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मनोज तिवारी और आप के तकरार के बाद दिल्ली पुलिस धर्मसंकट में?

दिल्ली पुलिस अगर एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करती है तो दूसरा पक्ष मामले को अदालत में ले जा कर दिल्ली पुलिस की काफी फजीहत करा सकता है

Updated On: Nov 06, 2018 04:25 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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मनोज तिवारी और आप के तकरार के बाद दिल्ली पुलिस धर्मसंकट में?
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सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन समारोह के दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और आप समर्थकों के बीच हुई झड़प ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है. सोमवार को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और उनके कुछ समर्थकों ने आप नेताओं और समर्थकों के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक शिकायत पत्र सौंपा है. दोनों पक्षों के द्वारा सोशल मीडिया पर एक के बाद एक वीडियो जारी किए जा रहे हैं, जो काफी वायरल हो रहे हैं. दोनों पक्ष वीडियो जारी कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

इस घटना के बाद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, ‘सालों से रुके हुए निर्माण कार्य को उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में शुरू करवाया था, लेकिन अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी अब इसका उद्घाटन कर सारा क्रेडिट लेने का ढोंग कर रहे हैं. मैं उद्घाटन समारोह में आमंत्रित था. मैं यहां से सांसद हूं. इसमें आम आदमी पार्टी को क्या परेशानी है? क्या मैं क्रिमिनल हूं? पुलिस मुझे घेर क्यों रही थी? मैं यहां अरविंद केजरीवाल का स्वागत करने के लिए आया था और आप समर्थकों और पुलिस ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया. अब उल्टे आप के कुछ नेता कह रहे हैं कि मैं अपने समर्थकों के साथ हंगामा कर रहा था और अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ बदसुलूकी करने आया था.'

अमानतुल्ला खान ने दी गोली मारने की धमकी: मनोज तिवारी

मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें आप विधायक अमानतुल्ला खान ने गोली मारने की धमकी दी है. कुछ पुलिसकर्मियों ने भी उनके साथ गलत व्यवहार किया. तिवारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो डाला है, जिसमें साफ दिख रहा है कि आप विधायक उन्हें स्टेज से धक्का दे रहे हैं.

ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि जब मनोज तिवारी स्टेज पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे तब मैंने उन्हें रोका, धक्का नहीं दिया. उनके कार्यों से स्पष्ट था, अगर वह स्टेज पर आ जाते तो सीएम या डिप्टी सीएम से दुर्व्यवहार कर सकते थे.

वहीं दूसरी तरफ इस घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार आ रही हैं. दिल्ली के पूर्व सीएम और कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने भी इस घटना की निंदा की. शीला दीक्षित के मुताबिक, बीते रविवार को जो कुछ भी हुआ वह बेहद ही शर्मनाक है. सालों से बन रहे सिग्नेचर ब्रीज का उदघाटन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अगर किया तो इलाके के लोकल सांसद मनोज तिवारी की भी बुलाना चाहिए था. आप नेताओं और उनके समर्थकों को मनोज तिवारी के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए था.

कार्यक्रम को खराब करने के इरादे से आए थे तिवारी: आप नेता

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडे और पूर्वी दिल्ली से पार्टी की लोकसभा प्रभारी आतिशी ने सोमवार को मीडिया के सामने आकर बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए. आप नेताओं का कहना था कि दिल्ली में बीजेपी हार के डर से पूरी तरह बौखला गई है. मनोज तिवारी एक सोची समझी साजिश के तहत दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित उद्घाटन के कार्यक्रम को खराब करने के इरादे से ही वहां पर आए थे. हजारों लोग बिना किसी आमंत्रण के उदघाटन देखने आए थे, लेकिन मनोज तिवारी खुद को वीआईपी समझते हैं. वह यहां गुंडागर्दी कर रहे थे. बीजेपी के लोग आप के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को धमका रहे थे. कई आप के समर्थकों और स्थानीय लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.'

पत्रकारों से बातचीत करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तरी पूर्वी दिल्ली के लोकसभा प्रभारी दिलीप पांडे ने कहा कि बीजेपी दिल्ली में बुरी तरह से हार रही है और उसी हार की बौखलाहट के कारण दिल्ली में उल्टी सीधी हरकतें कर रही है. इस बात का प्रमाण यह है कि बीते दिनों बीजेपी ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलकर दिल्ली में दस लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवा दिए. जबकि जांच करने पर पता चला कि उनमें से बहुत सारे लोग उसी पते पर रहते हैं, जहां से उन्हें शिफ्टिड दिखाया गया है.

कई कार्यक्रमों में बीजेपी ने भी नहीं बुलाया था मुख्यमंत्री केजरीवाल को 

आप नेताओं का कहना था कि मनोज तिवारी जी नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले खुद नैतिकता सीखनी चाहिए. संघीय ढांचे को ताक पर रखकर आप ही की बीजेपी ने दिल्ली में कई उद्घाटन के बड़े कार्यक्रमों में दिल्ली के मुख्यमंत्री तक को न्योता नहीं दिया. दिल्ली की मेट्रो लाइन का उद्घाटन हुआ और दिल्ली के मुख्यमंत्री को ही नहीं बुलाया गया. मुख्यमंत्री कार्यालय से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर स्काई वॉक का उद्घाटन किया गया जिसको बनाने में दिल्ली सरकार का पूरा पूरा योगदान था, उस प्रोग्राम में भी बीजेपी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को बुलाना उचित नहीं समझा.

कुल मिलाकर कर आपसी खटास के कारण बीते कुछ वर्षों से दोनों पार्टियों के बीच काफी खटास आई है. आम आदमी पार्टी का कहना है कि हमने तो मोदी जी द्वारा शुरु की गई इस परंपरा को आगे ले जाने का काम किया है. इससे साफ होता है कि आम आदमी पार्टी भी अब बीजेपी को उसी के अंदाज में जवाब दे रही है.

बता दें कि इस मामले को घटित हुए अभी दो दिन ही हुए हैं लेकिन, दोनों पक्ष एक के बाद एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष मजबूत करना चाहते हैं. इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की साख अब दाव पर लग गई है. दिल्ली पुलिस के लिए धर्मसंकट यह है कि वह इतनी बड़ी घटना के बाद भी कुछ बोलने से बचना चाह रही है. सोमवार को मनोज तिवारी और उनके समर्थकों के द्वारा शिकायत करने के बाद भी दिल्ली पुलिस इस मामले पर कुछ नहीं बोल रही है.

आप नेता अमानतुल्लाह फिर आए विवादों में

इस पूरे मामले में एक बार फिर से आम आदमी पार्टी के ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान चर्चा में हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि वह अपने आपको अरविंद केजरीवाल का सबसे बड़ा सिपाही लगातार साबित कर रहे हैं. पिछले कई मौकों पर अमानतुल्लाह खान ने फ्रंट पर पार्टी को डिफेंड किया है. दिल्ली के प्रमुख सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित मारपीट मामला हो या फिर आप से नाराज चल रहे कुमार विश्वास की नाराजगी का कारण भी कहीं न कहीं अमानतुल्लाह खान हीं है.

दिल्ली के प्रमुख सचिव के साथ कथित मारपीट के आरोप में अमानतुल्लाह खान जेल भी जा चुके हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि दिल्ली पुलिस इस मर्तबा अमानतुल्लाह खान के साथ किस तरह से पेश आने वाली है. क्योंकि इस बार कहीं न कहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी सवालों के घेरे में हैं. ऐसे में दिल्ली पुलिस इस मामले पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. दिल्ली पुलिस अगर अमानतुल्लाह खान पर एक्शन लेती है तो दिल्ली पुलिस को मनोज तिवारी पर भी एक्शन लेना पड़ेगा. क्योंकि अगर अमानतुल्लाह खान ने मनोज तिवारी को धक्का दिया है या बदसुलूकी की है, तो मनोज तिवारी भी दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की कमीज पकड़ते वीडियो में दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में दिल्ली पुलिस के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया है.

क्या तिवारी के मंच पर आने से बंट जाता सिग्नेचर ब्रिज का क्रेडिट?

सिग्नेचर ब्रिज का प्रस्ताव 2004 में पेश किया गया था जिसे 2007 में दिल्ली मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी. शुरुआत में अक्टूबर 2010 में दिल्ली में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम के पहले 1131 करोड़ रुपए की संशोधित लागत में पूर्ण होना था. लेकिन इस परियोजना की लागत 2015 में बढ़कर 1 हजार 594 करोड़ रुपए हो गई. खबरों के मुताबिक जब पहली बार इस ब्रिज को 1997 में प्रस्तावित किया गया था तब इसकी लागत 464 करोड़ रुपए आंकी गई थी. अभी यह ब्रिज वजीराबाद पुल के ट्रैफिक के बोझ को साझा करेगा. दिल्लीवासी को इस ब्रिज के ऊपर से पूरे शहर का एक शानदार नजारा दिखेगा. इसके लिए चार लिफ्ट लगाई गई हैं, जिनकी कुल क्षमता 50 लोगों को ले जाने की है.

सवाल उठता है कि क्या स्टेज पर मनोज तिवारी के पहुंच जाने से सिग्नेचर ब्रिज को लेकर बीजेपी को भी क्रेडिट मिल जाता? उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली को जोड़ने के लिए सिग्नेचर ब्रिज बनकर तैयार हो गया. लेकिन यही पुल अब टकराव के चलते आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच अखाड़ा भी बन गया है. दोनों के बीच क्रेडिट की होड़ से शुरू हुई जंग अब पुलिस थाने तक पहुंच चुकी है. ऐसे में दिल्ली पुलिस के लिए मुश्किल ये हो रही है कि एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने पर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है. वहीं दिल्ली पुलिस अगर एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करती है तो दूसरा पक्ष मामले को अदालत में ले जा कर दिल्ली पुलिस की काफी फजीहत करा सकता है.

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