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राहुल की गैरमौजूदगी में कांग्रेस को मनमोहन का सहारा

मनमोहन सिंह सबसे मशहूर अर्थशास्त्री हैं और पंजाब और देश के लिए उन्होंने सबकुछ किया है

Sanjay Singh Updated On: Jan 10, 2017 11:21 AM IST

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राहुल की गैरमौजूदगी में कांग्रेस को मनमोहन का सहारा

कांग्रेस पार्टी ने पंजाब चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र का एलान करने में राहुल गांधी के वापस आने का इंतजार नहीं किया. कांग्रेस उपाध्यक्ष नए साल का जश्न मनाने के लिए पिछले 10 दिन से विदेश में हैं. इस बात की भी कोई जानकारी नहीं है कि वह दुनिया के किस हिस्से में छुट्टियां बिता रहे हैं.

यह भी किसी को नहीं पता कि विदेश प्रवास से खुद को तरोताजा करने के बाद भारत में उनकी वापसी कब होगी.

पार्टी में हाहाकार, राहुल की मौजमस्ती बरकरार

पार्टी की चुनावी रणनीति, रणनीतिकारों, पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को उनकी बेशकीमती सलाह और दिशानिर्देश और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में पार्टी के चुनावी कैंपेन, सबकुछ उनके साल खत्म होने पर विदेशों की शानदार लोकेशनों पर मनाए जा रहे जश्न और पार्टियों से फारिग होने तक इंतजार कर सकते हैं. देश का आम नागरिक इस तरह की कीमती छुट्टियों की कल्पना भी नहीं कर सकता.

चूंकि कांग्रेस की ओर से उनके यात्रा कार्यक्रमों और मकसद को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है, ऐसे में हम यह मान कर चल रहे हैं कि वह विलासिता से सराबोर छुट्टियां मनाने गए हैं.

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राहुल गांधी नए साल के मौके पर छुट्टियां मनाने विदेश गए हुए हैं

यह पहला मौका नहीं है राज्यों में चुनावों का मौका हो और वह विदेश में छुट्टियां मनाने निकल गए हों. यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि वापस लौटने पर वह किस तरह से आम लोगों के मुद्दों को उठाते हैं. किसी को नहीं पता कि राहुल हैं कहां.

यह भी मजेदार है कि राहुल गांधी की गैरमौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेताओं ने शुरुआत में या तो इससे इनकार किया या इसे टाल दिया. लेकिन, 31 दिसंबर को राहुल गांधी के दफ्तर ने ट्विटर के जरिए साफ कर दिया कि वह विदेश की यात्रा पर हैं.

कैप्टन का फैसलाः बिना सेनापति लड़ेंगे जंग

कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में पंजाब कांग्रेस ने हालांकि, जरा हटकर फैसला लिया है. सिंह को अपने कैंपेन और चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए राहुल गांधी की जरूरत नहीं है. वह राहुल के आने का इंतजार नहीं कर सके और उन्होंने पार्टी के चुनाव घोषणापत्र को जारी कर दिया. साथ ही वह पार्टी नेतृत्व को यह समझाने में भी सफल रहे कि यह काम पार्टी के उपाध्यक्ष की गैरमौजूदगी और आशीर्वाद के बगैर किया जा सकता है.

अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में पार्टी मैनिफेस्टो जारी किया

अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में पार्टी मैनिफेस्टो जारी किया

यह सोचना बेवकूफी होगी कि अमरिंदर ने ऐसा सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मंजूरी लिए बगैर किया होगा, लेकिन इससे कैप्टन की काबिलियत का पता चलता है.

इससे यह भी पता चलता है कि राहुल गांधी का फुल-टाइम राजनीति करने का इरादा कैसा है या वह पार्टी के अहम फैसलों के लिए कितने संजीदा हैं.

यह एक बेहद अहम मौका है जबकि एक राज्य कांग्रेस इकाई के नेता ने नेहरू-गांधी वंश से ऊपर अपनी महत्ता साबित की है. नीतिश कुमार के 7 निश्चय से प्रेरित होकर पंजाब कांग्रेस ने ‘कैप्टन दे 9 नुस्खे’ पेश किए हैं.

कैप्टन ने अब तक मोटे तौर पर राहुल गांधी को पंजाब में कैंपेन करने से दूर ही रखा है. हालांकि, कांग्रेस कहेगी कि राहुल ने ही अब तक खुद को कैंपेन से दूर रखा है ताकि वह अंतिम वक्त में पार्टी में ऊर्जा डाल सकें.

पार्टी को याद आए मनमोहन सिंह

राहुल की गैरमौजूदगी मनमोहन सिंह के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. इस मौके पर कांग्रेस पूर्व प्रधानमंत्री का फिर से उपयोग कर रही है. कम से कम एक सिख नेता के तौर पर उनकी मजबूत साख को पार्टी भुनाने की कोशिश में है.

इस मौके पर कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याद आयी

इस मौके पर कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याद आयी

मनमोहन सिंह पार्टी के मेनिफेस्टो को जारी करते वक्त मौजूद थे और उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस का भरोसा व्यक्त किया.

यह सबकुछ ऐसे वक्त पर हो रहा है जबकि न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (एनएसी) की मुखिया के तौर पर असलियत में सोनिया गांधी ही सरकार चला रही थीं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुहर के तौर पर ही खुश थे.

एनएसी और पीएमओ या अन्य मंत्रालयों, कैबिनेट सेक्रेटरी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच फाइलों में हुए संवाद के चलते इस रिपोर्ट ने काफी राजनीतिक विवाद पैदा किया. इससे साबित हुआ कि मनमोहन सिंह दफ्तर में भले ही थे, लेकिन असली सरकार सोनिया गांधी ही चला रही थीं. पूरे 10 साल यानी 2004 से 2014 तक सरकार की कमान सोनिया गांधी के हाथ रही. सोनिया गांधी ने बिना कोई उत्तरदायित्व या जिम्मेदारी लिए सत्ता की पूरी ताकत अपने पास केंद्रित रखी.

पार्टी में कांग्रेस उपाध्यक्ष के इस मौके पर न होने पर कई तरह के संदेश जा सकते हैं

पार्टी में कांग्रेस उपाध्यक्ष के इस मौके पर न होने पर कई तरह के संदेश जा सकते हैं

कांग्रेस पार्टी को और शर्मिंदा करने के लिए मोदी सरकार ने नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (एनएसी) की 710 फाइलों को सार्वजनिक करने का फैसला किया.

ऐसे हालात में, कांग्रेस लीडरशिप का मनमोहन सिंह में आस्था जताना काफी दिलचस्प है.

एक-दूसरे की तारीफ

मनमोहन सिंह ने अमरिंदर सिंह के नेतृत्व की खूबियों की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘कैप्टन साब के नेतृत्व की जरूरत है. हम गंभीरता से मानते हैं कि पंजाब को बेहतर वक्त, बेहतर कल की समृद्धि की जरूरत है.’ पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पंजाब में असीमित संभावनाएं हैं. कांग्रेस का सत्ता में लौटना अकाली दल-बीजेपी के शासन से पिछले 10 साल में हुए नुकसान को पटलने के लिए जरूरी है.’

अमरिंदर सिंह ने मनमोहन सिंह की तारीफ की और उनकी अब तक भुलाये जा चुके महत्व का परिचय दिया. उन्होंने कहा, ‘मनमोहन सिंह सबसे मशहूर अर्थशास्त्री हैं और पंजाब और देश के लिए उन्होंने सबकुछ किया है.’

इन्होंने निश्चित तौर पर राहुल गांधी की गैरमौजूदगी नजर नहीं आने दी.

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