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मोदी का मुकाबला करने के लिए बड़े स्तर के गठबंधन पर काम कर रही है कांग्रेस: सूत्र

कांग्रेस की भूमिका सभी विपक्षी दलों को साझा मंच मुहैया कराने और बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ उन्हें एकजुट करने की होगी

Updated On: Aug 04, 2018 12:08 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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मोदी का मुकाबला करने के लिए बड़े स्तर के गठबंधन पर काम कर रही है कांग्रेस: सूत्र

अगर कांग्रेस का गठबंधन दांव ठीक से चल गया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में वापसी का दूसरा मौका नहीं मिलेगा. यह कहना है शीर्ष पार्टी के एक उच्च पदस्थ सूत्र का. 'कांग्रेस राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब में काफी बेहतर प्रदर्शन करने जा रही है, जबकि बीजेपी को उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. यह मुमकिन होगा राज्यों में कांग्रेस के गठजोड़ से.'

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, 'अगर हम तीन राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में सही तरीके से गठबंधन कर लेते हैं, तो मोदी दूसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले.' कांग्रेस के एक शीर्ष सूत्र ने कहा, 'वह तभी प्रधानमंत्री बन सकेंगे अगर बीजेपी अकेले 230 से 240 सीटें जीतती है.' कांग्रेस की गठबंधन रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन की तैयारी चल रही है.

कांग्रेस की गठबंधन की रणनीति

- समान विचारधारा और वैचारिक रूप से समान दलों के बीच समन्वय होना आवश्यक है, और कांग्रेस केवल इस तरह के दलों के साथ गठबंधन करेगी.

- आरजेडी के साथ पहले से ही गठबंधन रखने वाली कांग्रेस बिहार में अन्य दलों से गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत कर रही है.

- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में, कांग्रेस को अभी फैसला करना है कि बीएसपी के साथ गठबंधन किया जाए या नहीं. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राज्य इकाइयों- प्रदेश कांग्रेस समिति (पीसीसी) की सलाह के आधार पर गठबंधन पर अंतिम फैसला करेगा.

- पार्टी की अल्पकालिक रणनीति गठबंधन के साथ चुनाव में उतरने की है. हालांकि वैचारिक भिन्नता के कारण शिवसेना के साथ गठबंधन की संभावना नहीं है.

- कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन पर सहमति के अंतिम चरण में है.

सूत्रों ने बताया कि 'एसपी-बीएसपी के साथ गठबंधन और सीट साझा करने के बारे में हमारी चर्चा अंतिम दौर में है. बिहार में लालू प्रसाद की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पहले से ही हमारे साथ है और हम अन्य पार्टियों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं. कांग्रेस केवल उन पार्टियों के साथ गठबंधन करेगी जो हमारे जैसी समान विचारधारा और सोच रखते हैं.'

बीजेपी-आरएसएस की साझा रणनीति का मुकाबला

- बीजेपी-आरएसएस की साझा रणनीति का मुकाबला करने में कांग्रेस की भूमिका सभी विपक्षी दलों को साझा मंच मुहैया कराने और बीजेपी-आरएसएस के खिलाफ उन्हें एकजुट करने की होगी.

- पीएम मोदी और बीजेपी को हराने के लिए सभी गैर-बीजेपी विपक्षी दलों से हाथ मिलाएंगे और सबको एक साथ लाएंगे.

- पार्टी कैडर को सुदृढ़ करेंगे.

- मोदी सरकार की नोटबंदी, जीएसटी जैसी नीतियों के खिलाफ लोगों की प्रतिक्रिया/ नारागजी को आधार बनाकर अगले तीन से चार महीने में नए सिरे अभियान शुरू किया जाएगा.

- 2019 के चुनाव से पहले कुछ क्षेत्रों में मोदी सरकार की विफलताओं के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाया जाएगा.

- युवा, गरीब, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, महंगाई, छोटे व्यापारियों, मजदूरों आदि से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा.

- युवाओं को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर कांग्रेस का विजन पेश किया जाएगा. कांग्रेस विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव से पहले अपने कैडर को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

मोदी के आस-पास बनी अपराजेयता का मिथक तोड़ने की रणनीति

जमीनी स्तर पर बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत आरएसएस का कैडर है, जिसकी बूथ स्तर तक मौजूदगी है. 'हम आरएसएस जैसा कैडर बनाने के बजाय, कांग्रेस संगठन का काम संभालने वाले और इसे मजबूत करने के लिए समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं की एक निश्चित संख्या बनाना चाहते हैं.'

'आरएसएस का एकमात्र उद्देश्य सेना, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण सरकारी संगठनों पर व्यवस्थित तरीके से पकड़ बनाना है. इनकी मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसी राज्य सरकारों के विभिन्न निकायों द्वारा फंडिंग की जाती है. यह संस्थागत ढांचे के लिए खतरनाक है.' पार्टी के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में ऐसी व्यवस्था नहीं की जा सकती है.

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि बीजेपी ने मोदी के आसपास अपराजेयता का मिथक बनाया है और उन्हें सही गठजोड़ और रणनीति की मदद से पराजित किया जा सकता है. एक शीर्ष पार्टी सूत्र ने कहा, 'गरीबों, जनजातियों, दलितों, अल्पसंख्यकों, किसानों और छोटे कारोबारियों के एक बड़े वर्ग में मोदी की कुछ नीतियों को लेकर नाखुशी और परेशानी है. लोगों में जाहिर तौर पर गुस्सा है. प्रधानमंत्री द्वारा वादा की गई दो करोड़ नौकरियां उपलब्ध होने के बजाय, लोगों की बड़े पैमाने पर नौकरियां चली गईं. कांग्रेस इस नाराज तबके के गुस्से को दिशा देगी.'

सीडब्लूसी की दूसरी बैठक में मुद्दे

पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की शनिवार को होने वाली दूसरी बैठक में राफेल सौदे और नेशनल सिटिजन रजिस्टर के अलावा इन मुद्दों पर चर्चा होगी. 17 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा सीडब्ल्यूसी के पुनर्गठन के बाद यह दूसरी बैठक होगी. पहली बैठक 22 जुलाई को हुई थी.

अपनी पहली सीडब्ल्यूसी बैठक के दौरान, कांग्रेस ने 2019 में बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करने के लिए राहुल को अधिकृत किया था.

कांग्रेस 2019 के चुनावों के लिए पीएम मोदी की अगुवाई में एनडीए के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए पूरे देश में राज्यों के हिसाब से गठजोड़ों पर काम कर रही है. हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह में, पार्टी को अपनी बंगाल इकाई के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष का सामना करना पड़ा था, जहां राज्य नेतृत्व गठबंधन के विकल्पों पर बुरी तरह विभाजित था.

इसी प्रकार, राजस्थान में बीएसपी के साथ गठबंधन का मसला अटक गया था, जहां पार्टी के राजस्थान के नेताओं ने दृढ़ता से इस कदम का विरोध किया था.

कांग्रेस के सूत्र ने कहा कि 'गठजोड़ पर अंतिम निर्णय हमारी राज्य इकाइयों की प्रतिक्रिया और रिपोर्ट पर आधारित होगा. बीजेपी की विफलताओं को उठाने के बजाय कांग्रेस विभिन्न मुद्दों और क्षेत्रों पर अपना विजन पेश करेगी.'

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