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आबादी घटाने पर धर्मगुरुओं से हो सकती है चर्चा

बीजेपी के संजय पासवान ने कहा कि हर धर्म के धर्मगुरूओं को बुलाकर केंद्र सरकार को इस मसले पर बात करनी चाहिए

Bhasha Updated On: Apr 05, 2017 07:31 PM IST

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आबादी घटाने पर धर्मगुरुओं से हो सकती है चर्चा

देश की बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए लोकसभा में बुधवार को जहां केंद्र सरकार से सभी धर्मों के धर्मगुरूओं को बुलाकर इस पर गंभीर चर्चा कराने की मांग की गई तो साथ ही इस समस्या के समाधान के लिए नोटबंदी जैसा कोई कड़ा फैसला लिए जाने का भी सुझाव दिया गया.

लोकसभा में ‘सभी के स्वास्थ्य और कुशलता के लिए भावी उपाय’ विषय पर नियम 193 के तहत चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजेपी के डॉ. संजय पासवान ने कहा कि देश की आबादी पर गंभीर बहस की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘ यह सही बात है कि पढ़े लिखे लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं. बांग्लादेश में जुमे की नमाज के बाद कहा जाता है कि दो बच्चे से ज्यादा पैदा मत करो लेकिन भारत में कहा जाता है कि छह छह बच्चे पैदा करो.’

बढ़ती आबादी पर गंभीरता से सोचना होगा

पासवान ने कहा कि हर धर्म के धर्मगुरूओं को बुलाकर केंद्र सरकार को इस मसले पर बात करनी चाहिए. हर धर्म को इस समस्या की गंभीरता को समझना होगा क्योंकि पूरी आबादी का स्वरूप बिगड़ रहा है.

उन्होंने इस संबंध में सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रोत्साहन योजनाओं को भी नए सिरे से परिभाषित किए जाने की मांग की.

बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्थिति अधिक विकट होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शिक्षा नीति और बीमा पॉलिसी में भी बदलाव करने होंगे.

पासवान ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने, दवाओं के लिए एमआरपी मूल्य तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं को एक विभाग के तहत लाए जाने का भी सुझाव दिया.

शिवसेना की भावना गवली पाटील ने भी जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करते हुए कहा कि नोटबंदी की तरह ही सरकार को कोई कड़ा फैसला करना होगा. उन्होंने कहा कि ऐसा फैसला लेने में मंत्री भी सक्षम हैं और सरकार भी सक्षम है.

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