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पूर्व पीएम और रिजर्व बैंक गवर्नर के सवाल

नोटबंदी लूट की तरह है और इससे देश की विकास दर दो फीसदी तक गिर सकती है.

Updated On: Nov 24, 2016 06:41 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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पूर्व पीएम और रिजर्व बैंक गवर्नर के सवाल

नोटबंदी के विरोध में जारी घमासान के बीच आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में मोर्चा संभाला. बतौर अर्थशास्त्री उन्होंने नोटबंदी के फैसले पर कई सवाल खड़े किए. राज्यसभा में मनमोहन सिंह ने साफ किया कि उन्हें नोटबंदी के फैसले से कोई परेशानी नहीं है. लेकिन जिस तरह से आनन फानन में ये फैसला लागू किया है उस पर गंभीर सवाल है.

उन्होंने कहा कि इस फैसले को अव्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है. उस अव्यवस्था का खामियाजा आम जनता भुगत रही है. अबतक नोटबंदी के फैसले की वजह से 60 से 65 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

नोटबंदी लूट की तरह

मनमोहन सिंह ने नोटबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि नोटबंदी लूट की तरह है और इससे देश की विकास दर दो फीसदी तक गिर सकती है. नोटबंदी की वजह से कारोबार ठप हो गया है. कृषि क्षेत्र, छोटे उद्योगों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को काफी नुकसान होगा.

नोटबंदी से उपजी परेशानियों के लिए पीएम मोदी ने जनता से 50 दिनों का समय मांगा है. लेकिन मनमोहन सिंह के मुताबिक 50 दिनों का समय नाकाफी है. उन्होंने कहा कि ये पचास दिन गरीब और कमजोर के लिए पीड़ादायक हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि हम नहीं जानते कि इससे क्या फायदे होंगे. जो लोग गरीब और कमज़ोर हैं उसके लिए ये 50 दिन काफी भारी पड़ेंगे.’

लोगों का भरोसा कम होगा

मनमोहन सिंह आरबीआई के गवर्नर भी रह चुके हैं. मोदी सरकार के नोटबंदी फैसले को उन्होंने तीन अलग-अलग नजरियों से देखा और विश्लेषण किया. नोटबंदी के बाद जैसे-जैसे हालात बिगड़े तो सरकार ने नए नियम भी बना दिए. सरकार की दलील है कि उसने नोटबंदी जैसे कड़े फैसले में भी लचीला रुख अपनाया है. लेकिन मनमोहन सिंह ने हर दिन नियम बनाने पर सवाल खड़ा किया. उनका आरोप है कि हर दिन नए नियम लागू करने से साफ होता है कि पीएमओ, वित्त मंत्रालय और आरबीआई पूरी तरह नाकाम रहे हैं.

मनमोहन सिंह का सीधा सवाल था कि किस देश में लोग अपना जमा पैसा निकालने के लिए सरकार से इजाजत मांगते हैं. नोटबंदी पर तीखा हमला करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, 'इससे फैसले से हमने आम लोगों का बैंकिंग सिस्टम और करेंसी सिस्टम पर भरोसा कम किया है. यही इस फैसले की निंदा के लिए काफी हैं.'

पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले को सरकार ऐतिहासिक बता रही है जबकि मनमोहन सिंह एक बड़ी गलती करार दे रहे हैं. ये वक्त ही बताएगा कि ये ऐतिहासिक फैसला था या ऐतिहासिक भूल जिसने देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीति के भूगोल को ही बदल कर रख दिया .

 

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