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सज्जन कुमार के खिलाफ बाकी केस का क्या होगा? 8 साल पहले एक मामले में हुई थी अंतिम सुनवाई

34 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद दंगा पीड़ितों के मन में यही सवाल था कि क्या सज्जन कुमार के खिलाफ अन्य मामलों में भी फैसला आएगा?

Updated On: Dec 19, 2018 02:50 PM IST

FP Staff

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सज्जन कुमार के खिलाफ बाकी केस का क्या होगा? 8 साल पहले एक मामले में हुई थी अंतिम सुनवाई

1984 के सिख दंगों में दिल्ली हाईकोर्ट ने दो दिन पहले सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. फैसले के अगले ही दिन सज्जन कुमार ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

सज्जन कुमार को पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-1 में दंगों में 5 सिखों के मारे जाने और राज नगर पार्ट-2 में गुरुद्वारा जलाने के मामले में दोषी ठहराया गया है. यह घटना 1-2 नवंबर, 1984 की दरम्यानी रात को हुआ था. हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करने को कहा है.

वर्ष 2005 में नानावटी आयोग की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के बाद सीबीआई ने सज्जन कुमार के खिलाफ कई केस दर्ज किए. इससे पहले वो उनके खिलाफ 1984 सिख दंगे मामले में एकमात्र केस की जांच कर रही थी.

34 साल बाद हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मंगलवार को दंगा पीड़ितों के मन में यही सवाल था कि क्या सज्जन कुमार के खिलाफ अन्य मामलों में भी फैसला आएगा?

सज्जन कुमार और अन्य नेताओं के खिलाफ शेष मामलों का अध्ययन करेंगे

कोर्ट में 1984 सिख दंगा प्रभावितों का केस लड़ते आ रहे वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वो और उनकी टीम जल्दी ही सज्जन कुमार और कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ शेष मामलों का अध्ययन करेंगे.

मामले की जांच के लिए अब तक गठित 3 आयोग, 7 कमीशन और 2 एसआईटी टीमों से इतना भी नहीं हुआ कि वे किसी दोषी को सलाखों के पीछे कुछ दिन तक रख सकें (फोटो: रॉयटर्स)

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के विरोध में भड़की हिंसा में हजारों सिखों का कत्ल-ए-आम हुआ था (फोटो: रॉयटर्स)

उन्होंने कहा, इस वक्त सीबीआई की तारीफ की जानी चाहिए कि वो हाईकोर्ट से सज्जन कुमार को सजा दिलवा पाने में कामयाब रही. यह हमारी रणनीति थी कि हम पहले इस केस (पालम कॉलोनी) पर फोकस करें. क्योंकि हमें पता था कि पूर्व सांसद के खिलाफ पक्के सबूत हैं. सुल्तानपुरी केस में सीबीआई की याचिका को स्वीकार कर लिया गया है और यह तकनीकी रूप से पेंडिंग है.

सीबीआई द्वारा दायर यह केस अनवर कौर की शिकायत पर है. जिन्होंने आरोप लगाया था कि सज्जन कुमार उस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे जिसने उनके पति नवीन सिंह की लिन्चिंग (पीट-पीटकर हत्या) की थी. 23 दिसंबर, 2002 को जिला अदालत ने सज्जन कुमार और एक अन्य आरोपी को यह कहकर बरी कर दिया था कि सबूतों से उनपर लगाए गए आरोप साबित नहीं होते हैं.

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