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यूपी चुनाव: बीजेपी के लिए भारी पड़ सकती है नोटबंदी

नोटबंदी से हो रही परेशानी की बीजेपी को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी

Updated On: Dec 18, 2016 11:44 AM IST

Sreemoy Talukdar

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यूपी चुनाव: बीजेपी के लिए भारी पड़ सकती है नोटबंदी

नोटबंदी के 40 दिनों बाद अब भारतीय जनता पार्टी खेमे में भी चिंता बढ़ने लगी है. इतने बड़े कदम का चुनाव पर असर पड़ना लाजमी है. अब बीजेपी नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी हैं.

आम तौर पर कोई भी सरकार बड़े क्रांतिकारी बदलाव से इसलिए घबराती है क्योंकि इसका असर बहुत आगे तक होता है. और चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. जबकि, इससे होने वाला फायदा अगली सरकार को होता है.

ऐसा व्यवस्था में अामूलचूल बदलाव करने पर होता है. बेशक नोटबंदी ऐसा ही एक बड़ा बदलाव है.

जोखिम उठाने से घबराने वाले नहीं

नरेंद्र मोदी कभी भी जोखिम उठाने से घबराते नहीं हैं. नोटबंदी जैसा बड़ा जुआ खेलने की हिम्मत उनकी इसी सोच का नतीजा है.

जनता के नायक मोदी को अपनी संवाद कला पर पूरा विश्ववास है. इसी विश्वास के भरोसे मोदी ने नोटबंदी के जिन्न को बाहर निकाला. अब इस पर काबू करने की हिम्मत मोदी ही कर सकते हैं.

pm modi

जोड़-घटाव यही किया होगा कि शुरुआती दिक्कतें दूर हो जाएंगी. और सिस्टम कंप्यूटर की तरह री-बूट हो जाएगा. जिससे काले धन पर प्रहार होगा और नकदी पर निर्भरता कम होगी. टैक्स के दायरे में ज्यादा लोग आ जाएंगे और सरकार को राजस्व प्राप्ति होगी.

कर वसूली बढ़ने और पुराने नोटों पर रिजर्व बैंक की देनदारी खत्म होने से सरकार को फायदा होने की उम्मीद रही होगी. डिजिटल इकोनॉमी की बात मुद्दे से भटकाने वाली नहीं है. बल्कि ये नकदी घटने का तार्किक नतीजा होगा.

लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत इससे होने वाली परेशानी से है. नोटबंदी से फौरी दिक्कतें हो रहीं हैं. नोटबंदी के चलते हो रही मौंतों की खबर आ रही है. बेराजगारी बढ़ रही है. गरीबों को परेशानी हो रही है. अब जनता का धैर्य जवाब देने लगा है.

सवाल यह उठता है कि आखिर यह दिक्कतें कब खत्म होंगी?

आलोचकों की माने तो छह महीने. जिस तरह के बड़े बदलाव के दौर से हिंदुस्तान गुजर रहा है उस लिहाज से 180 दिन की परेशानी कुछ भी नहीं है.

राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी

फैसला लेने वाला नेता चाहे कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो. जनता अपनी दिक्कतों का हिसाब मांगती है. यहां भी बीजेपी को नोटबंदी की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी.

ICICI Bank ATM

शुरू में प्रधानमंत्री ने लोगों से 50 दिन का समय मांगा था. बाद में उन्होंने कहा कि 50 दिन के बाद चीजें सामान्य होनी शुरु होंगी. ये शायद पहला संकेत था कि पूरी योजना सही दिशा में नहीं बढ़ रही है.

बहस को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने वाले और शानदार वक्ता के तौर पर चर्चित मोदी ने संसद में इस पर बहस से किनारा करना ही उचित समझा. बिखरे विपक्ष ने उनका काम आसान कर दिया.

इस सत्र के खत्म होने से एक दिन पहले तक विपक्ष कोई भी दबाव डालने में विफल रहा. इससे मोदी की समस्या कम नहीं होती.

उनकी सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि बनाए रखना है. क्योंकि हाल की कुछ घटनाओं से जाहिर है कि मोदी जैसा चाहते थे वैसा नहीं हुआ.

चुनाव में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी पार्टी सांसदों ने आगाह कर दिया है. नोटबंदी पार्टी के लिए किसी टाइम बम का रूप ले चुकी है. जो कभी भी फट सकता है.

पार्टी बैठकों से जो खबरें छन कर आई हैं, उससे साफ लगता है कि जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ता चिंतित हैं. चुनाव में इसका असर पड़ने की चिंता सताने लगी है.

इसमें कोई शक नहीं कि मोदी और अमित शाह की पकड़ पार्टी पर बेहद मजबूत है. लेकिन ऐसा लगता है कि अब ये पकड़ कुछ ढीली पड़ रही है.

BJP parliamentary party meeting

उत्तर प्रदेश के कुछ नेताओं ने दिल्ली में अमित शाह को बताया कि 29 सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक से जो उत्साह का संचार हुआ था. वो नोटबंदी के बाद खत्म होने लगा है.

आम धारणा यही बनी है कि अगर अगले एक पखवाड़े में कैश की किल्लत खत्म नहीं हुई, तो पार्टी को चुनाव में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

छवि पर दाग लगने की आशंका

अभी तो यही लग रहा है कि एटीएम मशीनों में जरूरी बदलाव के बावजूद कैश नहीं है. बैंक अपने हाई प्रोफाइल ग्राहकों के लिए नकदी रख रहे हैं और एटीएम खाली पड़े हैं.

इस लिहाज से ये समस्या जल्दी ही खत्म हो जाएगी, कह पाना मुश्किल है.

प्रधानमंत्री ने नोटबंदी को लागू करने में आ रही दिक्कतों पर लगातार नजर रखने का दावा किया है. पर साफ तौर पर उन्होंने किसी मान्य नियम को बदलने के खिलाफ भारतीयों की जन्मजात प्रवृत्ति को नजरअंदाज किया. इससे उनकी अपनी छवि पर दाग लगने की आशंका है.

आम लोगों का बढ़ रहा गुस्सा

न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक यूपी के एक बीजेपी सांसद ने अमित शाह को बताया कि इनकम टैक्स के छापों में करोड़ों के कैश पकड़े जाने और आम लोगों के कतार में खड़ा रहने से गुस्सा बढ़ रहा है.

एक निजी बैंक को अपने 24 कर्मचारियों को सस्पेंड करना पड़ा क्योंकि उस ब्रांच में कई फर्जी खाते खोले गए थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग और दूसरी एजेंसियों ने 8 नवंबर के बाद से देश भर में 586 छापे मारे हैं. जिनमें 300 करोड़ की पुरानी करेंसी और 79 करोड़ नई करेंसी में बरामद किए गए. साथ ही 2600 करोड़ रूपए की अघोषित आय का पता चला.

Cash Seized

नोटबंदी के बाद हुई कार्रवाई में जब्त करेंसी

इसी बीच नेटवर्क 18 समूह ने नोटबंदी पर जो सर्वे कराया उसके मुताबिक 4680 लोगों में 55 फीसदी ने फैसले को ठीक कहा. जबकि 45 फीसदी लोगों ने इसके खिलाफ राय दी.

डिजिटल इकोनॉमी के फायदे

दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी ने अपने एप के जरिए लोगों से विचार मांगे थे तब 90 फीसदी लोगों ने पक्ष में राय दी थी.

पीएम मोदी पर दबाव दिख रहा है. वो शुक्रवार को पार्टी सांसदों से भी मिले. इसमें उन्होंने विपक्ष को निशाना बनाया पर ज्यादा समय ये बताने में दिया कि डिजिटल इकोनॉमी के क्या फायदे हो सकते हैं.

लेकिन, अगर कैश की दिक्कत रहेगी, उन्हें ये ही बात नेताओं को समझाने में भी दिक्कत आएगी. सिर्फ समझाने से बात नहीं बनने वाली.

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