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ज्योतिषी ने 2004 में कहा था, 47 साल की उम्र में प्रियंका गांधी बनेंगी प्रधानमंत्री

लोकसभा चुनाव में चंद महीने ही शेष बचे हैं, इस माहौल में ज्योतिष भविष्यवाणी और तंत्रशास्त्र पर कितना विश्वास किया जाए? क्या यह किसी अंधे द्वारा तीर चलाए जाने जैसी बात है

Updated On: Jan 28, 2019 08:21 AM IST

Surendra Kishore Surendra Kishore
वरिष्ठ पत्रकार

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ज्योतिषी ने 2004 में कहा था, 47 साल की उम्र में प्रियंका गांधी बनेंगी प्रधानमंत्री

ज्योतिषी नवीन खन्ना ने 2004 में भविष्यवाणी की थी कि 47 साल की उम्र में प्रियंका गांधी देश की प्रधानमंत्री बनेंगी. जब प्रियंका को अब से कुछ दिन पहले ठीक 47 साल की उम्र में कांग्रेस का महासचिव बनाया गया तो ज्योतिषी खन्ना की भविष्यवाणी याद आ गई.

खन्ना ने ही नरेंद्र मोदी के उत्थान की भविष्यवाणी 2009 में कर दी थी. क्या यह मात्र संयोग है कि कुछ ही महीने बाद लोकसभा का चुनाव होने वाला है? या कुछ और बात है?

प्रियंका के PM बनने की सबसे पहली भविष्यवाणी 1993 में हुई थी

याद रहे कि तमिलनाडु के ज्योतिषी यागवा ने तो 1993 में ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री बनेंगी. वो खबर 18 नवंबर, 1993 के अखबार में छपी थी. वैसे पिछले अनुभव बताते हैं कि आम तौर पर ज्योतिषियों की भविष्यवाणियां सही साबित नहीं होतीं. पर कुछ की भविष्यवाणियां सही भी साबित हो जाती हैं. क्या नवीन खन्ना उन्हीं चंद ज्योतिषियों में से एक हैं?

15 मार्च, 2004 के इंडिया टुडे में प्रकाशित नवीन खन्ना की भविष्यवाणियों में यह भी कहा गया था कि सोनिया गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी, बल्कि पी.वी नरसिंह राव मंत्रिमंडल में रहा कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री होगा. यह बात तब सही साबित हो गई जब डॉ. मनमोहन सिंह वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री बने. हालांकि पत्रिका के उसी अंक में छपी नवीन खन्ना की कुछ अन्य भविष्यवाणियां सही साबित नहीं हुईं.

Narendra Modi

ज्योतिषचार्यों ने 2009 में ही नरेंद्र मोदी के उत्थान की भविष्यवाणी कर दी थी जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे

मई, 2009 में ही नवीन खन्ना ने यह भविष्यवाणी कर दी थी कि 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्थान होगा. (टाइम्स ऑफ इंडिया- 11 मई, 2009) यह सच साबित हुआ. बोफोर्स तोप सौदा घोटाला विवाद की पृष्ठभूमि में वर्ष 1989 में लोकसभा चुनाव हुआ था. तब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. चुनाव से ठीक पहले देश के 10 प्रमुख ज्योतिषियों की भविष्यवाणियां ‘इलेस्ट्रेटेड  वीकली ऑफ इंडिया’ ने छापी थी. इन 10 में से सिर्फ एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी कि वी.पी सिंह प्रधानमंत्री बनेंगे. अन्य नौ ज्योतिषी राजीव गांधी के दोबारा सत्ता में आने की भविष्यवाणी कर रहे थे.

याद रहे कि चुनाव के बाद वी.पी सिंह प्रधानमंत्री बने थे. तब इन ज्योतिषियों के विपरीत अधिकतर चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में कांग्रेस की हार का अनुमान लगाया गया था. यानी, ओपिनियन पोल के काम में लगे लोगों का पूर्वानुमान ज्योषियों की अपेक्षा अधिक सटीक होता रहा है. फिर भी अधिकतर छोटे-बड़े नेतागण चुनाव से ठीक पहले ज्योतिषियों के यहां चक्कर लगाने लगते हैं. आम लोगों में भी ज्योतिषियों के प्रति आकर्षण देखा जाता है. ऐसे में जब किसी ज्योतिषी की कोई एक भविष्यवाणी भी सही हो जाती है तो उसकी ओर लोगों की उत्सुकता भी काफी बढ़ जाती है.

याद रहे कि नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह के बारे में नवीन खन्ना की भविष्यवाणी सही साबित हो चुकी है.

ज्यादातर ज्योतिषियों की भविष्यवाणी गलत साबित हुई

अब जरा कुछ दूसरे ज्योतिषियों के 2004 में की गई भविष्यवाणियों पर भी गौर कर लें. दिल्ली के मशहूर ज्योतिषी एल.डी मदान ने 2004 के चुनाव से पहले यह भविष्यवाणी की थी कि अटल बिहारी वाजपेयी फिर प्रधानमंत्री बनेंगे. पर ऐसा नहीं हुआ. यानी मदान गलत साबित हुए. इसी तरह मुंबई की ज्योतिषी वसुधा वाघ ने कहा कि 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के समर्थन से तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी.

पर कांग्रेस के डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी. यानी वाघ की भविष्यवाणी आंशिक रूप से ही सही साबित हुई. कोलकाता की ज्योतिषी कुसुम भंडारी की सिर्फ यह भविष्यवाणी सही साबित हुई कि चंद्रबाबू नायडू के दोबारा सत्ता में आने की संभावना नहीं है. उनकी बाकी अधिकतर भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं.

बंगलुरु की ज्योतिषी गायत्री देवी वासुदेव की यह भविष्यवाणी सही साबित हुई कि ‘चूंकि बीजेपी अष्टम शनि में है, इसलिए पार्टी एक महत्वपूर्ण शक्ति गंवा देगी.’

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चुनावी मौसम में ज्योतिषचार्य अपनी-अपनी भविष्यवाणियां करते हैं मगर इनमें से ज्यादातर की भविष्यवाणी गलत ही साबित होती हैं (फोटो: फेसबुक से साभार)

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याद रहे कि अटल सरकार 2004 में सत्ता गंवा बैठी थी. पेनामल संजीवन नेहरू नामक ज्योतिषी ने तो 2004 में यह हास्यास्पद भविष्यवाणी कर दी थी कि ‘बीजेपी अध्यक्ष एम.वेंकैया नायडू प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी की जगह लेंगे.’ उन्हीं दिनों तंत्र विद्या की अध्येता मां प्रेम उषा ने भविष्यवाणी की थी कि अटल बिहारी वाजपेयी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे और उनकी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी.’ पर ऐसा नहीं हो सका. यानी मां प्रेम उषा की तंत्र विद्या ने उनका साथ नहीं दिया.

अहमदाबाद के ज्योतिषी सनत कुमार दयाशंकर शास्त्री ने कहा था कि ‘अगले साल जुलाई या अगस्त में अटल बिहारी वाजपेयी लालकृष्ण आडवाणी के लिए रास्ता बनाएंगे और आडवाणी को जबरदस्त राजनीतिक शक्ति मिलेगी.’ लेकिन यह भी न हो सका.

बेजान दारूवाला के बेटे की 2014 पर भविष्यवाणी सच साबित हुई

अब जरा 2013 की कुछ भविष्यवाणियों पर नजर डालें. नवंबर, 2013 में पंडित देवेंद्र भट्ट ने कहा कि ‘आगामी चुनाव के बाद देश को अस्थिर सरकार मिलेगी.’ पर ऐसा नहीं हुआ. यानी भट्ट साहब फेल हुए. पर, बेजान दारूवाला ने कहा कि मेरे ज्योतिषी बेटे नस्तूर दारूवाला का दृढ़ विश्वास है कि ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे. ’यानी दारूवाला पास हुए.

अब सवाल है कि ज्योतिष विद्या और तंत्रशास्त्र पर कितना विश्वास किया जाए? क्या यह किसी अंधे द्वारा तीर चलाए जाने जैसी बात है. पता नहीं, पर मेरा अपना अनुभव यह है कि नाड़ी ज्योतिषी अपेक्षाकृत कुछ अधिक सटीक भविष्यवाणियां करते हैं.

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