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अरविंद केजरीवाल: हर बार सामने आता है अराजकतावादी चेहरा

सवाल यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य सचिव को क्यों बुलाया जाना चाहिए और उन्हें विधायकों के एक समूह की मांगों पर संतुष्ट करने को क्यों कहा जाना चाहिए?

Sanjay Singh Updated On: Feb 21, 2018 10:18 AM IST

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अरविंद केजरीवाल: हर बार सामने आता है अराजकतावादी चेहरा

ये बात 20 जनवरी, 2014 की है. कड़ाके की सर्दी के बीच राजधानी दिल्ली का राजपथ गणतंत्र दिवस की तैयारियों के लिए बंद था. पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल रेल भवन के पास पहुंचे और दिल्ली पुलिस के दो जूनियर अधिकारियों को निलंबित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. केजरीवाल ने तब गर्व से कहा था, 'वो मुझे अराजकतावादी बताते हैं. हां, मैं हूं.'

केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर सोमवार आधी रात के करीब आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को कथित तौर पर धमकाया, बदसलूकी की और उनसे धक्का-मुक्की की गई. इस पूरी घटना के दौरान केजरीवाल खुद मौजूद थे. इससे साबित होता है कि केजरीवाल अब भी अराजकतावादी हैं. दिल्ली और उसके लोगों को केजरीवाल की तुनकमिजाजी का दंश झेलना पड़ रहा है.

दिल्ली सरकार और नौकरशाही रही हैं आमने-सामने

किसी भी राज्य में मुख्य सचिव सबसे वरिष्ठ नौकरशाह होता है. मुख्यमंत्री चुनी हुई सरकार का मुखिया होता है. राज्य या केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली के मामले में) में योजनाओं और सेवाओं की सही पहुंच के लिए दोनों के बीच उचित समन्वय और अच्छे व्यक्तिगत तालमेल की जरूरत होती है. आखिरकार, राज्य या केंद्र सरकारें नौकरशाही की संरचनाओं के माध्यम से काम करती है. दिल्ली में अब तक, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और नौकरशाही आमने-सामने रही हैं. दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ आरोप की झड़ी लगा रखी है.

दिल्ली आईएएस अधिकारी संघ, दिल्ली सब-ऑर्डिनेट सेवा संघ और दिल्ली सरकार कर्मचारी कल्याण संघ पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए हैं. कर्मचारी और अधिकारी कार्यालय तो आए लेकिन काम नहीं किया. उनकी दलील साफ है. अगर मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री के सामने मुख्य सचिव के साथ कथित तौर पर बुरा बर्ताव और धक्का-मुक्की हो सकती है तो सबऑर्डिनेट कर्मचारियों के साथ तो और बुरा हो सकता है.

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आम आदमी पार्टी का राजनीतिक नेतृत्व मुख्य सचिव के खिलाफ शिकायत करने में व्यस्त है. उसका आरोप है कि मुख्य सचिव ने दलित सदस्यों के खिलाफ कथित तौर पर जातिगत टिप्पणी की. पार्टी निम्न आय वर्ग को राशन कार्ड और सस्ता राशन पहुंचाने के मामले को भी मुद्दा बना रही है. कथित तौर पर बेहद निंदनीय काम करने के बाद, आम आदमी पार्टी का नेतृत्व पूरे मामले को भटका रहा है ताकि सामाजिक रूप से समर्थक वर्ग में जनता की राय को अपनी तरफ किया जा सके और कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा सके.

फिलहाल दिल्ली में जो कुछ हो रहा है, स्थिति उससे अधिक विचित्र नहीं हो सकती. संवैधानिक स्थिति भंग होने की डर अब सच लगने लगा है. सत्ताधारी पार्टी के मुखिया और मुख्यमंत्री के साथ भरोसेमंद विधायकों के इस कथित कृत्य के जरिए गरीब और दलित समर्थक राजनीतिक छवि का निर्माण करने की आम आदमी पार्टी की कोशिश बेहद निंदनीय और चिंतनीय है.

Arvind Kejriwal

मुख्य सचिव ने कुछ यूं दिया घटना का विवरण

सूत्रों के मुताबिक, सरकार के तीन साल पूरे होने पर केजरीवाल के विज्ञापन को रिलीज करने के मुद्दे पर देर रात मुख्य सचिव को कथित रूप से मुख्यमंत्री के आवास पर बुलाया गया था. अधिकारियों ने विज्ञापन में 'दृश्य और अदृश्य शक्तियों' शब्द पर आपत्ति जताते हुए इसे पास नहीं किया है, जबकि केजरीवाल इसे मंजूर कर चुके हैं. अधिकारियों ने सरकारी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का हवाला देकर मंजूरी नहीं दी थी. केजरीवाल के आवास पर कथित रूप से इसी मुद्दे पर बात हुई जो कहासुनी तक जा पहुंची. माना जा रहा है कि मुख्य सचिव ने सोमवार शाम/रात की घटना पर विस्तृत नोट लिखा है और पूरे वाकए का क्रमवार ब्यौरा दिया है. उन्होंने इसे उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री के पास भेजा है. उन्होंने उत्तरी क्षेत्र के डीसीपी के पास शिकायत भी दर्ज कराई है.

मुख्य सचिव प्रकाश ने लिखा है कि केजरीवाल के कार्यालय से उन्हें बार-बार याद दिलाया गया कि मुख्यमंत्री आधी रात को उनसे मिलेंगे. जव वो मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे और कमरे के अंदर गए तो केजरीवाल उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और 11 विधायकों के साथ मौजूद थे. उन्हें तीन सीटों वाले सोफे पर अमानतुल्लाह खान और एक अन्य विधायक के साथ बीच में बैठाया गया. वे यह जानना चाहते थे कि तीन साल वाले सरकारी विज्ञापन को क्यों जारी नहीं किया गया है, इस तथ्य के बावजूद कि यह विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है. अचानक विवादास्पद विधायक अमानतनुल्ला खान और उनकी बायीं तरफ दूसरे विधायक ने कथित तौर पर उनपर मुक्के बरसाना शुरू कर दिया. उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की गई और अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजात कानून के तहत झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई.

arvindkejriwal

मुख्यमंत्री के प्रति मुख्य सचिव की जवाबदेही क्यों?

सवाल यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य सचिव को क्यों बुलाया जाना चाहिए और उन्हें विधायकों के एक समूह की मांगों पर संतुष्ट करने को क्यों कहा जाना चाहिए.

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दुर्भाग्य से, इस मामले में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने विधायकों और आला अधिकारी के बीच बवाल की जमीन तैयार की. इस तरह उन्होंने अपने विधायकों के कथित मूखर्तापूर्ण काम के लिए सुविधा मुहैया कराई.

अधिकारियों के खिलाफ विधायकों की शिकायतों के निपटारे के लिए पहले से नियम और तंत्र मौजूद है और वो फोरम राज्य विधानसभा है. केजरीवाल और आम आदमी पार्टी संसदीय लोकतंत्र का नियम तोड़ने के दोषी हैं लेकिन पार्टी को इस पर पछतावा नहीं है. पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, 'नौकरशाहों को चुने हुए जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं होना चाहिए?' केजरीवाल खुद एक नौकरशाह रहे हैं. क्या उन्होंने नौकरी में रहते हुए यह सिद्धांत खुद पर लागू किया था.

आम आदमी पार्टी अपने कथित झूठ का इस तरह उपयोग कर रही है कि वो चुनाव में विरोधी दलों के खिलाफ प्रचार कर रही है. लेकिन समस्या यह है कि दिल्ली के नौकरशाह उनकी बात नहीं मान रहे. उन्होंने पूरे मामले पर अपनी बात लिखित रूप में रखी है.

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