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सॉफ्ट हिंदुत्व की राह चल रही कांग्रेस को मुस्लिमों के लिए नजरिया बदलना चाहिए

राहुल गांधी का साफ्ट हिंदुत्व भले ही कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचा रहा है लेकिन पार्टी के भीतर यह बहस का विषय है. कई लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बीजेपी की लाइन पर चलने से क्या हासिल हो रहा है?

Updated On: Dec 26, 2018 09:29 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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सॉफ्ट हिंदुत्व की राह चल रही कांग्रेस को मुस्लिमों के लिए नजरिया बदलना चाहिए

हिंदी पट्टी के कांग्रेस के शासन वाले तीन राज्यों में मंत्रिपरिषद का विस्तार किया गया है. जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक-एक मुस्लिम मंत्री बनाए गए हैं. हालांकि उम्मीद की जा रही थी कि छत्तीसगढ़ को छोड़कर बाकी दोनों राज्यों में कम से कम 2 मुस्लिम मंत्री बनाए जाएंगे.

राजस्थान में जाहिदा खान के समर्थकों ने प्रदर्शन किया है. हालांकि कांग्रेस की तरफ से कहा जा रहा है कि सभी को समायोजित करने की कोशिश की गई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अब किस तरह एडजस्ट किया जाएगा. जबकि मुस्लिम समाज की तरफ से दावा किया जा रहा है कि उन्होंने चुनाव में एकमुश्त कांग्रेस का समर्थन किया है. हालांकि कांग्रेस की मजबूरी है कि वो 2019 से पहले एक बार फिर मुस्लिमपरस्त होने का आरोप नहीं झेलना चाहती.

कांग्रेस की उचित दूरी

कांग्रेस मुस्लिम समाज से उचित दूरी बनाए रखना चाहती है. कांग्रेस ने बीजेपी के तर्ज पर ही राजस्थान में एक मंत्री बनाया है. जबकि कांग्रेस के कई मुस्लिम विधायक राजस्थान में जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं. इस तरह मध्य प्रदेश में भी सिर्फ एक मुस्लिम को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. जबकि राजपूत समाज के 8 विधायकों को मंत्री बनाया गया है. हालांकि मध्य प्रदेश में मुस्लिम आबादी 7 प्रतिशत के करीब है लेकिन कांग्रेस को लग रहा था कि उन्हें ज्यादा टिकट देने से बीजेपी को फायदा हो सकता है.

छत्तीसगढ़ अपवाद है क्योंकि यहां एक ही मुस्लिम जीतकर विधानसभा पहुंचा है. इस मायने मे कांग्रेस बीजेपी से बीस है. कांग्रेस इस बात पर ही पीठ ठोक रही है. यह बात दीगर है कि कांग्रेस को बीजेपी से अधिक संख्या में मुस्लिम वोट मिलता रहा है.

मतगणना में निर्णायक बढ़त मिलने के बाद दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के दफ्तर पर जश्न मनाते कार्यकर्ता

हाल में हिंदी पट्टी के 3 राज्यों में हुए चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी से सत्ता छीन ली है (फोटो: पीटीआई)

2019 का अहम चुनाव

बीजेपी इस बात पर लगातार विवाद पैदा करने की कोशिश करती है, कि कांग्रेस मुस्लिमपरस्त पार्टी है. बीजेपी के कई प्रवक्ता इसे लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाते रहे हैं. कांग्रेस इस वार से लगातार बचने की कोशिश करती रही है. 2014 के बाद बीजेपी के इस तरह के हमले तेज हुए हैं. कांग्रेस को लगातार चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है. मुस्लिम बहुल असम में भी कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो गई लेकिन इन 3 राज्यों के नतीजों से कांग्रेस के लिए राहत की खबर है. कांग्रेस नहीं चाहती है कि इस बार भी बीजेपी के ट्रैप में फंस कर रह जाए, इसलिए एहतियात बरत रही है. कांग्रेस ने बीजेपी के हिंदुत्व के सामने 'गुड हिंदू' का थ्योरी पेश किया है.

राहुल गांधी का साफ्ट हिंदुत्व

राहुल गांधी ने राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी कि हिंदू होने का मतलब उनसे सीख सकते हैं. हालांकि चुनौती प्रधानमंत्री को थी लेकिन जवाब सुषमा स्वराज ने दिया कि अब इतने बुरे दिन नहीं आए हैं कि राहुल गांधी से सीख लेनी पड़े. लेकिन बीजेपी की बेचैनी से लग रहा है कि राहुल गांधी बीजेपी को इस मसले पर बराबरी पर ले आए हैं. इससे पहले हिंदुत्व बीजेपी का ऐसा हथियार रहा है जिसकि कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं था. राहुल गांधी का 'गुड हिंदू' बीजेपी के हिंदुत्व पर भारी पड़ रहा है. हालांकि कांग्रेस समझ रही है कि उसने बीजेपी को घेर तो लिया है लेकिन इस मुद्दे पर मात देना मुश्किल है.

कांग्रेस की मुस्लिम कशमकश

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी साफ्ट हिंदुत्व के जरिए बीजेपी की पोल खोलने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इससे मुस्लिम समाज को ऐतराज नहीं है. राहुल के मानसरोवर यात्रा से कोई नाखुश नहीं है. एतराज इस बात को लेकर है जब मुस्लिम को राजनीतिक हिस्सेदारी देने की बात आती है तो कांग्रेस सेक्युलरवाद के आड़ में छिपने की कोशिश करती है.

कहा जाता है कि सबको समायोजित करने की वजह से मुस्लिम समाज को हिस्सा नहीं दिया गया है. जबकि राजस्थान में मेव समाज काफी पिछड़ा है. पहलू खान की लिंचिंग सबको याद है, अगर वहां से कोई मंत्री बनता तो इस समाज और इलाके का विकास होता लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. इस तरह मध्य प्रदेश में 15 साल बाद पार्टी की सत्ता में वापसी हुई है. लेकिन कांग्रेस की रणनीति में यहां भी मुस्लिम फिट नहीं बैठ रहा है.

muslim voters

मुस्लिमों को कांग्रेस का परंपरागत वोटर माना जाता है

2019 का अहम चुनाव

2019 का चुनाव कांग्रेस के लिए अहम है. मुस्लिम भी कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं. लेकिन कांग्रेस सिर्फ राजनीतिक नफे (फायदा) के बारे में सोच रही है. कांग्रेस को लग रहा है कि ज्यादा राजनीतिक हिस्सेदारी देने से पार्टी को नुकसान हो सकता है. ऐसे में इस तरह की रणनीति से काम लिया जा रहा है. लेकिन इससे भी कांग्रेस का राजनीतिक घाटा हो रहा है. क्षेत्रीय पार्टियों की ताकत बढ़ रही है. असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोग इस कांग्रेसी रणनीति का फायदा उठा रहे हैं. तेलंगाना के नतीजे इसके ताजा उदाहरण हैं जहां कांग्रेस की फिजा एक लम्हे में खत्म हो गई और टीआरएस पहले से मजबूत हुई है.

कांग्रेस के भीतर ऊहापोह

राहुल गांधी का साफ्ट हिंदुत्व भले ही कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचा रहा है लेकिन पार्टी के भीतर यह बहस का विषय है. कई लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बीजेपी की लाइन पर चलने से क्या हासिल हो रहा है? बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो चाहते हैं कि कांग्रेस को नेहरूवाद पर चलना चाहिए. देश के सामने इतने मुद्दे हैं कि इस तरह की राजनीति की आवश्यकता नहीं है. बल्कि कांग्रेस को अपने कोर विचारधारा पर टिका रहना चाहिए. जो लाइन राइटिस्ट और लेफ्टिस्ट के बीच की है. किसी तरफ ज्यादा झुकाव कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है.

1992 के बाद दूर हुआ मुस्लिम

मुस्लिम समाज कांग्रेस के साथ 1992 तक खड़ा रहा है. दक्षिण में आज भी कमोवेश यही स्थिति रही है. लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों के उदय से मुस्लिम और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ी है. 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद एसपी, बीएसपी, टीएमसी और आरजेडी जैसी पार्टियों का तेजी से उभार हुआ है. वहीं दक्षिण में टीआरएस, टीडीपी, डीएमके जैसी पार्टियों को समर्थन मिला है. यह सिर्फ राजनीतिक हिस्सेदारी न देने के कारण हुआ है. क्षेत्रीय पार्टियों ने स्थानीय हालात के हिसाब से राजनीति की है. कांग्रेस अपने हिसाब से चल रही है.

यूपीए सरकार में कम नुमाइंदगी

यूपीए-1 की सरकार में ज्यादातर मुस्लिम मंत्री सहयोगी दलों से थे. कांग्रेस के केवल 1 मंत्री थे, ए आर अंतुले लेकिन मुबंई हमले के बाद हेमंत करकरे पर बयान देने के बाद उनको हटा दिया गया था. यूपीए के दूसरे कार्यकाल में आखिरी दौर में 3 मंत्री बने गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद और के रहमान खान. बताने की शायद जरूरत हो कि कोई मुस्लिम पॉलिटिक्स से इन लोगों का कोई वास्ता रहा है. इन लोगों से ज्यादा अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह मुस्लिम मसायल (मुद्दे) उठाते रहे हैं.

2019 चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजपी ने दिसंबर के महीने में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 3 रथयात्रा निकालने की योजना थी

बीजेपी शुरू से कांग्रेस पार्टी पर मुस्लिमपरस्ती की राजनीति करने का आऱोप लगाती रही है

कांग्रेस को नजरिया बदलना चाहिए

कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय के लिए नजरिया बदलना चाहिए. मुस्लिम इस तरह ही समाज का हिस्सा हैं, जिस तरह बाकी लोग है. मजहब के बुनियादी सवाल के इतर मुस्लिमों के मसले पेचीदा हैं. पढ़ाई, रोजगार, मकान यह सब बुनियादी सवाल वैसे ही हैं. मुस्लिम को रिजर्वेशन का लाभ नहीं मिला है इसलिए इनके हालात बदतर हैं. कांग्रेस को नया नजरिए से इस समाज को देखने की जरूरत है.

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