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नोटबंदी का असर, छुट्टे गिन रहे हैं करोड़पति अथॉरिटी

देशभर के रजिस्ट्री ऑफिसों में सन्नाटा पसरा हुआ है.

Updated On: Nov 20, 2016 01:52 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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नोटबंदी का असर, छुट्टे गिन रहे हैं करोड़पति अथॉरिटी

पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद देशभर के रजिस्ट्री ऑफिसों में सन्नाटा पसरा हुआ है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा के ऑफिसों का हाल भी यही है. नोएडा के सेक्टर 33 के रजिस्ट्री ऑफिस में 9 तारीख से ही रजिस्ट्री कराने वालों की भारी कमी है. जिस रजिस्ट्री ऑफिस में रोजाना लगभग 1300 रजिस्ट्रियां होती थी, वहां अब 20 से 50 रजिस्ट्री हो रही है.

सरकार को रजिस्ट्रेशन और मकान रजिस्ट्री से करोड़ो का राजस्व प्राप्त होता है. सिर्फ नोएडा और ग्रेटर नोएडा का ही बात करें तो, जहां मकान, दुकान, ऑफिस और शादी के रजिस्ट्रेशन और रजिस्ट्री से सरकार को रोजाना 5 करोड़ की आमदनी होती थी, जो अब 25 हजार रुपए पर सिमट गई है.

पिछले महीने तक नोएडा रजिस्ट्री ऑफिस में प्रत्येक महीने लगभग 3250 रजिस्ट्री होती थीं. जिससे सरकार को हर महीने लगभग सौ करोड़ 25 लाख के राजस्व की आमदनी होती थी.

रजिस्ट्री ऑफिस में रोजाना बैनामा (सेल डीडी या ट्रांसफर डीड), किरायानामा, शादी का पंजीकरण या वसीयतनामा जैसे कामों के लिए अधिक से अधिक 20 हजार रुपए की फीस ली जाती है. वसीयतनामा की रजिस्ट्रेशन फीस 500 रुपए है, पर खुदरे पैसे नहीं होने की वजह से लोग नहीं आ रहे हैं.

हमनें गौतम बुद्ध जिले के छह रजिस्ट्री ऑफिसों की पड़ताल की. आंकड़े बताते हैं कि रजिस्ट्री में कमी आई है...

नोएडा सेक्टर 33 रजिस्ट्री ऑफिस 1

 

नोएडा सेक्टर 33 रजिस्ट्री ऑफिस 2

 

नोएडा सेक्टर 33 रजिस्ट्री ऑफिस 3

 

सदरग्रेटर नोएडा दादरी जेवर
दिनांक-08-11.2016

 

80

 

52 55 84 61 09
दिनांक-09-11.2016

 

20 20 16 19 16 14
दिनांक-10-11.2016

 

06 NILL NILL 26 09 03
 

स्टांप वेंडर बेहाल

यही हाल स्टांप वेंडरों का भी है. खुदरे पैसों की कमी की वजह से स्टांप वेंडरों का भी कारोबार चौपट हो गया है. नोएडा के सेक्टर 6 के एक स्टांप विक्रेता समझाते हुए कहते हैं कि कोई व्यक्ति 40 लाख का मकान खरीदना चाहता है तो उसको कुल कीमत का 5 प्रतिशत स्टांप खरीदना पड़ेगा. यानि दो लाख का स्टांप. इस स्टांप पर 20 हजार का रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता है. यानि आपको 40 लाख का मकान खरीदने के लिए 2 लाख 20 हजार रुपए हर हालत में देने ही देने हैं, पर लोग कहां से देंगे?  दो लाख 20 हजार रजिस्ट्री ऑफिस का व्हाइट मनी है. लेकिन खरीददार को और भी कई फीसों के रूप में पैसे बाबुओं को चढ़ाने पड़ते हैं.

नोएडा सेक्टर 33 स्थित सब रजिस्ट्रार ऑफिस के एक कर्मचारी कहते हैं कि, ‘एक व्यक्ति अमेरिका से दो मकानों की रजिस्ट्री के लिए आया था. 4200 रुपए रिजस्ट्रेशन शुल्क जमा करना था, लेकिन उसके पास 500 और हजार के नोट थे, इसलिए बिना रजिस्ट्री उसे लौटना पड़ा.’

ऐसा नहीं है कि रजिस्ट्री ऑफिस में आकर लौटने वालों को ये बातें मालूम नहीं है कि वहां जाने के बाद रजिस्ट्री होने में दिक्कत होगी. लोग ये जानने के बाद भी जुगाड़ की तलाश में एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में चक्कर लगाते-लगाते थक जाते हैं, और अंत में निराश हो वापस चले जाते हैं.

कई लोग बड़े-बड़े नोटों के साथ रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचते हैं पर उनको कार्यालय महानिदेशक निबंधन, उत्तरप्रदेश का शासनादेश जारी होने की बात बताई जाती है. इसमें लिखा गया है कि 500 और 1000 के नोट मुद्रा निबंधन शुल्क के लिए स्वीकार नहीं होंगे.

aadesh

रियल स्टेट का कारोबार बहुद हद तक नकदी पर आधारित होता है. प्रधानमंत्री मोदी की काले कारोबारियों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रियल स्टेट कारोबारियों में भी हड़कंप मची हुई है. रियल स्टेट की हालत 2012-13 से पतली थी, और अब तो इससे और भी पतली होने की आशंका बढ़ गई है.

बायर्स एसोसिएशन नोएडा एक्सटेंशन के प्रेसिडेंट अन्नू खान कहते हैं कि प्रधानमंत्री का कदम सराहनीय है लेकिन रियल स्टेट पर खास असर नहीं पड़ेगा. बल्कि जो नए फ्लैट बायर्स हैं, उनके लिए बहुत अच्छा मौका रहेगा. प्रॉपर्टी का रेट डाउन रहेगा और बिल्डर बेचना चाहेगा. आने वाला समय नए खरीदारों के लिए अच्छा समय साबित होने वाला है. जो पुराने बायर्स हैं उनको भी कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि उन्होंने लगभग 95 प्रतिशत पैसे बिल्डर को दे रखे हैं. ये वे पैसे हैं जो नंबर वन के हैं.

जानकारों का कहना है कि मोदी सरकार के मास्टर स्ट्रोक के बाद रियल स्टेट की हालात सुधरने में अगले पांच से सात महीनों तक का वक्त लगेगा. देश के बड़े-बड़े रियल स्टेट कारोबारी को अब इंतजार होगा नए बायर्स का, जो इनकी पहले से चरमराई आर्थिक स्थिति को औऱ चरमारने से बचाए.

 

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