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दिल्ली में 'कूड़े का पहाड़': DDA के खिलाफ NGT पहुंचे कपिल मिश्रा और AAP

लैंडफिल के लिए डीडीए के जमीन आवंटन के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने एक सिग्नेचर कैंपने शुरू किया है, जिसका नाम 'कूड़े का पहाड़ हटाओ' है

Updated On: May 02, 2018 10:45 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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दिल्ली में 'कूड़े का पहाड़': DDA के खिलाफ NGT पहुंचे कपिल मिश्रा और AAP
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दिल्ली में लैंडफिल साइट के लिए सोनिया विहार और घोंडा गुजरान में जमीन आवंटन का मामला तूल पकड़ने लगा है. डीडीए के प्रस्तावित लैंडफिल साइट विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने डीडीए के प्रस्तावित दो नए लैंडफिल साइट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चुनौती दी है. आम आदमी पार्टी ने भी इस फैसले के विरोध में एनजीटी में एक याचिका दाखिल की है.

आम आदमी पार्टी ने डीडीए के जमीन आवंटन को रद्द करने की मांग की है. दूसरी तरफ कपिल मिश्रा ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल को खून से खत लिख कर इस फैसले का विरोध किया है. डीडीए की तरफ से प्रस्तावित लैंडफिल साइट उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर और घोंडा में है. कपिल मिश्रा करावल नगर से ही विधायक हैं.

क्या लिखा है खत में?

कपिल मिश्रा ने खत में लिखा है कि किसी भी कीमत पर यमुना की ग्रीन बेल्ट पर लैंडफिल साइट नहीं बनने दिया जाएगा. चाहे इसके लिए खून की एक-एक बूंद की कुर्बानी क्यों न देनी पड़े. एनजीटी से राहत नहीं मिलने की स्थिति में कपिल मिश्रा ने आमरण अनशन करने की बात कही है. कपिल मिश्रा की याचिका पर एनजीटी 3 मई को सुनवाई करेगी.

कपिल मिश्रा का खून से लिखा गया लेटर

कपिल मिश्रा का खून से लिखा गया लेटर

कपिल मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा है, 'डीडीए, पूर्वी दिल्ली नगर निगम और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लैंडफिल साइट को लेकर एनजीटी को गुमराह किया है. सभी ने यमुना फ्लड प्लान से जुड़े तथ्य छिपाए हैं. कानूनी तौर पर देखा जाए तो डीडीए की तरफ से आवंटित जमीन पर लैंडफिल साइट बनाया नहीं जा सकता.’

आम आदमी पार्टी ने भी दाखिल की याचिका

दिल्ली में दो नए लैंडफिल साइट की सियासत में आम आदमी पार्टी भी कूद पड़ी है. पार्टी ने एनजीटी में एक याचिका दाखिल की है. आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद मनोज त्यागी, कुलदीप कुमार के साथ घोंडा से विधायक श्रीदत्त शर्मा ने एनजीटी में एक संयुक्त याचिका दायर किया है.

आम आदमी पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि प्रदूषण को लेकर जिम्मेदार संस्थाएं CPCB और पूर्वी नगर निगम भविष्य में इस इलाके में पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचाए. अभी सभी जिम्मेदार संस्थाओं पर इस समय बीजेपी का कब्जा है. साथ ही डीडीए को आदेश दिया जाए कि सोनिया विहार और घोंडा में जो प्रस्तावित जमीन आवंटित किया गया है, उसे रद्द कर एनजीटी को सूचित करे. एनजीटी ऐसे आदेश पारित करे जो इन इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यावरण के लिए हित में हो.

क्या है जानकारों का कहना

पर्यावरण के जानकारों का मानना है कि डीडीए द्वारा प्रस्तावित लैंडफिल साइट की जमीन के आसपास रिहायशी इलाके हैं. लिहाजा ऐसे आवंटन वहां की आबादी और पर्यावरण दोनों के खिलाफ है. अगर भविष्य में दोनों जगहों पर लैंडफिल साइट बनाई जाती है तो वहां रहने वाले लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता दिलीप पांडेय ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा है, ‘गाजीपुर लैंडफिल साइट के आस-पास रहने वाले लोग त्वचा और लंग कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं. ऐसे लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है. कूड़े से निकलने वाली जहरीली चीजों को जमीन सोख लेती है. यह जहरीला पदार्थ पानी में मिलकर उसे दूषित कर देता है. इस वजह से इलाके के कई लोग लकवा से ग्रसित हैं. अगर जल्द ही इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो आम आदमी पार्टी सोमवार से सड़कों पर उतरेगी.’

Gazipur Garbage Landfill

पर्यावरण और जल संरक्षण पर काम करने वाले पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी डीडीए के यमुना खादर में लैंडफिल साइट के प्रस्ताव पर आश्चर्य व्यक्त किया है. इनका मानना है कि अगर यमुना के किनारे लैंडफिल साइट बन जाती है और वहां कचरा डंप किया जाता है तो यह प्रकृति के साथ खिलवाड़ होगा.

हल निकालना जरूरी

देश के जाने माने पर्यावरण विशेषज्ञ गोपाल कृष्ण फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए यमुना नदी पहले से ही प्रदूषित है. हमलोगों ने लगभग इसे खत्म कर दिया है. रही-सही कसर इन फैसलों ने पूरी कर दी है. आम आदमी पार्टी या कपिल मिश्रा की चिंता जायज है. आप कचरे को एक एरिया से दूसरे एरिया डंप करने को किसी समस्या का हल नहीं बना सकते हैं. इसके लिए ठोस पहल की जरूरत है. दिल्ली की जमीन में जो जल है वह इंटरकनेक्टेड है. नदी के किनारे अगर लैंडफिल साइट बनती है तो वहां बदबू और प्रदूषित पानी के सिवाए कुछ नहीं मिलेगा.’

गोपाल कृष्ण आगे कहते हैं, ‘मेरे विचार से यमुना के किनारे लैंडफिल साइट की इजाजत एनजीटी को नहीं देनी चाहिए. यमुना अभी भी दिल्ली का बेहतरीन जल स्रोत है. अगर यमूना की पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है तो दिल्लीवालों को और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. लैंडफिल साइट का कचरा यमुना की पानी को प्रदूषित कर देगा. वैज्ञानिक और भौगोलिक नजरिए से भी एनजीटी को यमुना के किनारे लैंडफिल साइट की इजाजत नहीं देनी चाहिए.’

डीडीए के इस फैसले का अब चारों तरफ विरोध शुरू हो गया है. ऐसे में दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे को उछाल कर राजनीतिक रोटियां सेंकने में पीछे नहीं रहना चाहती. पार्टी डीडीए द्वारा लैंडफिल साइट बनाने के लिए जमीन आवंटन का विरोध तेज करते हुए एक सिग्नेचर कैंपेन की शुरुआत करने जा रही है. इस कैंपेन को ‘कूड़े का पहाड़ हटाओ’ अभियान नाम दिया गया है.

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