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विपक्ष को पीएम मोदी ने किया चकित

कांग्रेस पार्टी के नेताओं को उम्मीद नहीं थी कि पीएम सदन में मौजूद रहेंगे

Updated On: Nov 24, 2016 09:43 PM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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विपक्ष को पीएम मोदी ने किया चकित

कांग्रेस पार्टी के नेताओं को यह उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में नोटबंदी पर बहस के दौरान मौजूद रहेंगे. भाजपा नेताओं ने जब विपक्ष के कुछ नेताओं को बताया कि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद रहेंगे तो वे चकित रह गए. कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने तय किया था कि सदन की कार्यवाही को चलने न दिया जाए.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद चाहते थे कि नोटबंदी के संदर्भ में जब तक आम लोगों की परेशानियों का समाधान नहीं होता, तब तक राज्यसभा की कार्यवाही में बाधा डाली जाए. कांग्रेस, सपा, माकपा व भाकपा के नेताओं की राय थी कि यदि प्रधनामंत्री निरंतर मौजूद रहे तो बहस शुरू की जा सकती है.

संसद परिसर में बारह दलों द्वारा बुधवार मानव श्रृंखला बनाने के बाद भी विपक्षी दलों के बीच नोटबंदी पर एकता का अभाव देखा गया. ममता बनर्जी ने 28 अक्टूबर को भारत बंद का आह्वान किया, लेकिन अन्य दलों के कहने पर आक्रोश दिवस के रूप में तब्दील कर दिया.

कांग्रेसी नेताओं के बयान में उभरे मतभेद

राज्यसभा में हमेशा खामोश बैठे रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने गुरुवार को मोदी सरकार के खिलाफ दहाड़ने की कोशिश की, लेकिन डॉ. सिंह ने सदन में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद से ही अपनी असहमति जाहिर कर दी. गुलाम नबी आजाद ने सदन में कहा था कि कांग्रेस पार्टी नोटबंदी का विरोध नहीं करती है. डॉ. सिंह ने यह कहकर नोटबंदी का विरोध कर दिया कि यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी गलती और कानूनी लूट है. इससे जीडीपी में 2 प्रतिशत की कमी आएगी.

कांग्रेस सांसद इस बात पर आश्चर्यचकित थे कि नोटबंदी पर पार्टी ने पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम की बजाय डॉ. मनमोहन सिंह को क्यों तरजीह दी? राज्यसभा में बहस की शुरुआत आनंद शर्मा ने की थी. कहा जा रहा है कि पार्टी की इस अनदेखी से पी.चिदंबरम काफी नाराज हैं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली इन दिनों कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं. पार्टी के भीतर उनके खिलाफ भाजपा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने ही मोर्चा खोल रखा है. संसद भवन में वे पत्रकारों के साथ बातचीत में खुलकर कहते हैं कि विमुद्रीकरण से पैदा हुई स्थिति का सामना करने में जेटली बुरी तरह विफल रहे हैं.

डा. स्वामी का कहना है कि पार्टी के भीतर कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विफल करने की साजिश कर रहे हैं. वहीं जेटली के समर्थकों का कहना है कि डॉ. स्वामी चाहते थे कि वे मोदी के भी स्वामी बनें, लेकिन अभी तक उनको इस अभियान में सफलता नहीं मिल पाई है. स्वामी चाहते हैं कि वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी उनको मिल जाए.

जेटली की हिदायत नहीं मिलेगी रियायत

नोटबंदी से लगभग सभी राजनीतिक दलों के सांसद प्रभावित हुए हैं और ऐसे सांसदों की संख्या कम नहीं है. इस सांसदों को अभी भी उम्मीद है ‍कि विपक्षी दलों के विरोध का असर प्रधानमंत्री मोदी पर पड़ेगा और वे कुछ रियायतों की घोषणा करेंगे. वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐसे सांसदों को हिदायत दी है कि वे किसी तरह की रियायत की उम्मीद न करें.

कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अगला झटका राजनीतिक दलों को देनेवाले हैं. राजनीतिक दलों को मिलनेवाले चंदे के नियमों में भारी फेरबदल की तैयारी हो रही है. राजनीतिक दलों की आय का 90 प्रतिशत हिस्सा नकदी से प्राप्त होता है, जिसका सोर्स हमेशा संदिग्ध रहता है. हो सकता है कि राजनीतिक दलों को आय के साथ-साथ खर्च का हिसाब भी चुनाव आयोग को देना पड़ेगा.

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