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एमसीडी चुनाव: टिकट बंटवारे का साइड इफेक्ट, बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस में बवाल

एमसीडी का चुनाव इस बार सियासी दलों की परेशानी का सबब बन गया है

Updated On: Apr 03, 2017 08:37 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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एमसीडी चुनाव: टिकट बंटवारे का साइड इफेक्ट, बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस में बवाल

दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी का चुनाव इस बार सियासी दलों की परेशानी का सबब बन गया है.

सिरदर्द इतना बड़ा है कि नगर निगम के स्थानीय चुनाव में इस बार बड़े बड़े योद्धा भी कूद गए हैं, ताकि हालात को काबू में किया जा सके.

हर पार्टी में असंतोष है, नाराजगी है, बगावत है. लेकिन, बगावत को थामने की कोशिश में लगे सभी सियासी दल मजबूर दिख रहे हैं.

नामांकन के आखिरी दिन क्यों जारी होती है लिस्ट?

बगावत के डर से नामांकन भरने की आखिरी तारीख तक लिस्ट जारी होती रही. लेकिन, जिसने चुनाव लड़ने का मन बना लिया है, उनका क्या. वो तो टिकट मिले या न मिले, मैदान में कूद ही गए हैं.

ऐसे बागियों की तादाद कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक और आप में भी काफी ज्यादा है.

धड़ाधड़ इस्तीफों का दौर चल रहा है. कहीं गाजे बाजे के साथ नामांकन हो रहा है तो कहीं हो हल्ला और हंगामा तो कहीं इस चुनावी शोरगुल के बीच दल और दिल की अदला-बदली.

नाराजगी की क्या है वजह?

पुराने दिग्गज नाराज हैं , लेकिन, जिनका गुस्सा नहीं शांत हुआ वो पार्टी को भी छोड़ने को तैयार दिख रहे हैं.

हालाकि, इस कड़ी में बीजेपी की तरफ से पहले से ही अपने पार्षदों को साफ कर दिया गया था कि टिकट का मोह त्याग दें तो दिल को दिलासा देने के लिए पहले से वो तैयार रहे होंगे. इसके बावजूद पार्टी दफ्तर में टिकट बंटवारे के बाद हंगामा भी हुआ.

लेकिन, उन लोगों के उपर ज्यादा गुजरी जिन्होंने अबतक पार्षद बनने का सपना संजोए रखा था और पार्टी ने दगा दे दिया.

कांग्रेस में बगावत ज्यादा क्यों?

ये हाल कांग्रेस के भीतर ज्यादा रहा. जहां इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया. शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे कांग्रेस के कद्दावर नेता ए के वालिया ने टिकट बंटवारे से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी.

जबकि कांग्रेस के ही एक पूर्व एमएलए अमरीश गौतम ने इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया.

नाराजगी आप के भीतर भी है. यूं कहें कि सभी पार्टियां इस वक्त टिकट बंटवारे बाद भीतरघात से जूझ रही हैं.

कई बागी मैदान में हैं जो सबका खेल बिगाड़ने की तैयारी में हैं. ऐसे में सियासी दलों के लिए इस भीतरघात से जूझना काफी मुश्किल होगा.

एमसीडी की सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए पुराने पार्षदों की दावेदारी को खारिज करने का फैसला कितना कारगर साबित होगा, इस पर भी सबकी नजरें होंगी, फिलहाल भीतरघात की आशंका सभी पार्टियों को परेशान करती दिख रही है.

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