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नोटबंदी: मोदी ऐप से सरकार को नहीं मिलेगी ईमानदार राय

सरकार के लिए बेहतर तो ये होता कि ऐसा ऐप बनाती, जो किसी की प्राइवेसी में दखल न दे

Updated On: Nov 24, 2016 12:06 PM IST

Udbhav Tiwari

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नोटबंदी: मोदी ऐप से सरकार को नहीं मिलेगी ईमानदार राय

नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है. संसद के अंदर और बाहर सरकार के फैसले की निंदा हो रही है. चौतरफा हमलों से बचने के लिए सरकार ने सीधे जनता से ही अपने फैसले पर राय देने को कहा है.

आप नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप पर जाकर नोटबंदी के बारे में अपनी राय दे सकते हैं. ये ऐप आपको एंड्रॉयड प्ले स्टोर और iOS ऐप स्टोर पर मिल जाएगा.

चलिए ये जानने की कोशिश करते हैं कि सरकार का जनता की राय जानने का ये तरीका कितना कारगर है? और क्या वाकई इससे पब्लिक की ईमानदार राय सरकार को मालूम होगी?

नोटबंदी पर ऐप के जरिए अपनी राय देने के लिए आपको सबसे पहले इस ऐप को डाउनलोड करना होगा. जैसे ही आप इस ऐप को डाउनलोड करना चाहेंगे, ये आपके कॉन्टैक्ट, फोन और स्टोरेज में अपने दखल की इजाजत मांगेगा.

निजी जानकारी मांगने का क्‍या औचित्‍य?

आपके पास अपनी निजी जानकारी में दखल देने के सिवा कोई विकल्प नहीं है, अगर आप ऐप डाउनलोड करना चाहते हैं. इसके जरिए ये ऐप आपके फोन में मौजूद हर जानकारी को हासिल कर सकेगा. इसका नोटबंदी के सर्वे से कोई ताल्लुक नहीं.

वैसे सरकार के लिए बेहतर तो ये होता कि ऐसा ऐप बनाती, जो किसी की प्राइवेसी में दखल न दे. मगर उन्होंने ये ऐप बनाया है जो फोन के जरिए आपकी तमाम जानकारियों तक पहुंच बना लेगा.

ऐप डाउनलोड करने के बाद आपको इस पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. ये भी बहुत पेचीदा प्रक्रिया है. इसमें भी आपसे कई तरह की निजी जानकारियां मांगी जाएंगी. जैसे नाम, फोन नंबर, मेल आईडी वगैरह तो है ही. आपको अपना पता, काम और दिलचस्पी की चीजें भी बतानी होंगी. ये सारी जानकारी देना वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य है.

नोटबंदी पर राय देने के सर्वे में ये सभी बातें बताना क्यों जरूरी है, ये समझ से परे है. सरकार आपकी जानकारियों का क्या इस्तेमाल करेगी, ये भी साफ नहीं. आप गूगल, फेसबुक और दूसरी नेटवर्किंग साइट के लॉग इन के जरिए भी ऐप पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं.

Serpentine queue seen outside Bank of India at Sheikh Memon Street, Masjid as ATM was closed to non availability of cash, in Mumbai, India on November 11, 2016. (Sanket Shinde/SOLARIS IMAGES)

मगर वहां भी आपको तमाम तरह की बातें ऐप को बतानी होंगी. ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी क्या है, ये भी साफ नहीं. एक छोटी सी जेनेरिक प्राइवेसी पॉलिसी ऐप के आखिरी छोर पर छुपी हुई सी है. इससे बहुत सी बातें साफ नहीं होतीं कि ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने वाले का डेटा कैसे इस्तेमाल होगा और सुरक्षित रहेगा कि नहीं.

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आपको दस सवालों के जवाब देने हैं. ये तीन हिस्सों में बांटे जा सकते हैं. पहले छह सवालों के जवाब के तौर पर कई विकल्प दिए गए हैं. तीन सवालों के जवाब रेटिंग मीटर से देने हैं. और एक सवाल के जवाब में आप कोई भी सुझाव या बात कह सकते हैं.

जो बहुविकल्पीय सवाल हैं, उनके जवाब देने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं. लेकिन ये विकल्प ऐसे हैं कि ईमानदारी से आप नोटबंदी के फैसले के खिलाफ खुलकर अपनी बात नहीं कह सकते हैं. इसकी दो वजह हैं. पहली तो ये कि विकल्प ही ऐसे बनाए गए हैं.

नकारात्‍मक जवाब नहीं दे सकते

दूसरा ये कि सवाल ऐसे पूछे जा रहे हैं कि आप नकारात्मक जवाब नहीं दे सकते. मिसाल के तौर पर सातवें सवाल में पूछा गया है कि नोटबंदी से घर, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों की पहुंच में आ जाएंगी.

इसके जवाब के विकल्प के तौर पर जो विकल्प दिए गए हैं, वो हैं, आप पूरी तरह सहमत हैं, आप कुछ हद तक सहमत हैं या फिर आप कुछ कह नहीं सकते. यहां इंंकार का विकल्प ही नहीं. मान लिया कि राय देने वाला ये कहे कि कुछ कह नहीं सकते. तो आगे सवाल को विस्तार से या फिर नए सिरे से समझाने का विकल्प भी नदारद है.

इसका ये भी मतलब है कि आपके पास ना कहने का विकल्प नहीं है. यही बात सवाल नंबर 6 के बारे में भी कही जा सकती है. जिसमें पूछा गया है कि विमुद्रीकरण से गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगेगी. इसके जवाब में भी ना कहने का विकल्प नहीं. राय देने वाला बहुत से बहुत पता नहीं कह सकता है.

यानी सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब सरकार के फैसले के समर्थन में ही हो सकता है. इससे आए नतीजों के जरिए सरकार ये दावा कर सकती है कि जनता भी उसके फैसले के साथ है.

अब जैसे पहला सवाल है कि, क्या आपको लगता है कि देश में काला धन है. या फिर दूसरा सवाल है, क्या आपको लगता है कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई लड़ी जानी चाहिए?

इन दोनों ही सवालों के जवाब आप हां या ना में दे सकते हैं. इन सवालों का लोग हां में ही जवाब देंगे. लेकिन इन सवालों का नोटबंदी के फैसले से क्या ताल्लुक है, ये समझ से परे है. यानी जिस तरह के सवाल हैं और उनके जवाब के जैसे विकल्प हैं, उनसे सर्वे के नतीजे सरकार के हक में जाने तय हैं.

New Delhi: Opposition members form a human chain during a protest against the demonetization of Rs 500 and Rs 1000 notes at Parliament house in New Delhi on Wednesday. PTI Photo by Atul Yadav (PTI11_23_2016_000116B)

मसलन आप अगर ये कहते हैं कि काला धन एक दिक्‍कत है तो इसका यही मतलब होगा कि आप नोटबंदी के फैसले का समर्थन करते हैं. अब किसी एक सवाल से इस नतीजे पर कैसे पहुंचा जा सकता है, वो भी जो सीधा सवाल न हो.

सुधार की काफी गुंजाइश 

बाकी सवाल, सर्वे के हक में जाने वाले नहीं हैं. मगर उनमें भी सुधार की काफी गुंजाइश रह गई है.

जैसे रेटिंग मीटर को ही लीजिए. इसमें अगर आप नोटबंदी के फैसले के खिलाफ रेटिंग करते हैं तो संकेत ये जाएगा कि ये अच्छा विकल्प नहीं. क्योंकि इनमें बड़े, खतरे के लाल निशान हैं. इसी तरह सवाल नंबर पांच 500-1000 के नोट बंद करने के बारे में आपकी राय जानना चाहता है.

इसी तरह तीसरा सवाल, काले धन के खिलाफ सरकार के एक्शन के बारे में है. इसमें सरकार के किसी भी फैसले पर आपका ऐतराज नेगेटिव हो जाता है.

ऐसे में जो सवाल नंबर दस है उसमें ही आप खुलकर सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ कुछ कह सकते हैं. अब वहां आप सुझाव देंगे तो उसका सर्वे के नतीजों पर बहुत फर्क नहीं पड़ेगा.

इन बातों से साफ है कि नरेंद्र मोदी ऐप और इसके जरिए किया जा रहा सर्वे, दोनों ही काफी पक्षपातपूर्ण तरीके से सरकार के समर्थन में झुकाव वाले हैं. नोटबंदी के फैसले के खिलाफ आपकी राय के लिए इसमें कोई जगह नहीं है.

सरकार अगर वाकई जनता की राय को लेकर ईमानदार है, तो उसे ऐप और सवालों में बदलाव करना चाहिए. ताकि लोग खुलकर अपनी बात कह सकें.

सरकार तक सही राय पहुंचेगी तभी वो अपने कदम की समीक्षा कर सकेगी और उसमें जरूरी बदलाव कर सकेगी. अगर इसी तरह के ऐप से सरकार सर्वे कराने पर अड़ी रहती है तो इसके गलत नतीजे भी आ सकते हैं. सरकार को सही फीडबैक नहीं मिलेगा. जनता और हुकूमत के बीच खाई और बढ़ेगी.

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