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फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलेंगे राहुल गांधी, राफेल पर नहीं होगी बात

कांग्रेस ने कहा कि किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भारत आते हैं तो वह हमारे मेहमान हैं, ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच कोई मतभेद नहीं होते

Updated On: Mar 10, 2018 10:52 AM IST

Bhasha

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फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलेंगे राहुल गांधी, राफेल पर नहीं होगी बात
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रोन से मुलाकात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, राहुल के थाइलैंड और सिंगापुर की यात्रा से लौटने के बाद रविवार को यह मुलाकात होगी.

विदेशों में बसे भारतीय लोगों से संपर्क साधने के लिए राहुल थाइलैंड और सिंगापुर की यात्रा पर गए हैं.

बहरहाल, राफेल करार के मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि राहुल और मैक्रोन के बीच यह मुद्दा नहीं उठाया जाएगा. साल 2015 में पीएम मोदी ने भारत और फ्रांस के बीच राफेल करार पर हस्ताक्षर किया था.

यह अंदरूनी मामला, फ्रांस सरकार से नहीं पूछेंगे

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से भारत के रक्षा करार की चर्चा नहीं करेगी. यह हमारा अंदरूनी मामला है और इस मुद्दे पर सरकार को फ्रांस से बात करनी है, कांग्रेस को नहीं.’  उन्होंने कहा, ‘हम अपनी सरकार से जवाब मांग रहे हैं, फ्रांस की सरकार से नहीं.’

राफेल करार की ओर इशारा करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि जब कोई कुछ खरीदने जाता है तो खरीदार को तय करना होता है कि सामान अच्छा है कि नहीं, क्योंकि विक्रेता तो हमेशा कहेगा कि उसका माल अच्छा है. खरीदार को अपनी जेब का ख्याल रखते हुए फैसला करना होता है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘सरकार को तय करना है कि उसके पैसे की बर्बादी न हो और कम पैसे में बेहतरीन सौदा हो. सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए.’

राफेल लड़ाकू विमान (फोटो: रॉयटर)

राफेल लड़ाकू विमान (फोटो: रॉयटर)

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया, ‘यह श्रीमान मैक्रोन की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की जिम्मेदारी है और उस पर वे नाकाम हुए हैं.’  राफेल करार के मुद्दे पर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर हमले बोल रही है और विमान की कीमत के मुद्दे पर उससे जवाब मांग रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राफेल लड़ाकू विमानों की फ्रांसीसी निर्माता कंपनी दशॉ एविएशन से विमान खरीद कर मोदी सरकार ने सरकारी खजाने को 12,612 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है.

कतर, मिस्र को सस्ते में बेचे गए राफेल

पार्टी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 11 महीने पहले कतर और मिस्र को जिस कीमत पर प्रत्येक विमान बेचे उससे 351 करोड़ रुपए अधिक प्रत्येक विमान के लिए भारत से लिए. फ्रांस सरकार के साथ हुए समझौते में ‘गोपनीयता के प्रावधान’ के कारण सरकार राफेल विमानों की खरीद की कीमत बताने से इनकार कर रही है.

सुरजेवाला ने कहा कि यदि किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भारत आते हैं तो ‘वह हमारे मेहमान हैं और सरकार व विपक्ष के बीच कोई मतभेद नहीं होते.’  उन्होंने कहा कि राष्ट्राध्यक्ष औपचारिक तौर पर विपक्षी नेताओं से मिलते हैं जैसे वे पहले सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से मुलाकात करते थे.

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