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मोदी सरकार के मुंह पर तमाचा है सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा, 'मोदी जी ने बिना सोचे-समझे नोटबंदी की, फिर इसी तरह जीएसटी लागू कर दिया, राफेल खरीद लिया, आधार कानून को लेकर भी बिना सोचे-समझे कदम उठाया'

Updated On: Sep 26, 2018 08:24 PM IST

Bhasha

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मोदी सरकार के मुंह पर तमाचा है सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कांग्रेस

कांग्रेस ने आधार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि यह 'बीजेपी के मुंह पर तमाचा’ है. पार्टी ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार ने आधार कानून को 'निजी कंपनियों का अधिकार कानून' बना दिया था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा, 'यह बहुत बड़ी जीत है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं.'

उन्होंने कहा, 'मोदी जी ने बिना सोचे-समझे नोटबंदी की, फिर इसी तरह जीएसटी लागू कर दिया, राफेल खरीद लिया. आधार कानून को लेकर भी बिना सोचे-समझे कदम उठाया.' सिब्बल ने आरोप लगाया, 'यह आधार नहीं, सरकारी अधिकार कानून और निजी कंपनियों का अधिकार कानून बन गया. अगर वे उस वक्त हमारी बात मान लेते तो करोड़ों लोगों का डेटा निजी कंपनियों के पास नहीं जाता.'

कांग्रेस का आरोप- आधार बना गला घोंटू

उन्होंने कहा कि आधार विधयेक को धन विधेयक के तौर पर लाना असंवैधानिक ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र के खिलाफ फैसला था. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के आधार निर्णय ने कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए सवालों पर नागरिकों के ‘निजता के अधिकार’ को स्वीकार किया.'

उन्होंने कहा, 'कोर्ट ने मोदी सरकार के निजता का गला घोंटू धारा 57 को खारिज किया. अब सरकार आधार को बैंक खातों,मोबाइल फोन, स्कूल आदि से नहीं जोड़ सकेगी.' कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'यह बीजेपी के मुंह पर तमाचा है. जस्टिस सीकरी के फैसले ने आधार अधिनियम की धारा 57 को निरस्त कर दिया और कहा कि यह असंवैधानिक है. बायोमैट्रिक डेटा का व्यावसायिक उपयोग करने की योजना विफल हुई.'

सुप्रीम कोर्ट ने किया आधार पर फैसला

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है. और वह न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है.

इस निर्णय के अनुसार, आधार कार्ड/नंबर को बैंक खाते से जोड़ना अनिवार्य नहीं है. इसी तरह टेलीकॉम सेवा प्रदाता उपभोक्ताओं को अपने फोन से आधार नंबर को लिंक कराने के लिए नहीं कह सकते. पीठ ने कहा कि आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार अनिवार्य है.

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