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क्या अपनी ही सरकार को झूठे वादों और जुमलों का बता रहे हैं नितिन गडकरी?

कांग्रेस ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें नितिन गडकरी सत्ता पाने के लिए बड़े-बड़े वादे करने की बात को स्वीकार कर रहे हैं

Updated On: Oct 09, 2018 10:48 AM IST

FP Staff

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क्या अपनी ही सरकार को झूठे वादों और जुमलों का बता रहे हैं नितिन गडकरी?

कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर से बातचीत कर रहे हैं. यह एक मराठी शो का वीडियो है और चर्चा भी मराठी में ही हो रही है. कांग्रेस ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इस बात से सहमत होते हुए देख अच्छा लग रहा है कि मोदी सरकार झूठे वादों और जुमलों की बुनियाद पर खड़ी हुई है.

कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए सीधे यह कहा है कि नितिन गडकरी ये बातें मोदी सरकार के लिए कह रहे हैं लेकिन वीडियो को देखकर लग रहा है कि उन्होंने यह सब महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के लिए कहा है. अगर ये बातें गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार के लिए भी कहीं हैं तो भी क्या यह बीजेपी के मंशा पर सवाल नहीं उठाता?

क्या कहा है वीडियो में नितिन गडकरी ने

नितिन गडकरी इस वीडियो में कह रहे हैं कि हमें पूरा विश्वास था कि हम सत्ता में नहीं आने वाले हैं. इसके बाद हमारे कुछ लोगों ने सलाह दी कि बड़े-बड़े वादे करो. यदि हम सत्ता में नहीं आते हैं तो इसके लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनेगी.

आगे गडकरी कहते हैं, लेकिन हुआ इसके उलट, लोगों ने हमें वोट किया और हमने सत्ता पा ली. अब लोग हमें किए गए वादे याद दिलाते हैं और कहते हैं कि फलाने तारीख को गडकरी ने यह कहा, फडणवीस ने यह कहा लेकिन वादे पूरा नहीं हो रहे हैं. गडकरी कह रहे हैं... अब जब लोग ऐसा कहते हैं तो हम हंसते हैं और आगे बढ़ जाते हैं.

इससे पहले आरक्षण पर दिया था बयान

इससे पहले भी नितिन गडकरी ने रोजगार को लेकर बयान दिया था जिससे सरकार की किरकिरी हुई थी. गडकरी ने यह बयान तब दिया था जब सरकार के दो मंत्रियों ने कहा था कि देश में रोजगार की कोई कमी नहीं है.

मराठा आंदोलन पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा था कि केवल आरक्षण से क्या होगा? आरक्षण कोई रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं. आरक्षण तो एक 'सोच' है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें.

उन्होंने कहा, 'मान लीजिए कि आरक्षण दे दिया जाता है. लेकिन नौकरियां नहीं हैं. क्योंकि बैंक में आईटी (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) के कारण नौकरियां कम हुई हैं. सरकारी भर्ती रूकी हुई है. नौकरियां कहां हैं?'

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