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गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल नाराज: कमजोर जनादेश में ये तो होना ही था!

नितिन पटेल की नाराजगी ने बीजेपी के भीतर की खींचतान, अंदरूनी कलह और पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश को सतह पर ला दिया है

Updated On: Dec 30, 2017 05:31 PM IST

Amitesh Amitesh

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गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल नाराज: कमजोर जनादेश में ये तो होना ही था!

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का अब तक अपना कार्यभार नहीं संभालना बीजेपी के भीतर की उस खींचतान को दिखाता है जिसकी शुरूआत नई सरकार बनने के साथ ही शुरू हो गई है. पाटीदार समाज से आने वाले नितिन पटेल नाराज हैं. इस नाराजगी की वजह उनको मनमाफिक विभाग नहीं दिया जाना है.

गुजरात में सरकार बनने के महज तीन दिन के भीतर ही इस तरह की खबरें आना रूपाणी सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है. क्योंकि अभी 5 साल सरकार चलाना है और जनादेश उतना मजबूत नहीं है जिसके दम पर वो पार्टी के भीतर नाराज लोगों की बातों को दरकिनार कर सकें.

वैसे भी नितिन पटेल उपमुख्यमंत्री हैं और मेहसाणा जैसे पटेल आंदोलन के गढ़ से फिर से जीत कर आए हैं. पटेलों की उपेक्षा और उनको हक दिलाने के नाम पर हार्दिक पटेल की तरफ से जो आंदोलन चलाया गया उसका असर भी दिखा, बीजेपी को कई इलाकों में इस बार हार का सामना करना पड़ा है.

ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी की कोशिश अपने परंपरागत पटेल वोटर को पूरी तरह से साथ जोड़ने की होगी. लेकिन, नितिन पटेल की नाराजगी खुलकर बाहर आना बीजेपी के लिए मुश्किलों वाला है. क्योंकि इससे फिर से पटेल समुदाय के भीतर अपनी उपेक्षा का संदेश जाएगा.

Photo Source: TV Grab

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने अभी तक अपने विभागों का कार्यभार नहीं संभाला है

क्यों नाराज हैं नितिन पटेल?

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, नितिन पटेल मनचाहा विभाग नहीं मिलने की वजह से नाराज चल रहे हैं. ऐसी खबर है कि पार्टी के कुछ विधायक भी नितिन पटेल के साथ हैं. सूत्रों के मुताबिक, नितिन पटेल उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ गृह और शहरी विकास मंत्रालय भी चाहते थे लेकिन, उन्हें यह विभाग नहीं दिया गया. इसके अलावा राजस्व और वित्त जैसे अहम विभाग भी उन्हें नहीं दिए गए.

विजय रूपाणी की पिछली सरकार में नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त और शहरी विकास मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन, इस बार उन्हें सड़क एवं भवन, स्वास्थ्य एवं परिवार, नर्मदा, कल्पसार, चिकित्सा और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक नितिन पटेल इस बार अपने पास वित्त मंत्रालय या गृह मंत्रालय में से कोई बड़ा मंत्रालय चाह रहे थे लेकिन, न ही उन्हें वित्त मंत्रालय मिला और न गृह मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया. गृह मंत्रालय तो खुद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अपने पास रखा है. जबकि वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौरभ पटेल को दी गई है.

हांलांकि दो दिन पहले प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान नितिन पटेल मीडिया ब्रीफिंग में कुछ नहीं बोले थे और जल्दी ही चले गए थे. जबकि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा था, ‘यह सच नहीं है कि वित्त विभाग संभालने वाले मंत्री कैबिनेट में नंबर दो हैं. नितिन पटेल हमारे वरिष्ठ नेता है और वह नंबर 2 बने रहेंगे.’

लेकिन, लगता है मुख्यमंत्री की तरफ से नंबर दो की हैसियत वाले बयान का असर नितन पटेल पर नहीं दिखा. उन्होंने अब तक अपने मंत्रालय का कामकाज नहीं संभाला है और इसे लेकर अपनी नाराजगी बीजेपी आलाकमान को बता दिया है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, नितिन पटेल ने 2-3 दिन तक का अल्टीमेटम दिया है वरना वो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देंगे.

हार्दिक पटेल ने दी हवा

उधर हार्दिक पटेल ने बीजेपी के भीतर नितिन पटेल को महत्व नहीं दिए जाने पर लगे हाथों उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर भी दे दिया है. चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद हार्दिक पटेल अब 2019 की तैयारी में जुट गए हैं. पाटीदार आंदोलन समिति के जरिए आरक्षण को लेकर फिर से हार्दिक की तरफ से मुहिम तेज की जा सकती है.

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पाटीदार समुदाय से आने वाले नितिन पटेल को हार्दिक पटेल ऑफर देकर लुभाने को कोशिश कर रहे हैं

अभी भी हार्दिक कांग्रेस के साथ ही खड़े नजर आ रहे हैं. लेकिन, बीजेपी के भीतर की अनबन से हार्दिक को उम्मीद की किरण दिखने लगी है. हार्दिक ने  नितिन पटेल को अपने साथ 10 विधायक भी लेकर आने का ऑफर तक दे दिया है. हार्दिक की तरफ से नितिन पटेल के लिए कांग्रेस में बात करने का भी भरोसा दिया जा रहा है.

लेकिन, हार्दिक की बातों में बीजेपी के भीतर की फूट दिखाने से ज्यादा पटेलों में एक संदेश देने की कोशिश हो रही है कि कैसे पटेल उपमुमख्यमंत्री की बीजेपी के भीतर वो सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वो हकदार हैं.

बीजेपी को उम्मीद मान जाएंगे नितिन पटेल

हांलांकि बीजेपी के भीतर इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है. गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष जीतू वाघानी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के घर पहुंचकर मामले को निपटाने की कोशिशों में जुट गए हैं. इस बारे में पार्टी आलाकमान की भी नजर बनी हुई है.

गुजरात बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान बताया कि नितिन भाई पटेल बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता हैं इसलिए वो भी इस बात को समझते हैं कि पार्टी हित में क्या है. बीजेपी नेता के मुताबिक, इस बाबत बीजेपी आलाकमान की भी नितिन पटेल के साथ बात हुई है और जल्द ही यह मसला सुलझ जाएगा. बीजेपी नेता एक से दो दिन के भीतर मसला सुलझने का दावा कर रहे हैं.

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कमजोर बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व करने वाले विजय रूपाणी के लिए सबको साथ लेकर चलना चुनौतियों भरा साबित होगा

बहरहाल, नितिन पटेल की नाराजगी ने बीजेपी के भीतर की खींचतान, अंदरूनी कलह और पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश को सतह पर ला दिया है. बीजेपी आलाकमान को भी अब लग रहा होगा, दो-तिहाई बहुमत और मुश्किल से बहुमत में आकर सरकार चलाने का क्या फर्क होता है.

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