S M L

वीएचपी की धर्मसभा: राम मंदिर पर कानून बनेगा या सिर्फ माहौल गरमाने की एक कोशिश?

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 25 नवंबर की धर्मसभा के दौरान जनजागरण करने की बात कही थी. उन्होंने मंदिर मसले पर लड़ने के बजाए अड़ने की अपील की

Updated On: Dec 09, 2018 07:12 PM IST

Amitesh Amitesh

0
वीएचपी की धर्मसभा: राम मंदिर पर कानून बनेगा या सिर्फ माहौल गरमाने की एक कोशिश?

विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी की तरफ से दिल्ली के रामलीला मैदान में बुलाई गई धर्मसभा को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखा. सुबह से ही रामलीला मैदान में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. दिल्ली और आस-पास के इलाकों के अलावा देश के अलग-अलग कोनों से भी राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर ‘राम भक्त’ दिल्ली पहुंचे थे. रामलीला मैदान के अंदर और बाहर का नजारा एक तरह का दिख रहा था.

‘जय श्री राम’ के नारे से गूंज रहे रामलीला मैदान के भीतर और बाहर की तस्वीर दिल्ली पहुंचे ‘रामभक्तों’ के भीतर उत्साह की झलक पेश कर रही थी. किसी के हाथ में राम का कटआउट था तो किसी के हाथ में राम मंदिर का मॉडल था तो किसी के हाथों में रामभक्त हनुमान का गदा दिख रहा था. वीएचपी की इस धर्मसभा में भाग लेने के लिए आए लोगों के जय श्री राम के जयघोष से पूरा रामलीला मैदान राममय हो गया था.

दरअसल, वीएचपी ने इसके लिए काफी पहले से ही तैयारी शुरू कर रखी थी. 25 नवंबर को अयोध्या, बेंगलुरू और पुणे में हुए धर्मसभा के बाद सबकी नजरें दिल्ली पर टिकी थी. इसके लिए संघ की तरफ से देशभर में संकल्प रथ यात्रा 1 दिसंबर से शुरू की गई थी, जिसका समापन 9 दिसंबर को दिल्ली की धर्मसभा में हुआ.

राममंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए सरकार: भैय्याजी जोशी

वीएचपी की धर्मसभा को साधु-संतों के अलावा आरएसएस का भी पूरा समर्थन था. कार्यक्रम में पहुचे संघ के सरकार्यवाह और मोहन भागवत के बाद नंबर दो की हैसियत वाले भैय्याजी जोशी ने एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग कर दी. भैय्याजी जोशी ने कहा, ‘देश राम राज्य चाहता है. सत्ता जनभावनाओं का सम्मान करे और सरकार संकल्प पूरा करे.’

ये भी पढ़ें: राहुल से मुलाकात के बाद एनडीए छोड़ेंगे उपेंद्र कुशवाहा? आर-पार की लड़ाई का ऐलान!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने कहा कि 'हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे, ये हमारा अधिकार है और चाहत तो है ही संसद और सरकार का दायित्व भी है. न्याय व्यवस्था और न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए तथा न्याय व्यवस्था और राज सत्ता दोनों को अपने पूरे सामर्थ्य का उपयोग करते हुए जन भावना की उपेक्षा के स्थान पर उसका सम्मान करना चाहिए जिससे जन विश्वास भी बना रहे. मंदिर वहीं बनाएंगे ये सत्तारूढ़ दल का संकल्प भी है.'

भैय्याजी जोशी के बयान से साफ है कि अब संघ इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर है और यह मुद्दा और जोर-शोर से आने वाले दिनों में उठने वाला है. भैय्याजी जोशी के अलावा वीएचपी के अध्यक्ष सदाशिव कोकजे समेत कई नेताओं ने रैली को संबोधित किया. मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका में रह चुकी साध्वी ऋतंभरा से लेकर महंत ईश्वरानंद जी महाराज, अनुभूतानंद जी महाराज और अवधेशानंदगिरी ने भी राम मंदिर के लिए जल्द से जल्द पहल की करने की मांग की. सबकी बस ही एक ही मांग थी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार को कानून के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए.

'धर्मसभा' में भैय्याजी जोशी

'धर्मसभा' में भैय्याजी जोशी

साध्वी ऋतंभरा ने अपने चिर परिचित अंदाज में बोलते हुए कहा, ‘अब देश का हिंदू जाग गया है, अब ये नया इतिहास दोहराएगा.’ ऋतंभरा ने कहा कि ‘चाहे अयोध्या को दीयों से जगमगाओ या फिर, वहां राम की प्रतिमा बनवाओ, लेकिन, जबतक भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं होता, तबतक चैन नहीं हो सकता.’ वीएचपी के नेता चंपत राय ने भी कानून के जरिए राम मंदिर निर्माण की जोरदार मांग की.

प्रयागराज की धर्मसभा में अगले कदम का ऐलान!

कुछ इसी तरह की बातें साधु-संतों की तरफ से भी कही गईं. राम मंदिर निर्माण को लेकर धर्मसभा में पहुंचे अवधेशानंद गिरी ने कहा कि ‘अगर अध्यादेश नहीं आता है तो 31 जनवरी को प्रयागराज में अगले कदम का शंखनाद करेंगे.’ दरअसल, 31 जनवरी से 1 फरवरी तक दो दिनों की वीएचपी की धर्मसभा प्रयागराज में कुंभ के दौरान आयोजित की गई है. अब वीएचपी की धर्मसभा में पहुंचे साधु-संत सरकार को अल्टीमेटम दे रहे हैं, कि अगर अध्यादेश लाकर या कानून के जरिए राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ नहीं किया गया तो फिर पूरे देश में आंदोनल ही एक मात्र विकल्प होगा.

ये भी पढ़ें: राजस्थान विधानसभा चुनाव का प्रचार खत्म, कितने हावी रहे भावनात्मक मुद्दे?

अनुभूतानंद जी महाराज ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ‘जिस तरह राम मंदिर पर खड़ा बाबरी ढ़ांचा गिराया गया था उसी तरह से मंदिर भी बन सकता है.’

शीतकालीन सत्र से पहले मुद्दा गरमाने की कोशिश

संसद का शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से शुरू हो रहा है, इसके पहले वीएचपी और साधु-संतों की तरफ से कानून बनाने की मांग करना रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. वीएचपी के इस पूरे अभियान को संघ का भी समर्थन हासिल है. क्योंकि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहले ही कानून बनाने की मांग की थी, अब भैय्याजी जोशी की तरफ से उस बात को फिर से दोहराया जा रहा है.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने (वीएचपी) आज यानी रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्म सभा का आयोजन किया

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने (वीएचपी) आज यानी रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्म सभा का आयोजन किया

संघ नहीं करेगा सरकार को परेशान’ !

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 25 नवंबर की धर्मसभा के दौरान जनजागरण करने की बात कही थी. उन्होंने मंदिर मसले पर लड़ने के बजाए अड़ने की अपील की. इसके लिए संघ प्रमुख ने जनजागरण अभियान चलाने को कहा है. दरअसल, मोहन भागवत जनता के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाए जाने के लिए जनजागरण अभियान की वकालत कर रहे हैं. जिससे देशभर में मंदिर निर्माण के लिए माहौल तो बने लेकिन इससे मोदी सरकार को किसी तरह की परेशानी न हो.

फिलहाल सरकार को 31 जनवरी की धर्मसभा तक मोहलत मिल गई है, जिस दौरान शीतकालीन सत्र भी खत्म हो जाएगा और जनवरी में यह भी तय हो जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कब से सुनवाई की तारीख तय करता है.

फरवरी 2019 का वक्त ऐसा होगा जब पूरे देश में लोकसभा चुनाव को लेकर माहौल गरम होगा, उस वक्त राम मंदिर को लेकर जनजागरण के बहाने चलाया गया वीएचपी का आंदोलन (अगर प्रयागराज की धर्मसभा में तय होता है तो) सीधे-सीधे ध्रुवीकरण की नींव तैयार करेगा जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा. फिलहाल संघ परिवार की तरफ से राम मंदिर मुद्दे पर तैयारी इसी रणनीति के तहत हो रही है, जिसकी झलक दिल्ली के रामलीला मैदान में भी दिखी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi