S M L

खेमेबंदी से बचने के लिए राहुल गांधी ने समय से पहले शुरू की उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया

राहुल गांधी कांग्रेस में खेमेबाजी खत्म करने के लिए चुनावी राज्यों में पार्टी नेतृत्व के साथ हाल के समय में कई दौर की बैठकें कर चुके हैं. इसमें सभी नेताओं को हिदायत दी जा रही है कि सब आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी के लिए काम करें

Syed Mojiz Imam Updated On: Jun 23, 2018 04:53 PM IST

0
खेमेबंदी से बचने के लिए राहुल गांधी ने समय से पहले शुरू की उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 5 राज्यों के चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर दिया है. जो उम्मीदवार चयन के लिए काम करना शुरू कर देगी. इन चुनावों को आम चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा में कांग्रेस विपक्ष में है. राजस्थान को छोड़कर पार्टी बाकी राज्यों में डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है. लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद भी पार्टी के भीतर नेताओं की कमी नहीं है.

हर नेता का अपना खेमा है. इस खेमेबंदी की वजह से पार्टी के भीतर अहम का टकराव है. जिसका खामियाजा चुनाव में कांग्रेस को उठाना पड़ता है. लेकिन इस टकराव को कम करने के लिए हर राज्य के नेतृत्व के साथ राहुल गांधी कई दौर की बैठक कर चुके हैं. जिसमें सभी नेताओं को हिदायत दी जा रही है कि सब आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी के लिए काम करें. लेकिन ऐसा हो पाना आसान नहीं हैं.

हर राज्य के लिए अलग कमेटी

कांग्रेस की परंपरा के मुताबिक हर राज्य के लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है. जिसमें सीनियर नेताओं को अध्यक्ष और नौजवानों को सदस्य बनाया गया है. कुमारी शैलजा को राजस्थान, मधुसूदन मिस्त्री को मध्य प्रदेश का चेयरमैन बनाया गया है. भुवनेश्वर कालिता को छत्तीसगढ़ और वी डी सतीसन को ओडिशा का कामकाज सौंपा गया है. तो मिजोरम में लिजयानियो फिलेरियो को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. कांग्रेस के इन नेताओं के पास अहम काम है. राज्य में पार्टी के सभी नेताओं को एडजस्ट करने का फॉर्मूला इजाद करना है.

Congress-BJP

इस साल के अंत में होने वाले 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजपी को हराने देने के लिए कांग्रेस अलग चुनावी रणनीति पर काम कर रही है

स्क्रीनिंग कमेटी में सोशल इंजीनियरिंग

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कमेटी बनाने में सोशल इंजीनियरिंग का ख्याल रखा है. राजस्थान की चेयरमैन बनी कुमारी शैलजा दलित हैं. तो मधुसूदन मिस्त्री पिछड़ी जाति से आते हैं. जाहिर है कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी सामाजिक और जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रख रहे हैं. वहीं यूपी के नेतृत्व को इन कमेटियों में तरजीह दी गई है. पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद यूपी में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय प्रताप लल्लू और ललितेश त्रिपाठी को भी स्थान मिला है. जिससे साफ है कि राहुल गांधी का ध्यान यूपी के राजनीतिक गणित पर भी है.

किन राज्यों में कांग्रेस के अंदर गुटबाजी

राजस्थान

राजस्थान में जहां कांग्रेस को सत्ता मिलने की उम्मीद ज्यादा है. वहां गुटबाजी चरम पर है. मैन टू मैन मार्किंग चल रही है. कौन नेता किस नेता के यहां जाता है. उसकी पूरी खबर दूसरे के पास है. जिसकी वजह से टिकटार्थी (टिकट के लिए आवेदन करने वाले) परेशान हैं. किसके यहां जाए और किसके यहां ना जाए. क्योंकि दूसरा पक्ष जवाब-तलब करने लगता है. कांग्रेस में सरहद भी तय किए जाने की चर्चा है. उदयपुर में आने वाली सीटों पर टिकट सीपी जोशी के कहने पर मिलेगा, जोधपुर के कर्ता-धर्ता अशोक गहलोत, अलवर भरतपुर में, जितेंद्र सिंह जयपुर जबकि अजमेर सचिन पायलट के हवाले है. जिससे कार्यकर्ता परेशान हैं.

राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच मनमुटाव की खबरें अक्सर आती रहती हैं

राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव की खबरें अक्सर आती रहती हैं

हालांकि राज्य के प्रभारी अविनाश पांडे ने इस तरह की खबरों का खंडन किया है. अविनाश पांडे का कहना है कि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव की तैयारी कर रही है. उन्होंने किसी तरह की गुटबाजी से इनकार किया है. हाल के दिनों में अशोक गहलोत की राहुल गांधी से नजदीकी बढ़ी है. जिससे सचिन पायलट और सी पी जोशी परेशान हैं.

मध्य प्रदेश

इस राज्य की गुटबाजी मंजर-ए-आम पर है. कमलनाथ को कमान सौंपने के बाद भी राहुल गांधी सभी नेताओं को साधने की कोशिश कर रहें हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी,अजय सिंह राहुल और अरूण यादव सबके अलग गुट हैं. मध्य प्रदेश में माहौल कांग्रेस को अनुकूल लग रहा है. इसलिए खेमेबंदी भी उफान पर है.

जाहिर है पार्टी को एकजुट रखना कांग्रेस के लिए चुनौती है. लेकिन मुश्किल है कि सभी को कैसे खुश किया जाए. जिस तरह से प्रदेश में नेताओं का अंबार है. यही कांग्रेस के लिए मुश्किल की वजह भी है. बीएसपी के साथ गठबंधन से कांग्रेस का वोट तो बढ़ सकता है. लेकिन भीतरघात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह को टक्कर देने के लिए कांग्रेस में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिम्मेदारी सौंपी है

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह को टक्कर देने के लिए कांग्रेस में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिम्मेदारी सौंपी गई है

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में भी चुनाव इन 2 राज्यों के साथ है. यहां पार्टी के प्रभारी पी एल पुनिया ने पूर्व कांग्रेस नेता अजित जोगी के साथ किसी तरह के गठबंधन से इनकार किया है. हालांकि बीएसपी के साथ बातचीत चल रही है. जिसकी वजह से पार्टी के कई नेता परेशान हैं. पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा का दखल राज्य में रहता है. मोतीलाल वोरा की अदावत से अजित जोगी को पार्टी छोड़नी पड़ी थी. यहां कांग्रेस के लिए अजित जोगी चुनौती हैं. तो भूपेश बघेल और टी एस सिंहदेव के बीच आपसी मतभेद है. स्क्रीनिंग कमेटी को चरणदास मंहत का भी ख्याल रखना पड़ेगा. पार्टी के पास रमन सिंह को टक्कर देने के लिए उनके बराबर का नेता नहीं है.

ओडिशा

इस राज्य में कांग्रेस हाशिए पर है. कांग्रेस की लड़ाई बीजेपी से नहीं बल्कि बीजू जनता दल (बीजेडी) से है. हालांकि बीजेपी ने यहां कांग्रेस से विपक्ष का स्पेस छीन लिया है. जिसकी वजह से कांग्रेस को ज्यादा जद्दोजहद करना है. कांग्रेस को पार्टी से पलायन रोकने का अहम काम है. वहीं पार्टी के सभी खेमों को एक साथ लेकर चलने की चुनौती भी है. यहां छोटे-छोटे रजवाड़ो को साधने के लिए कांग्रेस ने जितेंद्र सिंह को प्रभारी और अब जितिन प्रसाद को स्क्रीनिंग कमेटी में सदस्य बनाकर इस तबके को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

जितिन प्रसाद (फोटो: फेसबुक से साभार)

अपनी युवा टीम में राहुल गांधी ने जितिन प्रसाद को भी अहम जिम्मेदारी दी है (फोटो: फेसबुक से साभार)

हालांकि कांग्रेस में बनी कई कमेटियों ने 6 महीने पहले टिकट देने की सिफारिश कर रखी है. लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है. कांग्रेस के सिस्टम के मुताबिक केंद्रीय चुनाव समिति ही उम्मीदवार के चयन पर अंतिम निर्णय लेती है. स्क्रीनिंग कमेटी 3 उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश करती है. जिसमें सारे समीकरण का ध्यान रखा जाता है. हालांकि हर पार्टी की तरह कांग्रेस में भी कौन नेता किसकी सिफारिश कर रहा है. यह अहम है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi