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नेहरू ने सी.ए.जी. की अनुमति से किया था चुनाव में सरकारी विमान का इस्तेमाल

यह सहूलियत सिर्फ जवाहरलाल नेहरू के लिए ही दी गई थी.

Updated On: Feb 05, 2017 11:03 AM IST

Surendra Kishore Surendra Kishore
वरिष्ठ पत्रकार

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नेहरू ने सी.ए.जी. की अनुमति से किया था चुनाव में सरकारी विमान का इस्तेमाल

प्रथम आम चुनाव के समय यह सवाल उठा था कि क्या प्रधानमंत्री चुनाव दौरे के लिए सरकारी विमान का इस्तेमाल कर सकते हैं? काफी हद तक लोकलाज का ध्यान रखने वाले जवाहरलाल नेहरू ने इस सवाल को खुद नहीं निपटाया.

उन्होंने पहले तो अफसरों की उच्चस्तरीय कमेटी बना दी, पर कुछ लोगों ने कहा कि आप के मातहत के अफसरों की सिफारिश का कोई नैतिक बल नहीं रहेगा तो उन्होंने सी.ए.जी. से राय मांगी.

हालांकि सहमति देते हुए सी.ए.जी. ने तब यह भी कहा था कि विशेष परिस्थिति में सिर्फ जवाहरलाल नेहरू ही उचित भाड़ा देकर चुनाव प्रचार के लिए वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर सकते हैं, पर इसे कोई उदाहरण नहीं माना जाएगा.

अगले किसी प्रधान मंत्री को इसकी छूट नहीं रहेगी. बाद के प्रधानमंत्रियों ने इस सुविधा को किस तरह जारी रखा, यह पता नहीं चल सका है.

सी.ए.जी. सरकार की मुनीम नहीं 

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सी.ए.जी.से नीति विषयक राय मांगने के पीछे नेहरू की यही मंशा थी कि सी.ए.जी. सरकार का सिर्फ मुनीम नहीं है. याद रहे कि खुद जवाहरलाल संविधान सभा के सदस्य थे और वह सी.ए.जी. की भूमिका के बारे में संविधान सभा की राय जानते थे.

एक अन्य प्रसंग में सुप्रीम कोर्ट ने भी 1 अक्तूबर 2012 को कहा था कि सी.ए.जी. सरकारों का कोई मुनीम मात्र नहीं है.

पहला आम चुनाव 1951 के अक्तूबर और दिसंबर तथा 1952 की फरवरी में हुआ था. चुनाव में करीब छह महीने लगे थे.

जवाहर लाल जी कांग्रेस के सबसे बड़े व सर्वाधिक लोकप्रिय नेता थे. पूरे देश में प्रचार के लिए विमान जरूरी था. इस सवाल पर इसलिए भी माथापच्ची हुई क्योंकि इस संबंध में पहले से कोई नियम था ही नहीं.

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आई.बी. के निदेशक ने चुनाव से कुछ महीने पहले ही प्रधान मंत्री के निजी सचिव एम.ओ.मथाई से कहा कि प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री की सुरक्षा को लेकर हम चिंतित हैं. याद रहे कि तीन ही साल पहले ही महात्मा गांधी की हत्या हो चुकी थी.

निदेशक ने कहा कि हमें चिंता होगी, यदि प्रधान मंत्री नियमित कमर्शियल फ्लाइट से यात्रा करेंगे. वैसे भी उन दिनों इस देश में विमान सेवा शैशवावस्था में ही थी.

जेब से भुगतान की शर्त पर मिली अनुमति  

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निदेशक चाहते थे कि सरकार ऐसी कोई व्यवस्था कर दे ताकि भुगतान के एवज में प्रधान मंत्री प्रचार के लिए भारतीय वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर सकें. कैबिनेट सचिव एन.आर.पिल्लई को मथाई ने यह बात बताई.

पिल्लई के सामने समस्या यह थी कि सरकारी काम के अलावा किसी अन्य काम के लिए भारतीय वायु सेना के विमान का इस्तेमाल नियमतः नहीं हो सकता था.

पिल्लई ने सलाह दी कि इस मुद्दे पर विचार के लिए एक उच्चस्तरीय सरकारी कमेटी बना दी जाए. तीन सदस्यीय समिति बना दी गई. कैबिनेट सचिव उसके अध्यक्ष बने. रक्षा सचिव को सदस्य और आई.सी.एस. अधिकारी तारलोक सिंह को सदस्य सचिव बनाया गया.

इस समिति ने रपट में कहा कि प्रधान मंत्री यदि किसी गैर सरकारी काम से भी कहीं जाते हैं तो उतना समय के लिए प्रधान मंत्री पद की जिम्मेदारी से वे मुक्त तो नहीं हो जाते! विमान में भी वे अनेक सरकारी काम कर सकते हैं.

समिति ने यह राय प्रकट की कि प्रधानमंत्री जब गैर सरकारी दौरे पर जाएंगे तो वे वायु सेना के विमान का उपयोग कर सकते हैं. पर इसके लिए वे अपनी जेब से सरकार को भाड़े का भुगतान करेंगे.

सिर्फ नेहरू के लिए मिली थी सशर्त अनुमति

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नेहरू ने कैबिनेट सेक्रेट्री से कहा कि वे इस रपट को मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच वितरित करा दें. इसी बीच किसी समझदार व्यक्ति ने नेहरू को सलाह दी कि यदि कैबिनेट से भी इसे आप मंजूर भी करा लेंगे तो भी इस सरकारी खर्चे का सार्वजनिक रूप से औचित्य साबित करने में दिक्कत होगी. क्योंकि न सिर्फ उस कमेटी के सदस्य आपके मातहत हैं बल्कि कैबिनेट भी आपके प्रभाव में है.

इस वजह से चुनाव प्रचार के लिए वायु सेना के विमान के इस्तेमाल की मंजूरी ऐसे किसी प्रतिष्ठान की तरफ से होनी चाहिए जिस पर दिन प्रतिदिन के कामों में सरकार का सीधा असर नहीं रहता हो.

नेहरू सहमत हो गए. इस सलाह के बाद इस मामले को सी.ए.जी. को सौंप दिया गया. इस संबंध में तब तक तैयार सारे कागजात सी.ए.जी. को सौंप दिए गए.

उन्होंने उन पर गौर किया. उसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री सचिवालय को बताया कि अभी देश की स्थिति असामान्य है. प्रधान मंत्री की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है. इस पृष्ठभूमि में मैं सुरक्षा के आधार पर अपना नोट तैयार करूंगा. मेरी नजर में इसी आधार पर उन्हें वायु सेना के विमान के उपयोग की सलाह दी जा सकती है.

सी.ए.जी. नरहरि राव ने यही किया. उन्होंने कैबिनेट सचिव की सिफारिश को मंजूर कर लिया. पर सी.ए.जी. ने शर्त लगा दी. उन्होंने फाइल में लिखा कि यह सहूलियत सिर्फ जवाहरलाल नेहरू के लिए ही दी जा रही है. किसी अगले प्रधानमंत्री के लिए यह पूर्व उदाहरण नहीं बनेगा.

सन् 1951 में वायु सेना के पास सिर्फ कुछ डकोटा विमान ही थे. जवाहरलाल नेहरू ने तब उसी का इस्तेमाल किया था.

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