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केजरीवालजी, लंदन का लॉलीपॉप छोड़ो, ये बताओ कितने वादे पूरे किए?

केजरीवाल से पहले शीला दीक्षित ने भी दिल्ली को पेरिस जैसा बनाने का वादा किया था.

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Mar 07, 2017 02:32 PM IST

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केजरीवालजी, लंदन का लॉलीपॉप छोड़ो, ये बताओ कितने वादे पूरे किए?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को सत्ता में आए दो साल हो गए हैं. और अब वह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आने वाले चुनावों की तैयारी में जुटी है.

मतदाता सोच रहे हैं कि एक बार फिर से आम आदमी पार्टी के वादों पर कैसे भरोसा करें क्योंकि 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले जो वादे किए गए थे, उनमें से ज्यादातर तो अब तक पूरे हुए नहीं हैं.

नई दिल्ली के उत्तम नगर में दिए गए केजरीवाल के एक बयान की हर तरफ चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा है कि अगर एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो वह राजधानी दिल्ली को लंदन बना देंगे.

केजरीवाल के दूसरे बयानों की तरह उनके इस वादे में भी सुर्खियां बटोरने का पूरा दम है. अब कितने वादे पूरे होते हैं, यह बात अलग है.

एक सार्वजनिक सभा में दिए गए केजरीवाल के इस बयान पर बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नरसीन ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ट्वीट किया, 'ममता कोलकाता को लंदन में बदलना चाहती है. अब केजरीवाल दिल्ली को लंदन बनाना चाहते हैं. असंभव काम! शहरों को बस रहने लायक क्यों नहीं बनाते?'

वादे तेरे वादे

दिल्ली के मुख्यमंत्री आम लोगों के बीच गजब आत्मविश्वास के साथ इस तरह के हवा हवाई वादे करते हैं. आत्मविश्वास हो भी क्यों ना, आखिर उन्होंने दो-दो बार दिल्ली के मतदाताओं का भरोसा जीता है और मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की है.

लेकिन क्या उन्होंने और उनकी आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2013 और 2015 में दिल्ली की जनता से किए गए वादों को पूरा किया है? दूसरी बार में तो आम आदमी पार्टी ने 70 में 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था.

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम कहते हैं, 'अपने चुनावी घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि वह दिल्ली में अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करेगी और वहां रहने वालों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. लेकिन सरकार को बने दो साल हो गए हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ.

अनुपम आगे कहते हैं, 'इन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की हालत बदतरीन है और उन्हें देखकर भरोसा नहीं होता कि यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा हैं. अगर मुख्यमंत्री ने अपना वादा निभाया होता तो यह एक काबिले तारीफ बात होती.'

टक्कर देंगे योगेंद्र यादव

योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाला स्वराज इंडिया एक नया राजनीतिक दल है जो एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन स्वराज अभियान से निकला है. स्वराज अभियान आम आदमी पार्टी से ही टूटा एक गुट है.

YOGENDRA yadav

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव

अब स्वराज इंडिया भी एमसीडी चुनाव के लिए मैदान में है. पार्टी ने 5 मार्च को दिल्ली के लिए अपना विजन डॉक्युमेंट पेश किया, जिसमें दिल्ली को कूड़ा मुक्त, महामारी मुक्त, भीड़-भाड़ मुक्त बनाने की व्यापक योजना पेश की गई है. इस दस्तावेज में अनाधिकृत और जेजे (झुग्गी झोपड़ी) कालोनियों और झुग्गियों को ध्यान में रखते हुए कूड़े के निपटारे की एक ठोस और टिकाऊ रूपरेखा दी गई है.

अनुपम कहते हैं, 'आम आदमी पार्टी ने जो फ्री वाई-फाई देने, सब तक कनेक्टिविटी पहुंचाने, बसों में मार्शल तैनात कर महिलाओं को सुरक्षा देने, स्कूल खोलने वगैरह के वादे किए थे, उनका क्या हुआ? कुछ भी तो नहीं हुआ, बल्कि मतदाताओं को मूर्ख बनाया गया है.

अनुपम केजरीवाल की जुमलेबाजी को निशाना बनाते हुए कहते हैं, 'केजरीवाल अपनी ड्रामेबाजी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अब तो वह जुमलेबाजी में बीजेपी को भी पीछे छोड़ना चाहते हैं. आम आदमी पार्टी सिर्फ बातें बनाना जानती है. सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे क्षेत्रों में काम करने की बजाय दिल्ली सरकार ने अपने 371 दिनों में शराब बेचने की 399 दुकानों के लाइसेंस दिए. अब केजरीवाल दिल्ली को लंदन जैसा बनाना चाहते हैं. दिल्ली के लोग आम आदमी पार्टी की चाल को समझ गए हैं और अब वे मूर्ख नहीं बनेंगे.”

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बीजेपी के तेवर

पिछले दो साल में, दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल और तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच सिर्फ जुबानी जंग देखी है और इस चक्कर में विकास की बातें कहीं पीछे छूट गईं. मुख्यमंत्री का हमेशा यही आरोप रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार उनके काम में रोड़े अटका रही है.

कौन कह सकता है कि अगर एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी बहुमत के साथ जीत जाती है, तो फिर से वही हालात पैदा नहीं होंगे. केंद्र में तो अभी दो साल से भी ज्यादा समय तक मोदी सरकार ही रहने वाली है और केजरीवाल के रास्ते वह रुकावटें डालती ही रहेगी!

KEJRIWAL

दिल्ली बीजेपी के नेता हरीश खुराना कहते हैं, 'दिल्ली के वोटर आम आदमी पार्टी के इरादों को समझ गए हैं और उसके झूठे वादों के जाल में नहीं फंसेंगे. आम आदमी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर मामले हैं. पिछले दो साल में ही एमसीडी का दिल्ली सरकार से झगड़ा हुआ है और इतनी सारी हड़तालें हुई हैं. केजरीवाल ने एमसीडी सफाई कर्मचारियों के वेतन वाले पैसे को दूसरे खातों में डाल दिया.

हरीश केजरीवाल के वादों की याद दिलाते हैं.

ऐतिहासिक जनादेश मिलने के बावजूद उनकी सरकार चुनाव से पहले किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं कर पाई है. फ्री वाई-फाई, सेफ्टी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने, सार्वजनिक परिवहन के बेहतर बनाने, 500 बिस्तरों वाला अस्पताल खोलने जैसे बहुत सारे वादों का क्या हुआ?

ऑटोवाले भी खफा

यहां तक कि आम आदमी पार्टी के सबसे वफादार वोटर यानी ऑटो रिक्शवालों को भी पार्टी से कई शिकायतें हैं. लगभग उन्हीं की बदौलत पार्टी ने दिल्ली में चुनाव जीता था. ये लोग भी महसूस करते हैं कि आम आदमी पार्टी के अच्छे इरादे सत्ता के फेर में कहीं खो गए हैं.

पार्टी को प्रेरणा और नाम आम लोगों से ही मिला है. लगता है कि वह अपने बुनियादी वोटरों को भूल गई है जिनमें बहुत से आम लोग शामिल हैं.

दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार इलाके में रहने वाले ऑटो रिक्शा ड्राइवर अवधेश का परिवार बाहर से आकर दिल्ली में बसा है. वह कहते हैं, 'हमने ही यानी ऑटो रिक्शा वालों ने 2013 और 2014 में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का फ्री में प्रचार किया था. हमारे मजबूत समर्थन के कारण ही पार्टी को इतना जबरदस्त जनादेश मिला था. दो साल गुजर गए, लेकिन आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले हम से जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए.

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अवधेश बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दर्द सुनाते हैं, 'दिल्ली की अनाधिकृत कालोनियों और जेजे बस्तियों की हालत लगातार बदतर बनी हुई है. अकसर हमें टैंकर से पानी खरीदना पड़ता है, जबकि दिल्ली सरकार ने हमें मुफ्त पानी देने का वादा किया था. कोई ऑटो स्टैंड भी नहीं बना, जबकि हम से वादा किया गया था.'

ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का केजरीवाल से मोहभंग हो गया है और अब एमसीडी चुनावों में वोट डालने से पहले वे दो बार सोचेंगे.

दिल्ली को दिल्ली रहने दो

एक साल के भीतर दिल्ली को लंदन जैसा बनाने के केजरीवाल के वादे को देखते हुए बहुत से लोग सवाल पूछ रहे हैं कि ये मुख्यमंत्री विदेशी शहरों से प्रभावित क्यों होते हैं, दिल्ली जैसी है, उसे वैसी ही बनाए रखने पर क्यों ध्यान नहीं देते हैं? इस शहर का अतीत बेहद समृद्ध रहा है. फिर इसे लंदन और पेरिस बनाने की बात क्यों होती है?

कांग्रेस के राज में, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि वह दिल्ली को पेरिस जैसा बना देंगी.

अनुपम कहते हैं, 'जिन नेताओं के पास विकास की कोई योजना, कार्यक्रम, विजन या निर्धारित समयसीमा नहीं होती, वही ऐसे बेतुके और फाल्तू के बयान देते हैं. केजरीवाल भी अब इसी जुमलेबाजी में लगे हैं.'

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केजरीवाल लंदन को शहरी जनजीवन के लिहाज से एक आदर्श समझते होंगे, लेकिन क्या उन्हें इस बात का अहसास है कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन किन समस्याओं से जूझ रही है. वायु प्रदूषण से लेकर ट्रैफिक जाम और रहन-सहन पर आने वाली ऊंची लागत जैसी कई समस्याओं ने इस शहर के लोगों को परेशान कर रखा है.

खुराना कहते हैं, 'इसका उल्टा क्यों नहीं हो सकता कि लंदन को दिल्ली जैसा बनाया जाए. क्या केजरीवाल को पता है कि लंदन में रहना कितना महंगा है? लगता है कि वह शीला दीक्षित के नक्शे कदम पर चल रहे हैं जो दिल्ली को पेरिस जैसा बनाना चाहती थीं. लेकिन कुछ नहीं कर पाईं और तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद हार गईं. बीजेपी के पास दिल्ली के लिए एक बेहतर योजना है. अगर वह सत्ता में आई तो बेहतर शिक्षा सुविधाएं, सार्वजनिक परिवहन और नागरिक सुविधाएं लोगों को मुहैया कराई जाएंगी.'

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