमला अस्तित्व में आने से पहले' श्यामला ' था.

कहते हैं शिमला की जाखू पहाड़ियों पर श्यामला देवी का मंदिर था जिसके नाम पर यहां गांव बसा था. श्यामला देवी, माता काली का स्वरूप थीं. कालांतर में इस मंदिर की स्थापना कालीबाड़ी मंदिर के रूप में शिमला के तारघर से कुछ ही कदम आगे कर दी गई थी. अंग्रेजों ने 1903 में यहां छोटी पटरी की ट्रेन पहुंचा कर इसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दी. आज लाखों की संख्यां में पर्यटक गर्मियों में मैदानों की तपिश से राहत पाने के लिए और सर्दियों में बर्फ का आनन्द लेने के लिए शिमला का रुख करते हैं.

यह अंग्रेजों का ही करिश्मा था कि दक्षिणी एशिया का सबसे पहला आइसस्केटिंग रिंक शिमला में स्थापित हुआ था. जॉन कैनेडी द्वारा स्थापित कैनेडी हाउस आठवें दशक तक शिमला की पहचान बना हुआ था. हिमाचल प्रदेश में सरकार कांग्रेस की हो या बीजेपी की प्रदेश की राजधानी शिमला को किसी न किसी रूप में स्थानों अथवा भवनों के नाम बदलने का दंश सहना पड़ता है.

शिमला का महशूर इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज अस्पताल पहले 'स्नोडन' अस्पताल था जिसका नाम कांग्रेस राज में बदल दिया गया इसी प्रकार लेडी रीडिंग अस्पताल का नाम कमला नेहरू अस्पताल कर दिया गया. बीजेपी सरकार ने रिपन अस्पताल का नाम बदल कर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल कर दिया. सबसे रोचक किस्सा तो शिमला के प्रसिद्ध मालरोड का है- जहां अंग्रेजों के वक्त में हिंदुस्तानियों को घूमने की इजाजत नहीं थी- उस मालरोड का नाम बदल कर लाला लाजपतराय मार्ग कर दिया गया.

हैरानी की बात है कि नाम बदलने के बावजूद भी पर्यटक और स्थानीय लोग इन स्थानों को पुराने नामों से ही पुकारते हैं. बदले हुए नाम केवल सरकारी कागजों तक ही सिमित हैं. शिमला के मालरोड पर घूमने वाले किसी भी पर्यटक को यह मालूम नहीं कि मालरोड का नाम अब लालालाजपतराय मार्ग है. राजधानी शिमला में सरकारी दफ्तरों की भरमार को कम करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थल कांगड़ा जिला के मुख्यालय को भी वैकल्पिक शीतकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया है. जहां प्रदेश सरकार शीतकालीन स्तर का आयोजन करती है.

शिमला का नाम बदलने से क्या प्रदेश की राजधानी के विकास को तीव्रतम गति मिलेगी? यही सवाल विपक्ष के लोग बार-बार कर रहे हैं. दो लाख से अधिक की जनसंख्या वाले इस शहर की समस्याएं इतनी अधिक हैं कि वर्तमान बीजेपी सरकार भी उन्हें संभाल पाने में असमर्थ है. इस बरस गर्मियों के मौसम में पानी की किल्लत के कारण सरकार को शिमला आने वाले पर्यटकों पर रोक लगानी पड़ी.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

राजधानी में पानी की सप्लाई रिजमैदान के टैंक से ही होती है जिसकी स्थापना भी अंग्रेजों ने की थी. शिमला की अनियंत्रित ट्रैफिक-समस्या का भी सरकार अभी तक हल नहीं दे पाई है.

हिमाचल प्रदेश के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी वर्तमान सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उनका मानना है शिमला का नाम बदलने से देश के राजनीतिक इतिहास में इस शहर का योगदान मिटाने की यह एक सोची-समझी साजिश है. शिमला भारत-पाक समझौते का भी गवाह रहा है. देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भुट्टो के मध्य भारत- पाक समझौता भी शिमला में ही हुआ था. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के इस विचार के साथ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने भी सुर मिलाया है.

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