live
S M L

प्राइवेट स्कूलों में फीस वृद्धि: दिल्ली सरकार के निर्णय पर हाईकोर्ट की रोक के मायने

दिल्ली हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग के एक आदेश पर अपने अगले फैसले तक रोक (स्टे) लगा दिया है

Updated On: Dec 22, 2017 08:17 AM IST

Kangkan Acharyya

0
प्राइवेट स्कूलों में फीस वृद्धि: दिल्ली सरकार के निर्णय पर हाईकोर्ट की रोक के मायने

दिल्ली हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग के एक आदेश पर अपने अगले फैसले तक रोक (स्टे) लगा दिया है. शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया था कि प्राइवेट स्कूल सांतवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक शिक्षकों को वेतन देने के लिए फीस में 15 फीसद तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं.

कोर्ट का आदेश मयूर विहार के एएसएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 100 छात्रों की एक अर्जी पर आया है. फिलहाल प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता फीस बढ़ाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं.

अदालत में अर्जी दायर करने वालों की तरफ से बहस कर रहे वकील खगेश झा ने फर्स्टपोस्ट से कहा, 'हमने कोर्ट से निवेदन किया कि दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मिली-भगत से फीस बढ़ाने का आदेश जारी किया है. स्कूलों के पास शिक्षकों को सांतवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वेतन देने के लिए पर्याप्त फंड है और इसके लिए उन्हें फीस बढ़ाने की जरूरत नहीं है.'

ये भी पढ़ें: टू जी मामले में सीबीआई अदालत का फैसला : क्या होगी बीजेपी की आगे की रणनीति ?

अर्जी डालने वालों के वकील खगेश झा ने जस्टिस अनिल देव सिंह रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें जिक्र आया है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल के दौरान दिल्ली के कई स्कूलों ने फीस में मनमानी बढ़ोतरी की थी, हालांकि स्कूलों के पास बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त फंड था.

atishi merlena

जस्टिस अनिल दवे सिंह रिपोर्ट की व्याख्या करते हुए दिल्ली सरकार की सलाहकार अतिशी मारलेना ने फर्स्टपोस्ट में प्रकाशित लेख में कहा, 'साल 2008 में जब छठा वेतन आयोग लागू हुआ, निजी स्कूलों को अपने शिक्षकों की फीस बढ़ानी पड़ी थी. तब कई स्कूलों ने कहा था कि उनके पास कोई रिजर्व फंड नहीं है और वेतन बढ़ाने के लिए उन्हें फीस में इजाफा करना होगा.'

फीस वृद्धि की जांच को बनी जस्टिस अनिल सिंह दवे समिति 

उन्होंने अपने लेख में यह भी कहा है कि दिल्ली अभिभावक संघ बनाम दिल्ली सूबे की सरकार वाले मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने 2011 में ऐतिहासिक फैसला देते हुए जस्टिस अनिल देव सिंह समिति बनाई. समिति को यह देखना था कि स्कूलों ने जो फीस बढ़ाई है वह जायज है या नहीं.

जस्टिस अनिलदेव सिंह समिति ने पाया कि 1000 से ज्यादा स्कूलों में 544 ने अपनी फीस नाजायज तरीके से बढ़ाई, इन स्कूलों के पास शिक्षकों को बढ़े हुए वेतन के हिसाब से राशि देने के लिए रिजर्व फंड था लेकिन इन स्कूलों ने फीस बढ़ाने का तरीका अख्तियार किया.

अदालत में अभी जो अर्जी डाली गई है उसमें अनिलदेव सिंह समिति के निष्कर्षों के आधार पर तर्क दिए गए हैं.

मामले में पैरवी कर रहे वकील खगेश झा का तर्क है कि सरकार को फीस बढ़ाने का आदेश जारी करने से पहले स्कूलों के खाते का ऑडिट(अंकेक्षण) करना चाहिए था. उन्होंने फर्स्टपोस्ट से कहा कि सरकार स्कूलों के खातों की जांच किए बगैर सीधे-सीधे फीस बढ़ा देने का आदेश जारी नहीं कर सकती.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने बीते 17 अक्तूबर को एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि जिन स्कूलों को सरकारी सहायता नहीं मिलती वे अपने शिक्षकों और कर्मचारियों को सांतवें वेतन आयोग की जरूरतों के मुताबिक वेतन देने के लिए फीस में 15 फीसद तक की बढोतरी कर सकते हैं.

हालांकि सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि फीस बढ़ाने के क्रम में स्कूलों को कुछ खास शर्तों का पालन करना होगा लेकिन माना यही गया कि दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की खुली छूट दे दी है. आदेश के मुताबिक, स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए न तो सरकार से पूछने की जरूरत है और न ही बच्चों के अभिभावकों से.

शिक्षा विभाग के आदेश के आते ही बहुत से स्कूलों ने अपनी फीस बढ़ाने की सूचना जारी कर दी और इससे अभिभावक चिंता में पड़े. कई स्कूलों में अधिकारियों और अभिभावकों के बीच तूतू-मैंमैं हुई.

घाटे का बहाना बना बढ़ा दिया स्कूल फीस 

ज्योति वशिष्ठ के बच्चे बाल भारती पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं. ज्योति ने एक वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के साथ 50 से ज्यादा अभिभावकों ने मंगलवार को स्कूल के अधिकारियों को एक ज्ञापन दिया. इसमें मांग की गई कि फीस ना बढ़ाई जाए.

ये भी पढ़ें: 2 जी फैसले पर कांग्रेस की खुशी कहीं ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना तो नहीं’

ज्योति ने कहा, 'हम स्कूल के अधिकारियों से मिलने गए थे लेकिन उन लोगों ने कहा कि स्कूल घाटे में चल रहा है सो शिक्षकों को बढ़ा हुआ वेतन देने के लिए फीस बढ़ानी ही पड़ेगी.'

ज्योति ने एक अहम बात की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि मसले पर सरकार की कथनी और करनी में अंतर बढ़ता जा रहा है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा था कि बीते कुछ दिनों में पूरी दिल्ली से अभिभावक मुझसे मिलने आ रहे हैं. उनकी शिकायत है कि सातवें वेतन आयोग को लागू करने के कारण स्कूल बहुत ज्यादा फीस की मांग कर रहे हैं जिसमें एरियर भी शामिल है. इसे रोकना ही होगा. मैंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वह पूरी स्थिति पर फिर से विचार करे और इसे रोकने के लिए फौरी तौर पर कदम उठाए.

AAP foundation day

ज्योति वशिष्ठ का कहना है, स्कूल के अधिकारियों ने जवाब दिया कि हमें सरकार की ओर से ऐसी कोई सूचना ही नहीं मिली है जिसमें फीस न बढ़ाने को कहा गया हो इसलिए हम अपने फैसले (फीस बढ़ाने के) से कदम पीछे नहीं खींच सकते.

ज्योति का कहना है कि अगर सरकार सचमुच ईमानदारी से महसूस करती है कि स्कूलों को फीस नहीं बढ़ानी चाहिए तो उसे यह बात स्कूलों से लिखित में कहनी चाहिए.

रेखा झा के बच्चे पालम स्थित दिल्ली जैन पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं. रेखा झा ने फर्स्टपोस्ट से कहा कि स्कूल हर साल फीस में कम से कम 10 फीसद का इजाफा करते हैं. उनका सवाल है, ' सातवें वेतन आयोग की जरूरतों के मुताबिक वेतन दे सकने लायक स्कूलों के पास पैसा ना हो. ऐसा कैसे मुमकिन है भला ?'

दिल्ली हाइकोर्ट के स्टे ऑर्डर से फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे अभिभावकों को राहत मिली है. लेकिन ऑल इंडिया पैरेन्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का कहना है कि फीस बढ़ाने के सर्कुलर के ना होते भी कुछ स्कूल फीस बढ़ोतरी की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं क्योंकि कुछ प्रावधान ऐसा करने की इजाजत देते हैं.

अशोक अग्रवाल ने कहा, 'कानून के मुताबिक जिन स्कूलों को सरकारी सहायता हासिल नहीं है वे धनराशि की जरूरत की स्थिति में फीस बढ़ा सकते हैं. चूंकि यह नियम अब भी अमल में है सो सरकारी सर्कुलर के न होते भी स्कूल फीस बढ़ा सकते हैं.'

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi