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जिन नेताओं को दलित समाज ने बनाया, उन्हें हमारी हालत देखकर भी शर्म नहीं आती: भीम आर्मी

19 अगस्त को भीम आर्मी के सदस्य दिल्ली के संसद भवन मार्ग पर धरना प्रदर्शन करने वाले हैं. इसके लिए ये बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं

Updated On: Aug 07, 2018 11:25 AM IST

Vivek Anand Vivek Anand
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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जिन नेताओं को दलित समाज ने बनाया, उन्हें हमारी हालत देखकर भी शर्म नहीं आती: भीम आर्मी

19 अगस्त को भीम आर्मी के सदस्य दिल्ली के संसद भवन मार्ग पर धरना प्रदर्शन करने वाले हैं. इनकी मांग है कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर लगा एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) हटाया जाए और उसे रिहा किया जाए साथ ही 2 अप्रैल को हुए दलितों के विरोध प्रदर्शन के दौरान जेलों में बंद भीम आर्मी के सदस्यों और युवाओं को सरकार रिहा करे.

एससी एसटी एक्ट के प्रावधानों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से आई नरमी के खिलाफ दलितों ने 2 अप्रैल को बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था. यूपी, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई थीं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जेलों में अभी तक प्रदर्शनकारी बंद हैं. इसी को लेकर भीम आर्मी 19 अगस्त को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है. इसी संबंध में फ़र्स्टपोस्ट ने भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत नौटियाल से विस्तार से चर्चा की.

फ़र्स्टपोस्ट- 19 अगस्त को होने वाले भीम आर्मी के विरोध प्रदर्शन की बड़ी चर्चा हो रही है. आप क्या करने जा रहे हैं?

मंजीत नौटियाल- 19 अगस्त को हम शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन करने वाले हैं. इस विरोध प्रदर्शन में हमारा मुख्य मुद्दा है- भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद की रिहाई और 2 अप्रैल को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान जेलों में बंद हमारे लोगों की रिहाई. सरकार ने 2 अप्रैल के बंद के दौरान बहुजन समाज के जिन निर्दोष और नाबालिग बच्चों को जेल भेज दिया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए. सरकार ने 14 महीने से भीम आर्मी के संस्थापक एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद को जेल में डालकर रखा है, उसके खिलाफ हम सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने वाले हैं.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस मुद्दे पर हमारी मदद की जिम्मेदारी ली है. सरकार ये तक बताने को तैयार नहीं है कि चंद्रशेखर आजाद को जेल में क्यों रखा गया है. जिन लोगों ने गोली चलवाई उनको गिरफ्तार नहीं किया गया और जो शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे, उन्हें जेलों में ठूंस दिया गया. ये बहुत पीड़ा की बात है और इसी के विरोध में हमलोग 19 अगस्त को दिल्ली के संसद भवन मार्ग पर शांतिपूर्ण ढंग से धरना देंगे. इसमें जो बच्चे दलित आंदोलन के दौरान जेल चले गए थे उनके माता पिता को सम्मानित किया जाएगा और जो जेल से छूटकर आ गए हैं, उनका हौसला बढ़ाया जाएगा.

फ़र्स्टपोस्ट- किस स्तर के विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है, आपके लोग कहां-कहां से आ रहे हैं?

मंजीत नौटियाल- पूरे देश से लोग आएंगे. जहां-जहां दलितों के साथ अत्याचार हुआ है, वहां के लोग आएंगे. मध्य प्रदेश, राजस्थान, यूपी और हरियाणा सभी जगहों से दलित समाज के लोग आ रहे हैं. मेरठ, मुजफ्फरनगर और हापुड़ में तो बुरा हाल है. सैकड़ों बच्चों को जेल में डाल दिया गया है. इन बच्चो के लिए हम मांग उठाने वाले हैं.

भीम आर्मी के सदस्यों की सभी जिलों में मीटिंग्स चल रही है. हमारे पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार मीटिंग कर रहे हैं. बहुत बड़ी संख्या में ये प्रोटेस्ट होने वाला है.

चंद्रशेखर रावण की तस्वीर

चंद्रशेखर रावण की तस्वीर

फ़र्स्टपोस्ट- चंद्रशेखर आजाद पर रासुका लगा है. इसको लेकर आप कोर्ट में केस लड़िए. सड़कों पर उतरने की क्या जरूरत है. आपकी नाराजगी की वजह क्या है?

मंजीत नौटियाल- यहां के प्रशासन ने चंद्रशेखर आजाद पर 27 मुकदमें दर्ज करवाए थे. हाईकोर्ट ने उन सब मुकदमों में जमानत दे दी. लेकिन प्रशासन ने एनएसए लगा दिया. हमने एनएसए के लिए बेल एप्लीकेशन डाली थी. हमने सवाल पूछा था कि आखिर किस आधार पर चंद्रशेखर पर एनएसए लगाया गया है. एक व्यक्ति अपनी कम्यूनिटी के लोगों को शांत करता है, उन्हें समझाता है और बवाल होने से बचा लेता है और उस व्यक्ति पर जानबूझकर एनएसए लगा दिया गया. ये बहुत गलत है. सरकारी मशीनरी के प्रेशर की वजह से हमारी एनएसए की बेल हाईकोर्ट से भी खारिज हो गई. लेकिन हमलोगों ने हिम्मत नहीं हारी है. हमने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई है.

आपको भरोसा नहीं होगा कि हाईकोर्ट के जज कह रहे हैं कि हम चंद्रशेखर आजाद की बेल नामंजूर करने को मजबूर हैं. ये लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है. जज ये कह रहे हैं कि हमारे ऊपर सरकार का इतना प्रेशर है कि हम एक निर्दोष व्यक्ति को छोड़ने के लिए भी स्वतंत्र नहीं हैं.

फ़र्स्टपोस्ट- 2 अप्रैल को दलितों के विरोध प्रदर्शन में हिंसा हुई, कई जगहों पर आगजनी की गई, बसें फूंकी गई. भीम आर्मी पर आरोप है कि उसके सदस्य इन सबमें शामिल थे. आप इन सबको कैसे जायज ठहरा सकते हैं?

मंजीत नौटियाल- बहुजन समाज के लोगों ने 2 अप्रैल को ये सिद्ध कर दिया कि जो भी संविधान को या संविधान में दिए गए हमारे अधिकारों को हाथ लगाने की कोशिश करेगा तो हम समय-समय पर आंदोलन करते रहेंगे. सबको पता चल गया कि दलित संगठन समाज में मजबूत हैं.

यूपी में प्रदर्शन करने वाले 11 लोगों के खिलाफ इन लोगों ने एनएसए लगा दिया. कई बच्चों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगा है. गैंगस्टर तो गुंडा एक्ट होती है, जो गुंडों पर लगती है लेकिन हमारे जो पढ़े लिखे बच्चे हैं उन पर ये एक्ट लगा दिया. इसलिए हम कहते हैं कि ये कानून का उल्लंघन हैं, लोकतंत्र खतरे में है.

फ़र्स्टपोस्ट- अगर आपके साथ नाइंसाफी हो रही है तो आप दलित नेतृत्व करने वाले या दलित राजनेताओं के सामने अपनी समस्या क्यों नहीं रखते. क्या मायावती की तरह दलित नेता या रामविलास पासवान जैसे सरकार में शामिल दलित नेता आपकी बात नहीं सुन रहे?

मंजीत नौटियाल- इस चीज को बड़े पैमाने पर समझने की आवश्यकता है. हमलोग जाति-धर्म पर भरोसा नहीं करते हैं. जिस किसी के साथ भी अन्याय-अत्याचार हो रहा है, वो किसी भी कम्यूनिटी का हो भीम आर्मी उनके साथ खड़ी होगी. इस देश के नेताओं के शर्म आनी चाहिए कि दलित समुदाय का एक संगठन इतने बड़े स्तर पर समाज के लिए जंग लड़ रहा है और जो व्यक्ति बाबा साहेब की बदौलत आरक्षण की सुविधा पाकर संसद में बैठे हैं उन्हें हमारी आवाज भी सुनाई नहीं पड़ रही है. उन्हें हमारी तकलीफ दिखाई नहीं दे रही है. हम अराजनीतिक लोग हैं और अराजनीतिक तरीके से ही ये संघर्ष आगे भी जारी रखेंगे. हमारा राजनेताओं से कोई संबंध नहीं है.

Dalit Maratha Clash

फ़र्स्टपोस्ट- क्या आपके कहने का मतलब ये है कि आज का दलित नेतृत्व या राजनीतिक दलों में दलित चेहरे अपने समुदाय की समस्याओं को खत्म करने में नाकाम साबित हो रहे हैं. वो अपने समाज की तकलीफों को समझ नहीं पा रहे हैं?

मंजीत नौटियाल- देखिए. अगर दलित समाज का एक व्यक्ति अपनी कम्यूनिटी की आवाज को उठाता है तो उसे जेल में ठूंस दिया जाता है. हमारा नेता चंद्रशेखर आजाद 14 महीनों से जेल में बंद है. जिन नेताओं को दलित समाज ने बनाया है, जिन्हें दलित समाज ने संसद में भेजा है, कम से कम उन नेताओं को दिखना चाहिए कि हमारे समाज का एक व्यक्ति इतने दिनों से जेल में है. जिसका एक संगठन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है, जिसका संगठन प्रदेश स्तर तक में मौजूद है. उसके समर्थन में आवाज उठाई जानी चाहिए कि एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन क्यों हो रहा है? अगर आज वो नेता हमारी हालत नहीं देख रहे हैं तो आने वाले समय में हमारा समाज उन्हें जवाब दे देगा.

फ़र्स्टपोस्ट- एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई नरमी के खिलाफ आपने 2 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन किया था. अब सरकार एक्ट को अपने मूल स्वरूप में लाने के लिए संसद में बिल लेकर आ रही है. उम्मीद है इसी सत्र में बिल पास भी हो जाएगा. उसके बाद एक्ट अपने पुराने फॉर्म में आ जाएगा. सरकार के इस कदम के बाद क्या आपका सरकार और बीजेपी के खिलाफ विरोध कम होगा?

मंजीत नौटियाल- बीजेपी के प्रति हमारा रुख साफ है. इन्होंने दलितों के बीच एक समस्या थोड़े ही पैदा की है. इन्होंने दलित समाज के भीतर एक हजार समस्याएं पैदा कर दी है. हमें दलित होने के नाम पर पीटा जा रहा है, हम जूते नहीं पहन सकते, शादियों में घोड़ी नहीं चढ़ सकते, दलितों को मूंछ रखने पर पीटा जाता है.

अब आप देखिए कि बरसात का मौसम चल रहा है. सबसे बड़ी पीड़ा है कि जो दलित समाज के लोग हैं, वो कच्चे मकानों में रहते हैं. इस मौसम में हर दिन दलितों के पचास घर रोज गिर रहे हैं. इस ओर देखने वाला कोई नहीं है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि हम गरीबों के लिए आवास बना रहे हैं. लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. ये सबूत है कि दलितों के साथ कितना अन्याय कितना उत्पीड़न हो रहा है.

एससी-एसटी एक्ट पर फैसला लेकर अच्छा तो किया है लेकिन वो एक हजार जुल्म और ढाए हुए हैं दलितों पर. तो बीजेपी के लिए हमारा विरोध ही रहेगा.

फ़र्स्टपोस्ट- कुछ महीनों पहले तक भीम आर्मी की बड़ी चर्चा रहा करती थी. क्या अब भीम आर्मी का फैलाव-विस्तार कम हुआ है?

मंजीत नौटियाल- बीजेपी सरकार ने ये तय कर रखा है कि कहीं भी भीम आर्मी का कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होने दिया जाएगा. भीम आर्मी का कार्यक्रम नहीं होगा तो हमारी बात देश दुनिया तक नहीं पहुंच पाएगी. लेकिन हमने इसका तोड़ निकालने के लिए ये निर्णय किया है कि हम जमीनी स्तर पर गांव-गांव तक जाकर अपने लोगों के लिए काम करेंगे. आप किसी दलित बहुल इलाके में चले जाइए लोग बता देंगे कि यहां भीम आर्मी आकर काम कर रही है. इसका नतीजा 19 अगस्त को हम दिखाने वाले हैं.

भीम पाठशाला में पढ़ते बच्चे

भीम पाठशाला में पढ़ते बच्चे

फ़र्स्टपोस्ट- भीम आर्मी की अपने समाज के लिए किए जा रहे सामाजिक कार्यों की वजह से भी खूब चर्चा हो रही थी. भीम पाठशालाओं ने मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. क्या अब इन सबसे आपलोगों ने मुंह मोड़ लिया है?

मंजीत नौटियाल- पाठशालाएं अभी भी पहले की तरह चल रही हैं. लेकिन हमारी लिए रोज नई समस्या सामने आ रही है. हमारे समाज को इतना दबाया-कुचला जाता है कि हम लोग उस तरफ कुछ ज्यादा व्यस्त रहते हैं. एक दिशा में हमें बहुत तेजी से आगे जाने का वक्त नहीं मिल रहा है, इसलिए हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं. पहले हमने सोचा था कि भीम पाठशालाएं बड़ी तेजी से हर गांव में खोली जाएं, हम ऐसा कर भी रहे थे. लेकिन हमारे समाज में चल रही बाकी मुश्किलों की वजह से हमारा ध्यान थोड़ा भटकता भी है.

फ़र्स्टपोस्ट- सहारनपुर के आपके प्रदेश अध्यक्ष कमल वालिया के भाई की संदिग्ध मौत ने संगठन पर असर डाला है. संगठन पर कई तरह के आरोप लगे. आपके संगठन का अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया?

मंजीत नौटियाल- ये बीजेपी की बहुत बड़ी साजिश थी. जो हत्या हुई है, उसमें बीजेपी ये दिखाना चाहती थी कि कहीं न कहीं भीम आर्मी के ही किसी एक शख्स को टारगेट किया जाए. इससे बहुजन समाज भड़क जाएगा और उसके भड़कने से लोग सड़कों पर उतरगें. आगजनी होगी, तोड़फोड़ होगी. लेकिन हमलोगों ने उनकी साजिश कामयाब नहीं होने दी. हमने कहा कि कोई भी दंगा नहीं होने दिया जाएगा. जो भी इसके पीछे हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, उन्हें जेल भेजा जाएगा. जिन लोगों ने भी गोली चलाई और जिन लोगों से गोली चली वो जेल में हैं. अभी तक केस की सच्चाई सामने आना बाकी है.

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