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NDA में कुशवाहा के कमिटमेंट की 'डेडलाइन' खत्म, अब क्या होगा अगला कदम

कुशवाहा को कष्ट नीतीश से कम बीजेपी से अब ज्यादा हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, कुशवाहा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनका गठबंधन बीजेपी से है न कि जेडीयू से.

Updated On: Dec 03, 2018 03:46 PM IST

Amitesh Amitesh

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NDA में कुशवाहा के कमिटमेंट की 'डेडलाइन' खत्म, अब क्या होगा अगला कदम

जेडीयू की तरफ से आ रहे बयानों के तीर ने कुशवाहा की परेशानी को और बढ़ा दिया है. एनडीए गठबंधन की अपनी ही सहयोगी जेडीयू की तरफ से केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहते बिहार को लेकर किए गए कामों का हिसाब मांगना कुशवाहा को नागवार गुजरा है.

दिल्ली से पटना पहुंचे उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश सरकार पर हमला बोल दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों के लिए कई प्रस्ताव दिए गए लेकिन, राज्य सरकार की तरफ से हो रही देरी के चलते जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी.

कुशवाहा ने एक बार फिर से बिहार सरकार से शिक्षा सुधार के लिए अपनी तरफ से 25 सूत्री मांगों को मानने की शर्त रख दी. उन्होंने कहा, ‘अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक तौर पर हमारी मांगों को मान लें तो हम हर अपमान को सहकर और भूलकर उनके साथ रहने को तैयार हैं.’

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा भी इस बात को समझ रहे हैं कि जेडीयू नहीं चाहती है कि किसी भी सूरत में वे एनडीए में बने रहें. नीतीश विरोध के नाम पर ही कुशवाहा ने जेडीयू छोड़कर पांच साल पहले अलग पार्टी बनाई थी. अब जबकि नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी हो गई है तो दोनों का साथ चल पाना मुश्किल हो रहा है.

UPENDRA KUSHWAHA

उपेंद्र कुशवाहा

उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि नीतीश कुमार ने उन्हें नीच कहकर अपमानित करने का काम किया है. इसके अलावा उनकी पार्टी आरएलएसपी को भी तोड़कर उसके दो विधायकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है. इन दोनों बातों को लेकर कुशवाहा नाराज हैं. लेकिन, उनका दावा है कि अगर नीतीश कुमार उनकी शिक्षा में सुधार की मांगों को मान लें तो फिर इस अपमान को भी भूलने के लिए वो तैयार हैं.

लेकिन, कुशवाहा को कष्ट नीतीश से कम बीजेपी से अब ज्यादा हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, कुशवाहा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनका गठबंधन बीजेपी से है न कि जेडीयू से. फिर भी, बीजेपी आलाकमान का कुशवाहा को किनारे कर नीतीश कुमार को बराबरी का हक देना अखर रहा है. उसके बाद रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से उन्हें मिलने का वक्त तक नहीं दिया गया.

कुशवाहा का दो दिन पहले दिया गया बयान बीजेपी के साथ उनके रिश्तों में आई खटास का एहसास कराने वाला है. कुशवाहा ने बीजेपी आलाकमान से मिलने का वक्त नहीं दिए जाने वाले सवाल पर कहा था, ‘जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है.’

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा को साफ कर दिया गया है कि एनडीए में रहते हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें 2 से ज्यादा सीटें नहीं दी जा सकतीं. लेकिन, कुशवाहा का तर्क है कि अब उनका जनाधार पांच सालों में बढ़ चुका है. कुशवाहा महज दो सीटों के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं. इसी के बाद वो अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात वक्त मांग रहे थे, लेकिन, वक्त नहीं मिलने से अब कुशवाहा के बयानों में बीजेपी आलाकमान को लेकर तल्खी दिखने लगी है.

उधर, उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से आ रहे बयानों और उनकी सियासी मुलाकातों के सिलसिले ने महागठबंधन की तरफ उनके बढ़ते कदम का भी काफी पहले से संकेत देना शुरू कर दिया है. आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से उनकी मुलाकात और बात को लेकर कयास लगते रहे हैं. जेडीयू से अलग होकर महागठबंधन को एक करने में लगे शरद यादव से भी उनकी मुलाकात को लेकर कयास लगते रहे हैं.

फाइल फोटो

फाइल फोटो

तेजस्वी यादव और शरद यादव की तरफ से भी कई बार उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर दिया जा चुका है. लेकिन, कुशवाहा एनडीए छोडने का संकेत देने के बावजूद महागठबंधन में जाने पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले रहे हैं.

अब सबकी नजरें 4 और 5 दिसंबर को बिहार के वाल्मीकिनगर में होने वाले आरएलएसपी के चिंतन शिविर पर है. इस चिंतन शिविर में ही आरएलएसपी के एनडीए में रहने या नहीं रहने को लेकर मंथन होगा. दो दिनों के चिंतन शिविर के अगले ही दिन 6 दिसंबर को मोतिहारी में आरएलएसपी का खुला अधिवेशन बुलाया गया है. इसी अधिवेशन में हो सकता है कि उपेंद्र कुशवाहा अपने अगले कदम का ऐलान कर दें.

लेकिन, उनकी तरफ से कई महीनों तक अभी मंत्री पद पर बने रहने की बात कहना दिखा रहा है कि अभी भी ‘कुशवाहा पॉलिटिक्स’ का ‘क्लाइमेक्स’ आने में कुछ वक्त लग सकता है.

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