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जब चेन स्मोकर लोहिया ने कार्यकर्ताओं के लिए छोड़ दी थी सिगरेट

राम मनोहर लोहिया ने पहले महात्मा गांधी के कहने पर सिगरेट छोड़ दी थी लेकिन उनकी मौत के बाद दोबारा सिगरेट पीने लगे, उसके बाद मामा बालेश्वर दयाल ने उन्हें सिगरेट छोड़ने के लिए मनाया

Surendra Kishore Surendra Kishore Updated On: Feb 12, 2018 12:23 PM IST

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जब चेन स्मोकर लोहिया ने कार्यकर्ताओं के लिए छोड़ दी थी सिगरेट

चेन स्मोकर डॉ. राम मनोहर लोहिया ने पहले तो गांधी के कहने पर सिगरेट छोड़ी. पर गांधी की हत्या के बाद फिर पीनी शुरू कर दी थी. बाद में अपने दल के कार्यकर्ताओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जो सिगरेट छोड़ी तो बाद में कभी नहीं पी.

दरअसल डॉ. लोहिया की देखा-देखी उनके दल के कई कार्यकर्ता सिगरेट पीने लगे थे. कार्यकर्ताओं की सेहत खराब होने लगी तो बुजुर्ग समाजवादी नेता मामा बालेश्वर दयाल ने लोहिया से कहा कि आप सिगरेट छोड़ दें, क्योंकि आपकी वजह से कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. डॉ. लोहिया ने मामा की बात मान ली.

कौन थे ये मामा, जिन्हें ना नहीं कह पाए लोहिया

मामा बालेश्वर दयाल को मध्य प्रदेश के आदिवासी लड़के मामा कहते थे. स्वतंत्रता सेनानी बालेश्वर दयाल दीक्षित उर्फ मामा बालेश्वर दयाल पहले कांग्रेस में थे. बाद में वे समाजवादी जमात में शामिल हो गए थे.

पहली बार डॉ. लोहिया ने महात्मा गांधी को  वचन दिया था कि मैं अब सिगरेट नहीं पीऊंगा. गांधी जी चाहते थे कि लोहिया सिगरेट पीना छोड़ दें. गांधी ने लोहिया से वचन लिया था लेकिन, 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद डॉ. लोहिया ने गांधी को दिया अपना वचन तोड़ दिया. वे फिर सिगरेट पीने लगे थे. अब पहले से ज्यादा सिगरेट पीने लगे थे. लोहिया चेन स्मोकर बन गए थे. उनकी देखा-देखी अनेक कार्यकर्ता भी उनकी तरह चेन स्मोकर बन गए. यह देखकर ‘मामा’ चिंतित हो उठे.

मामा बालेश्वर दयाल ने लोहिया से कहा कि आप की देखा-देखी दल के आधे कार्यकर्ता सिगरेट पीने लगे हैं. इसके बाद लोहिया ने सिगरेट पीनी छोड़ दी. दयाल बाद में राज्य सभा के सदस्य भी बने थे.

कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों के लिए छोड़ दी लत

मामा बालेश्वर दयाल ने इस प्रकरण को कुछ यूं लिखा है, ‘डॉ. लोहिया की सुबह कम से कम दो कप चाय पीने से शुरू होती थी. चाय के बाद सिगरेट पीने के बाद वे शौच जाते थे. हम उनसे सवाल किया करते, डॉ. साहब आपके कहने से हमने लोगों की शराब छुड़वाई, आप खुद सिगरेट नहीं छोड़ सकते?’ लोहिया को लोग डॉक्टर साहब कहते थे.

‘हमने डॉ. लोहिया को इस संबंध में दो-तीन पत्र भी लिखे. मैंने इस पर भी पीछा नहीं छोड़ा. एक बार जब वे इंदौर में अपने भाषण के बाद इंदौर स्टेशन से चले तो मैंने कहा, ‘डॉक्टर साहब, आपको यहां पहुंचाने जितने लोग आए हैं, उनमें से आधे आपको देखकर सिगरेट पीने लगे हैं.’

Ram Manohar Lohia

राम मनोहर लोहिया की तस्वीर (फोटो: यूट्यूब से साभार)

उस समय तो वे कुछ नहीं बोले, लेकिन दो महीने बाद उनका पत्र आया जिसमें लिखा था कि लोगों से आप कह देना कि मैंने सिगरेट छोड़ दी है. ऐसे थे डॉ. लोहिया. लोकहित के लिए अपनी एक तीव्र लत को भी छोड़ने के लिए वे तैयार हो गए.

इससे पहले महात्मा गांधी ने भी लोहिया की सिगरेट की लत एक बार छुड़वाई थी. पर गांधी की हत्या के बाद लोहिया ने फिर सिगरेट पीनी शुरू कर दी. इस संबंध में गांधी-लोहिया संवाद भी प्रेरक है.

जानिए क्यों लोहिया ने कहा था, गांधी ने मुझे धोखा दिया

अपनी हत्या से कुछ समय पहले गांधी जी ने लोहिया से कहा कि तुम इतना ज्यादा सिगरेट क्यों पीते हो? सिगरेट छोड़ दो. तुम्हारे पिता के निधन के बाद मैं ही तुम्हारे पिता की जगह पर हूं. तुम्हें उस हैसियत से कहता हूं कि तुम अब सिगरेट मत पियो. गांधी जी की इस बात का लोहिया पर असर पड़ा. लोहिया ने सिगरेट छोड़ी दी. पर उनके शहीद हो जाने के बाद लोहिया मर्माहत हो गए. तनाव में आ गए. उन्होंने फिर सिगरेट का सेवन शुरू कर दिया.

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लोहिया ने क्षोभ में कहा था कि गांधी ने मुझे धोखा दिया. कहा था कि पिता की भूमिका निभाएंगे, पर खुद ही दुनिया से चले गए. अब इस धोखेबाज के अनुशासन को नहीं मानूंगा. सिगरेट फिर शुरू करने का तब लोहिया ने यही बहाना बनाया था. दरअसल यह ऐसी लत है जो जल्दी जाती ही नहीं. फिर इसे पकड़े रहने के लिए कई बहाने बनाने पड़ते हैं. वही काम तब लोहिया ने भी किया था. पर जब मामा जी ने उनसे कहा कि इससे उनके कार्यकर्ताओं और प्रशंसक भी गलत लत लगा रहे हैं तो लोहिया ने अपनी यह बुरी लत को हमेशा के लिए तौबा कह दिया.

अपने हीरो को देखकर लोहिया को लगी थी सिगरेट की लत

संभव है कि लोहिया ने अपने कभी के हीरो जवाहरलाल नेहरू को देखकर सिगरेट की आदत लगा ली हो. इस संबंध में अभी कोई पुष्ट जानकारी  नहीं है. कम ही लोग जानते हैं कि नेहरू जी भी सिगरेट पीते थे. डॉ. लोहिया आजादी के संघर्ष में नेहरू के सहयोगी थे. पर, आजादी के बाद वे नेहरू के कट्टर आलोचक बन गए थे. पर 1964 में जब नेहरू का निधन हुआ तो लोहिया ने इन शब्दों में नेहरू को श्रद्धांजलि दी, ‘47 के पहले के नेहरू को सलाम.’

नेहरू के सिगरेट सेवन के बारे में उनके निजी सचिव एम.ओ मथाई ने लिखा है,‘जनता के सामने या जहां बहुत से लोग हों, वहां ‘जवाहर लाल नेहरू’ सिगरेट नहीं पीते थे. लेकिन छोटी कमेटी बैठकों में जरूर पी लेते थे.

वह सिगरेट बहुत ज्यादा तो पीते ही नहीं थे जितना भी पीते थे सिगरेट को जीयस होल्डर में लगा कर पीते थे ताकि तंबाकू का निकोटीन उसके अंदर की रूई में समाकर रह जाए. आम तौर पर नेहरू जी होल्डर में रूई लगाकर पीते थे जो बार-बार बदली जाती थी.’

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