अखिलेश यादव का हाहाकारी विकास रथ खराब हो गया. हल्ला तो अइसा मचा था कि जैसे पूरा सैफई कुनबा उस बस में सवार होगा और लालकिले पर झंडा फहरा देगा, लेकिन बेचारा विकास रथ एक किलोमीटर भी नहीं जा पाया. बताते हैं कि पांच करोड़ का रथ है. विशुद्ध समाजवादी है.
अविश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, लोहिया और जेपी की आत्मा उसी बस में ठहरी हुई है. लोहिया ने अमर सिंह से बातचीत के बाद मुलायम और अखिलेश से वादा किया है कि 'हम नेहरू की तरह तुमसे सवाल नहीं करेंगे.'
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
लोहिया जी ने मुलायम और अखिलेश से उच्च स्तरीय मीटिंग के दौरान कहा, '1963 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अपने पर प्रतिदिन 25 हजार रुपए खर्च करते थे, जबकि देश की आम जनता प्रतिदिन 3 आने पर जीवन काट रही थी.'
'तब वक्त दूसरा था. स्वतंत्रता संग्राम का जोश था और दूसरी बात नेहरू से अखिलेश की क्या तुलना! अखिलेश अपना लड़का है और लड़कों से गलती हो जाती है.' तो अखिलेश की खराब खड़ी पांच करोड़ी बस में खाना, सोना, नाचना, गाना वगैरह तो है ही, दफ्तर से लेकर बिस्तर तक सब मौजूद है.
बस में कुशल पायलट भी था, हाई क्लास टॉयलेट भी था. बस एकदम चमाचम थी. मीडिया वालों को छूने की इजाजत नहीं थी.
मैंने एक पत्रकार मित्र से पूछा, क्या समाजवादी रथ छूने पर छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज हो सकता था?
वे बोले, मुलायम सिंह तो यह कहकर टाल जाते कि लड़कों से गलती हो जाती है, लेकिन यूपी पुलिस का कोई भरोसा नहीं है.
यूपी पुलिस के लिए यह कारनामा गौरव की बात होती. कल धरना देने गए रिहाई मंच के राजीव यादव को मार-मार भरता बना चुकी यूपी पुलिस कुछ भी कर सकती है.
तो फिर से बात बस की. बात भटकी तो विकास रथ की तरह भटक जाएगी. विकास रथ के बारे में बताया गया था कि अखिलेश बस से उतरेंगे ही नहीं. लेकिन बेचारे चढ़ते ही उतर गए.
उन्होंने बताया था कि यह विकास का रथ है. जो विकास का रथ मुख्यमंत्री को ही नहीं ढो सका और एक किलोमीटर जाकर खराब हो गया, वह यूपी की 20 करोड़ जनता को कैसे ले जाएगा?
अखिलेश यादव जी युवा हैं और खूब जोश से भरे हैं. कह रहे हैं कि हम जनता के बीच जा रहे हैं, हमारा काम बोलेगा.
अखिलेश समर्थकों ने सुना कि यूपी अगले हफ्ते देश का नंबर वन राज्य बन जाएगा और अदृश्य गुजरात मॉडल को पछाड़ देगा.
अखिलेश की बात सुनकर कई लोग सनाका खा गए. दुनिया में अभी तक सिर्फ जीव-जंतु ही बोलते हैं.
अब क्रियाएं भी बोलने लगें तो समझो विकास हो गया, जैसे मध्य प्रदेश में विकास हुआ.
आतंक के आरोपियों ने लकड़ी की चाबी से सेंट्रल जेल का ताला खोल लिया. जैसे मोदी सरकार ने विकास किया कि भारत नंबर वन बीफ निर्यातक बन गया.
वैसे सच कहा जाए तो विकास के नाम से डर लगता है. नेता जी कहते हैं कि विकास हो गया तो जनता कहती है कि कितने सारे विकास तो पहले से हैं. सौ-दो सौ और हो जाएंगे तो क्या फर्क पड़ेगा?
वह भी दिल्ली या सूरत कमाने जाएगा. आजाद पुर मंडी में सब्जी बेचेगा. सूरत से साड़ी का स्टॉक लाकर बुध बाजार में बेचेगा.
वहां पर पल्लेदारी करेगा. मुंबई जाकर वड़ा पाव बेचेगा. विकास का लड़का अखिलेश से मुफ्त का लैपटॉप लेगा.
दो तीन घंटे वीडियो गेम खेलेगा, फिर बैट्री डिस्चार्च हो जाएगी तो उसे दस-बारह हजार में बेच देगा.
बेचारा विकास हो जाए तो हो जाए, फर्क क्या पड़ता है. विकास होगा भी तो पांच करोड़ की बस हो जाएगा जिसे पहले ही दिन कहीं नहीं जाना है.
विकास को सड़क चाहिए, पानी चाहिए, बिजली चाहिए, घर चाहिए, रोजगार चाहिए, शिक्षा चाहिए, मेडिकल चाहिए, रोटी चाहिए.
अखिलेश यह नहीं बताते कि यह सब बेचारे विकास को कैसे मिलेगा! विकास पैदा होगा और देश के सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चों की भीड़ में शामिल हो जाएगा.
तो भैया अखिलेश, मोदी जी वाला विकास अभी तक हुआ नहीं है. आप भी जुमलेबाजी मत करना. यूपी जहां था, वहीं का वहीं है. ये पब्लिक है, सब जानती है.
NOTE- यूपी पुलिस से अपील है कि इस लेख पर एफआईआर दर्ज न करें क्योंकि यह व्यंग्य लेख है.
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