S M L

दिल्ली पुलिस के इस अधिकारी और विवादों का इतना गहरा नाता क्यों?

मोरिस नगर थाने के एक सब इंस्पेक्टर ने दिल्ली पुलिस के ही एक संयुक्त आयुक्त एसएस यादव पर विभागीय डायरी में शिकायत दर्ज कराई है

Updated On: Jan 13, 2018 06:50 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

0
दिल्ली पुलिस के इस अधिकारी और विवादों का इतना गहरा नाता क्यों?

दिल्ली पुलिस के आर्म्ड पुलिस के संयुक्त आयुक्त एसएस यादव एक बार फिर से विवादों में हैं. एसएस यादव पर दिल्ली पुलिस के ही एक सब इंस्पेक्टर ने अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है. मोरिस नगर थाने के एक सब इंस्पेक्टर ने दिल्ली पुलिस के ही एक संयुक्त आयुक्त एसएस यादव पर विभागीय डायरी में शिकायत दर्ज कराई है. सब इंस्पेक्टर ने शिकायत में गालियां देने और बीच सड़क पर उठक-बैठक कराने की बात कही है. दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारी एसएस यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है.

दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त एसएस यादव बीते सोमवार दिल्ली के मोरिस नगर थाना के विश्वविद्यालय एरिया में राउंड पर थे. दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी जांचने के लिए यादव ने झपटमारी का एक टेस्ट कॉल किया. टेस्ट कॉल के बाद सब इंस्पेक्टर रामचंदर एक निजी गाड़ी से उस जगह पर पहुंचा जहां से टेस्ट कॉल किया गया था.

ऐसा कहा जा रहा है कि सब इंस्पेक्टर रामचंदर को एक निजी गाड़ी में पहुंचते देख एसएस यादव ने गाली देना शुरू कर दिया. बीच सड़क पर ही सरेआम कान पकड़ कर उठक-बैठक भी कराई. साथ ही नौकरी से निकलाने तक धमकी दे डाली.

एक सीनियर अधिकारी के द्वारा इस तरह के सुलूक अपने से साथ किए जाने को लेकर रामचंदर इतना आहत हो गया कि थाने पहुंचते ही सुसाइड की बात करने लगा.

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि एसएचओ के काफी मान-मनोव्वल के बाद सब इंस्पेक्टर शांत हुआ. घटना की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर ने मामले की सारी जानकारी दिल्ली पुलिस की रोजनमाचा में दर्ज करा दी.

Delhi-police

प्रतीकात्मक तस्वीर

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी नाइट जीओ के तौर पर किसी एक जिले में नियुक्त किए जाते हैं. इस तरह के अधिकारियों को रात (राजपत्रित अधिकारी) जीओ कहा जाता है. प्रत्येक जीओ के पास एक नंबर होता है, जो उस जिले के पुलिस मोबाइल नंबर भी होता है. दिल्ली के किसी भी जिले में अगर रात को कोई भी आदमी संकट में फंसता है तो वह आदमी सीधे उस नंबर के जरिए जीओ तक पहुंच जाता है. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में इस तरह का प्रयोग पिछले साल से ही करना शुरू किया है.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने जब इस घटना के बारे में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया तो वे सभी अधिकारी इस घटना पर बोलने से बच रहे थे. ऐसा कहा जा रहा है कि इस घटना की जानकारी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर और एलजी तक पहुंचा दी गई है.

हम आपको बता दें कि मोरिस नगर के एसएचओ ने रोजनामचा में लिखा है कि ज्वाइंट कमिश्नर एसएस यादव सोमवार की रात दिल्ली पुलिस के नाइट जीओ थे. आधी रात को वह निरिक्षण करने मोरिस नगर थाना क्षेत्र में पहुंचे थे. दिल्ली पुलिस की सक्रियता को जांचने के लिए संयुक्त आयुक्त ने 100 नंबर पर झपटमारी की कॉल की. वारदात की सूचना पाते ही एसआई ने मौके-ए-वारदात पर जाना चाहा, लेकिन थाने में खड़ी दो-दो सरकारी बाइक स्टार्ट नहीं हुई. जिसके बाद रामचंदर ने अपने एक दोस्त की गाड़ी से मौके-ए-वारदात पर पहुंच गया. वहां पहुंचने के बाद रामचंदर ने देखा कि संयुक्त आयुक्त अपनी गाड़ी के बाहर खड़े हैं और कार में एक युवक बैठा है.

एसएस यादव ने बिना कुछ पूछे आपत्तिजनक टिप्पणी की और नौकरी से निकालने की भी धमकी दी. इस पर रामचंदर ने दो-दो बाइक स्टार्ट नहीं होने की  बात कही. इसके बावजूद संयुक्त आयुक्त एसएस यादव गाली देते रहे. सोमवार को एक बार फिर एसएस यादव मोरिस नगर थाना पहुंच कर एसएचओ को समझाने की बात कह कर थाना से चले गए.

विवादों से रहा है पुराना नाता

दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर एसएस यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यादव को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) का प्रमुख बनाया था.

ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एसएस यादव के जरिए दिल्ली जिला क्रिकेट संघ में तथाकथित घोटाले का मामला दर्ज कराना चाहा था. बीजेपी से निकाले जा चुके सांसद कीर्ति झा आजाद ने डीडीसीए में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था. इसी मुद्दे को लेकर देश के वित्त मंत्री पर निशाना साधने के कारण आजाद की पार्टी से रवानगी हो गई थी.

फिलहाल डीडीसीए मुद्दे को लेकर ही कीर्ति झा आजाद और अरविंद केजरीवाल वित्त मंत्री अरुण जेटली के द्वारा मानहानि का केस में फंसे हुए हैं. दिल्ली की एक अदालत में इस मामले की अभी भी सुनवाई चल रही है.

ऐसा कहा जाता है कि एसएस यादव डीडीसीए मामले में मुकदमा दर्ज करने को तैयार हो गए थे. इसकी भनक दिल्ली के तत्कालीन एलजी नजीब जंग को लग गई. एलजी ने तुरंत ही एसीबी का प्रमुख नई दिल्ली जिले के विशेष आयुक्त मुकेश कुमार मीणा को बना दिया और एसएस यादव को एसीबी से हटा कर दूसरे विभाग में भेज दिया.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi