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क्या येचुरी और करात के टकराव से टूट जाएगी सीपीएम?

सीपीएम के जानकारों के मुताबिक, पार्टी के इतिहास में अब तक इस तरह की लॉबिंग पहले नहीं देखी गई, जैसी येचुरी और करात के बीच टकराव को लेकर देखी जा रही है

Updated On: Apr 20, 2018 08:52 PM IST

FP Staff

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क्या येचुरी और करात के टकराव से टूट जाएगी सीपीएम?

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPM) में पड़ रही फूट धीरे-धीरे सामने आती जा रही है. पार्टी के अंदर महासचिव सीताराम येचुरी और पूर्व महासचिव प्रकाश करात के धड़ों के बीच की दरार लगातार बढ़ने से सीपीएम के भविष्य को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं भी जाहिर किए जा रहे हैं.

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस के साथ गठजोड़ को लेकर सीपीएम के अंदर तनातनी चल रही है. करात धड़ा यह मानता है कि चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के साथ जाना ठीक नहीं, जबकि येचुरी और उनके समर्थकों का मानना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने पर उन्हें फायदा होगा. येचुरी और करात की टकराव के बीच सीपीएम के भविष्य पर अपना नजरिया रख रहे हैं सीनियर जर्नलिस्ट के बेनेडिक्ट...js

अविभाजित कम्युनिस्ट पार्टी के 93 साल और सीपीएम के 54 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब पार्टी में 'सीक्रेट बैलेट' यानी गुप्त मतपत्र की मांग उठाई जा रही है. इसके पीछे ये तर्क दिया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा करने से सीपीएम-कांग्रेस गठबंधन का भविष्य तय होगा. वहीं, आम चुनाव से पहले गैर-बीजेपी गठबंधन की कवायद के लिए भी ऐसा करना जरूरी है.

'सीक्रेट बैलट' की मांग उठने के बाद सीपीएम दो धड़ों में बंट गई है. एक धड़ा पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी का है और दूसरे धड़े का नेतृत्व पूर्व महासचिव प्रकाश करात कर रहे हैं. येचुरी का मानना है कि बीजेपी को हराने के लिए सभी लेफ्ट-सेक्युलर-डेमोक्रेटिक ताकतों और यहां तक की कांग्रेस को एक साथ आना होगा. लेकिन, येचुरी के विरोधी प्रकाश करात नहीं चाहते कि सीपीएम कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का कोई गठबंधन करे.

सीपीएम के पास नए पॉलिटिकल रेजोल्यूशन को अपनाने, नया महासचिव चुनने या पुराने महासचिव को दोबारा चुनने के लिए दो दिन बचे हैं. इसके लिए हैदराबाद में मीटिंग भी चल रही है. लेकिन, येचुरी-करात के धड़ों के बीच आपसी घमासान और लॉबिंग के कारण पार्टी कोई भी फैसला नहीं ले पा रही. बुधवार को कुछ प्रतिनिधियों ने फिर से 'सीक्रेट बैलट' की मांग उठाई.

गुरुवार को 11 राज्यों के प्रतिनिधियों ने इसपर अपने विचार रखे. इनमें से 6 राज्यों ने अलग-अलग राय दी है. जबकि, महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने भी 'सीक्रेट बैलट' की मांग को समर्थन किया.

जनवरी में कोलकाता में हुए सेंट्रल कमिटी की मीटिंग में करात के धड़े ने येचुरी के रेजोल्यूशन को 31:55 वोट से हरा दिया था. वहीं, बुधवार को हैदराबाद में हुई मीटिंग में सेंट्रल कमिटी ने करात के रेजोल्यूशन के लिए 286 संशोधन स्वीकार किए हैं. इनपर शुक्रवार को चर्चा के बाद शनिवार को वोटिंग कराई जाएगी.

हैदराबाद में मंगलवार को हुई मीटिंग में सेंट्रल कमिटी ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी से 764 प्रतिनिधिमंडल के सामने अल्पसंख्यकों के विचार रखने को कहा था. वहीं, पूर्व महासचिव प्रकाश करात बहुसंख्यक ड्राफ्ट रेजोल्यूशन पेश किया था. करात ने इसमें कांग्रेस की जरूरत नहीं होने पर जोर दिया था. येचुरी धड़े ने तर्क दिया था कि चुनावी सफलता के बिना पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती और न ही 'फासीवादी' संघ परिवार के खिलाफ लड़ सकती है.

सीपीएम ने पिछले महीने त्रिपुरा में बीजेपी के हाथों करारी हार से कोई सबक नहीं लिया है. पार्टी मुश्किल में है लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. येचुरी और करात के समर्थक एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं.

इससे पहले, पोलित ब्यूरो के सदस्यों में वृंदा करात (70), बीवी राघवुलू (67) एस रामचंद्रन पिल्लई (80) जैसे नेता को येचुरी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा था. रामचंद्रन पिल्लई की उम्र आड़े आ रही है. बीवी राघवुलू येचुरी के मुकाबले फिलहाल नौसिखिया है. वृंदा करात पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया जा सकता है क्योंकि वो प्रकाश करात की पत्नी हैं. ऐसे में 69 साल के माणिक सरकार बड़े दावेदार के तौर पर सामने आए हैं. उनके समर्थकों को लगता है कि वो येचुरी को हरा देंगे.

पार्टी के संविधान में एक महासचिव को अधिकतम तीन बार लगातार चुनने की अनुमति होती है. करात को 2012 में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया था. यानी 2005 से 2015 के बीच वो करीब 10 साल तक पार्टी की मदद करते रहे.

कहा जा रहा है कि येचुरी हरकिशन सिंह सुरजीत की राह पर चल रहे हैं. उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीजपी के खिलाफ बाकी दलों को एक जुट करने में अहम रोल निभाया था. वहीं काम येचुरी करना चाहते हैं.

माणिक सरकार के खिलाफ ये बात जा रही है कि पिछले साल, एबीवीपी को  त्रिपुरा में छात्र संघ के चुनाव में 27 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि राज्य में 22 सरकारी कॉलेज थे, फिर भी सरकार ने कुछ भी नहीं किया. क्या ऐसा नेता कैडर को उत्साहित कर सकता है और राष्ट्रीय स्तर पर सीपीएम के लिए उम्मीदें जगा सकता है.

सीपीएम के जानकारों के मुताबिक, पार्टी के इतिहास में अब तक इस तरह की लॉबिंग पहले नहीं देखी गई, जैसी येचुरी और करात के बीच टकराव को लेकर देखी जा रही है. इसमें जीत किसकी होगी, ये प्रतिनिधिमंडल के मूड पर निर्भर करता है. देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि ये प्रतिनिधिमंडल 'सीक्रेट बैलट' के साथ जाते हैं या उसके खिलाफ होते हैं.

(न्यूज़18 के लिए के. बेनेडिक्ट, लेखक सीनियर जर्नलिस्ट और राजनीतिक समीक्षक हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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