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उपसभापति चुनाव में साफ दिखाई दी 2019 के चुनावों की झलक

बीजेडी और टीआरएस का समर्थन होने की वजह से बीजेपी काफी कुछ निश्चिंत थी कि उसे चुनाव जीतने के लिए ज़रूरी संख्या मिल जाएगी

FP Staff Updated On: Aug 09, 2018 04:02 PM IST

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उपसभापति चुनाव में साफ दिखाई दी 2019 के चुनावों की झलक

बीजेपी ने राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के ज़रिए जहां एक तरफ अपने सहयोगियों में विश्वास जगाने की कोशिश की है वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों की एकजुटता का पता लगा लिया है.

हालांकि बीजेपी के पास काफी सीटें हैं सरकार चलाने के लिए लेकिन नीतीश कुमार के करीबी को अपना उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने अपने साथ की छोटी पार्टियों को मनाने की कोशिश की है. पिछले तीन दशकों से हर सरकार लगभग छोटे दलों पर निर्भर रही है लेकिन बीजेपी के साथ ऐसा नहीं है.

जेडीयू उम्मीदवार पर क्यों सहमत हुई बीजेपी

बीजेपी का इस पद के लिए जेडीयू के उम्मीदवार पर सहमत होना उनकी मजबूरी भी थी और दूरदर्शिता भी. यह वर्तमान सहयोगी पार्टियों के लिए एक तरह का आश्वासन भी था. हालांकि एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी उसके पास चुनाव जीतने के लिए ज़रूरी सीटें नहीं थी इसलिए ये सीट जेडीयू को बीजेपी को दूसरी पार्टियों का सहयोग जुटाने में भी मदद मिली.

इसलिए अगर नवीन पटनायक को कुछ मजबूरियों के चलते बीजेपी को वोट देने में दिक्कत थी तो जेडीयू के उम्मीदवार को वोट देने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई और यही बात तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के लिए भी लागू होती है.

बीजेडी और टीआरएस का समर्थन होने की वजह से बीजेपी काफी कुछ निश्चिंत थी कि उसे चुनाव जीतने के लिए ज़रूरी संख्या मिल जाएगी. एआईएडीएमके खतरा हो सकती थी लेकिन जयललिता की मौत के बाद एआईएडीएमके ने शायद ही ऐसा कोई कदम उठाया हो जिससे मोदी सरकार को दिक्कत का सामना करना पड़े.

यहां तक कि शिवसेना जिसने कि मोदी सरकार के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वोटिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था वो भी इस बार बीजेपी के साथ में आ गई. राज्यसभा के इस चुनाव ने काफी कुछ ये भी साफ कर दिया है कि 2019 के चुनाव में कौन कहां खड़ा है.

टीडीपी ने पहली बार किया कांग्रेस का समर्थन

इसी के साथ यह भी दिखता है कि भारत की राजनीति में कितना परिवर्तन हो चुका है, क्योंकि यह पहली बार हुआ कि तेलगु देशम पार्टी ने कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन किया. जिस पार्टी की नींव ही 'एंटी-कांग्रेस' के मुद्दे पर रखी गई हो उसके लिए आज सबसे बड़ा चैलेंज बीजेपी है.

विपक्ष का गेम प्लान तभी असफल हो गया जब नवीन पटनायक ने एनसीपी नेता को बताया कि वो जेडीयू को समर्थन देने का वादा कर चुके हैं. संभवतः इसीलिए शरद पवार ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में वंदना चौहान को न उतारने का फैसला लिया.

(सुमित पांडे की न्यूज 18 के लिए रिपोर्ट)

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