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नोटबंदी ब्लैकमनी पर वार या बैंकों का उद्धार?

बैंक बड़े संकट से गुजर रहे हैं, नोटबंदी इसी संकट से उबरने का मास्टर स्ट्रोक है

Updated On: Nov 25, 2016 06:48 PM IST

Nasir Hussain

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नोटबंदी ब्लैकमनी पर वार या बैंकों का उद्धार?

नई दिल्ली. तमाम तकलीफें, मुश्किलें झेलने के बावजूद जनता का एक बड़ा तबका हजार और पांच सौ के नोट बंद किए जाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. इसकी वजह भी है. दरअसल सरकार ने नोटबंदी के ऐलान को करप्शन, ब्लैकमनी, आतंकवाद, जाली नोट जैसी कई समस्याओं पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह पेश किया है जिससे जनता के बीच ये संदेश गया है कि अभी भले ही दिक्कतें हो रही हों लेकिन जल्द ही ‘अच्छे दिन’ आएंगे.

क्या वाकई मामला इतना सीधा है, या फिर जैसे विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा मकसद एनपीए के चलते डूबते जा रहे सरकारी बैंकों को उबारना और खाली होते जा रहे उनके खजाने को आम जनता की मेहनत की कमाई से भर देना भी है. पिछले दिनों लोकसभा में सरकार ने बैंकों की सेहत को लेकर आरबीआई की जो रिपोर्ट सामने रखी वो भी इस बात की चुगली करती है कि बैंक एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़े थे. जानकार आरोप लगा रहे हैं कि नोटबंदी दरअसल इसी संकट से उबरने का एक मास्टर स्ट्रोक है.

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क्या होता है एनपीए?

लोन के रूप में दी गई वो रकम जिसे वापस पाने में बैंक सफल नहीं हो पाते और न ही उससे उन्हें कोई ब्याज मिलता है, उसे एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स कहा जाता है. किसी भी बैंक की साख इस बात पर निर्भर करती है कि उसका एनपीए कितना कम है. लोकसभा में पिछले दिनों सरकार ने बैंकों की हालत पर आरबीआई की 30 जून 2016 की रिपोर्ट पटल पर रखी जिसके अनुसार देश के 48 बैंकों पर तकरीबन छह लाख करोड़ रुपये का एनपीए है. सबसे ज्यादा एनपीए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का (93 हजार 137 करोड़) है. ये उसके कुल लोन का 7.8 फीसदी है. वहीं, पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए 55 हजार 3 करोड़ और बैंक ऑफ इंडिया का 43 हजार 935 करोड़ रुपये है. गौरतलब है कि ये जून 2016 तक के ही आंकड़े हैं और उसके बाद इसमें वृद्धि ही हुई है.

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9 माह में साढ़े तीन लाख करोड़ से छह लाख करोड़ हुआ एनपीए

आरबीआई ने सितंबर 2015 से बैंकों के एनपीए खातों को खंगालना शुरू किया था. बैंकों को एनपीए की रिपोर्ट देने के लिए एक समय सीमा भी तय की गई थी. सितंबर 2015 में बैंकों का कुल एनपीए तकरीबन साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये था, दिसंबर में ये रकम बढ़कर साढ़े चार लाख करोड़, मार्च 2016 में 5 लाख 94 हजार करोड़ तो जून 2016 में बढ़कर 5 लाख 96 हजार करोड़ रुपये हो गई. एनपीए में 9 माह में ढाई लाख करोड़ रुपये के इस इजाफे की भी वजह है. दरअसल आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि वे मार्च 2017 तक अपनी बैलेंस शीट दुरुस्त कर लें, यानी उन्हें अपने बैड लोन का पूरा खुलासा करना था. फिर क्या था, बैंकों को अब तक दबाकर-छुपाकर रखा गया बैड लोन जाहिर करना पड़ा और उनकी असली स्थिति सामने आ गई.

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फिच का दावा, नोटबंदी से भी नहीं सुधरेगी बैंकों की सेहत

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच के मुताबिक भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति अब भी कमजोर है. सरकारी बैंकों को मार्च 2019 तक 9000 करोड़ डॉलर की जरूरत होगी. वित्त वर्ष 2017 में बैंकों के एनपीए बढ़कर 12 फीसदी होने की आशंका है. एनपीए की दिक्कत 12-18 महीने जारी रहने की आशंका है.

एनपीए के चलते ही नोटबंदी के हालातः बंसल

मनमोहन सिंह सरकार में वित्त राज्यमंत्री रह चुके और पद के इस्तेमाल को लेकर विवादों में रहे कांग्रेस नेता पवन बंसल का कहना है कि बैंकों के एनपीए खाते, शेयर बाजार और म्युचुअल फंड में रुपया डूबना जैसे कारण भी मौजूदा हालात की एक वजह है. जल्दजबाजी में बिना सोचे-समझे सरकार ने यह कदम उठाया है. हम लोगों ने एनपीए खातों को बढ़ने नहीं दिया था. लोन वालों पर नकेल डालकर रखी हुई थी. लेकिन इस सरकार ने बड़े-बड़े लोन माफ कर दिए और जिससे वसूली होनी चाहिए थी, वो नहीं की. उसी के चलते आज जनता परेशान है और छोटे कारखाने और फैक्ट्रियों में काम बंद है.

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बैंकों को बचाने के लिए जनता की बचत पर वारः शर्मा

अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा का कहना है कि एनपीए के चलते बैंकों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है. पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन की सख्ती के चलते बैंकों ने नौ महीने में एनपीए की एक बड़ी रकम सामने रखी थी. छह लाख करोड़ की ये वो रकम है जिसके चलते पंजाब नेशनल बैंक जैसे कई बड़े बैंक कंगाल हो सकते थे. उन्हीं बैंकों को बचाने के लिए घरों में रखा जनता की बचत का रुपया कालेधन पर कार्रवाई की बात कहकर बैंक खातों में जमा कराया जा रहा है.

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नोटबंदी सिर्फ कालेधन पर वार करने के लिएः बीजेपी

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि विपक्ष के आरोप निराधार हैं. विपक्ष नोटबंदी पर विरोध का आधार ही तय नहीं कर पा रहा है. हर दिन वो बात बदल रहा है. कभी कोई तो कभी कुछ आरोप लगाता है. लेकिन सरकार ने सिर्फ और सिर्फ कालेधन पर कार्रवाई करने के लिए यह कदम उठाया है.

(साभार:  न्यूज18इंडिया.कॉम)

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