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‘अधिकतम सरकार और शून्य शासन’ का उदाहरण है कैबिनेट विस्तार: कांग्रेस

कांग्रेस ने मंत्रियों की आयु को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी कैबिनेट ‘सीनियर सिटीजन क्लब’ बन गई है

Bhasha Updated On: Sep 03, 2017 07:27 PM IST

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‘अधिकतम सरकार और शून्य शासन’ का उदाहरण है कैबिनेट विस्तार: कांग्रेस

कांग्रेस ने रविवार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में हुए विस्तार और फेरबदल को ‘अधिकतम सरकार और शून्य शासन’ करार दिया. कांग्रेस ने कहा कि इसमें चार नौकरशाहों को स्थान दिए जाने से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने राजनीतिक सहयोगियों की क्षमता पर कोई भरोसा नहीं है.

कांग्रेस ने मंत्रिपरिषद में रविवार शामिल किए गए मंत्रियों की आयु को लेकर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी कैबिनेट ‘सीनियर सिटीजन क्लब’ बन गई है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मंत्रिपरिषद के फेरबदल को निरर्थक बताया. उन्होंने ट्वीट कर कहा, कैबिनेट फेरबदल उम्मीदों पर पानी फेरने वाला निकला. यह निरर्थक और दृष्टिविहीन है जिससे सुशासन का उद्देश्य बुरी तरह विफल हुआ है.

उन्होंने मंत्रिपरिषद विस्तार में जेडीयू के शामिल नहीं होने पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, ‘जेडीयू और बीजेपी के बीच नया मेल-मिलाप विफल साबित हुआ क्योंकि जेडीयू स्थान पाने में कामयाब नहीं रहा.’

‘सीनियर सिटीजन क्लब’ है मोदी कैबिनेट

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि 1.24 अरब की आबादी वाले जिस देश में औसत आयु 27 साल हो वहां मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए नए मंत्रियों की औसत आयु 60.44 वर्ष है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर तो युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लच्छेदार भाषण देते हैं, वहीं उनका मंत्रिमंडल ‘सीनियर सिटीजन क्लब’ बन गया है.

उन्होंने कहा कि सबसे आश्चर्यजनक है कि कर्नाटक के अनंत कुमार हेगड़े को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाना है. उन्होंने कहा कि एक वीडियो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है जिसमें हेगड़े को उत्तरी कर्नाटक के कारवार के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों को कथित रूप से पीटते हुए दिखाया गया है.

उन्होंने कहा, ‘हेगड़े का सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकरण करने के प्रयास करने का पुराना रिकार्ड रहा है. उन्हें सरकार में शामिल करने से यह स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी कर्नाटक में सांप्रदायिकता फैलाना चाहती है.’

मनीष तिवारी ने कहा कि इस मंत्रिमंडल विस्तार से यह भी पता चलता है कि इस बारे में निर्णय लेने में प्रधानमंत्री मोदी कहीं नहीं हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भारत के प्रधानमंत्री हों.

उन्होंने कहा कि चार नौकरशाहों को मंत्रिपरिषद में स्थान देने का स्पष्ट अर्थ है कि प्रधानमंत्री को बीजेपी और अपने राजनीतिक सहयोगियों की काबिलियत पर कोई भरोसा नहीं रह गया है. इसीलिए नौकरशाहों को जगह दी गई है. इनमें से दो (हरदीप सिंह पुरी और अल्फांसो कन्नथम) तो सांसद भी नहीं हैं.

राजीव प्रताप रूडी और कलराज मिश्र को मंत्री के तौर पर हटाए जाने को लेकर तिवारी ने कहा कि इससे मोदी सरकार की ‘भारी विफलता’ परिलक्षित होती है.

उन्होंने कहा कि रविवार के मंत्रिपरिषद में हुए विस्तार और फेरबदल का एक ही संदेश है, ‘अधिकतम सरकार शून्य शासन.’ कांग्रेस नेता ने निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी का दर्जा बढ़ाए जाने को महज प्रतीकात्मक बताते हुए यह उम्मीद जताई कि जिस प्रकार निर्मला सीतारमण के कार्यकाल में देश के आयात-निर्यात में लगातार गिरावट आई है, वैसी ही तस्वीर रक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में न बने.

मोदी मंत्रिपरिषद में रविवार निर्मला सीतारमण, मुख्तार अब्बास नकवी, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान का दर्जा बढ़ाते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. इसके अलावा नौ राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली. इनमें अनंत कुमार हेगड़े, सत्यपाल सिंह, आर के सिंह, वीरेन्द्र कुमार, हरदीप सिंह पुरी, अल्फांसो कन्नाथम, शिव प्रताप शुक्‍ला, अश्‍विनी कुमार चौबे, गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल हैं.

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