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कांग्रेस के 'भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को झटका है मक्का मस्जिद ब्लास्ट का फैसला

हिंदू या कह लें भगवा आतंक को लेकर कांग्रेस ने जो आरोप मढ़े थे वे सारे ही आरोप अब औंधे मुंह गिरे हैं और कांग्रेस को इन आरोपों का भूत सता रहा है

Sanjay Singh Updated On: Apr 17, 2018 11:58 AM IST

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कांग्रेस के 'भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को झटका है मक्का मस्जिद ब्लास्ट का फैसला

बात 20 जनवरी 2013 की है. जयपुर में कांग्रेस पार्टी के चिंतन शिविर में बोलते हुए तत्कालीन गृहमंत्री सुशील शिन्दे ने कहा, 'जांच के दौरान इस तरह की खबरें आई हैं कि बीजेपी और आरएसएस आतंकवाद फैलाने के लिए आतंकियों का प्रशिक्षण शिविर चलाते हैं. समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद में बम रखे गए और फिर मालेगांव में भी विस्फोट की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. हमें इन बातों के बारे में संजीदगी से सोचना होगा और हमें चौकन्ना रहना होगा.' चिन्तन शिविर के अपने भाषण वाले इसी दिन उन्होंने बाद में अपनी बातों का मतलब समझाते हुए कहा कि उन्होंने कुछ नया नहीं कहा बल्कि 'भगवा आतंकवाद के बारे में अपनी बात रखी है.'

वो बयान कांग्रेस आलाकमान की रणनीति का हिस्सा था

शिंदे का बयान कुछ कारणों से कहीं ज्यादा सनसनीखेज साबित हुआ. एक तो उन्होंने जो आरोप लगाए उसका टेलीविजन पर प्रसारण हो रहा था और इस नाते ये आरोप पूरे देश की नजरों में थे. दूसरे, चिंतन शिविर में उस वक्त कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में शामिल चेहरे यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी (जो बस एक दिन पहले पार्टी के उपाध्यक्ष बनाये गये थे) तथा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत केंद्रीय मंत्रिमंडल के सभी प्रमुख मंत्री, पार्टी के शासने वाले राज्यों के मुख्यमंत्री तथा पार्टी से जुड़े अन्य अहम पदाधिकारी सभी मौजूद थे.

ऐसे में जाहिर है, पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के गृहमंत्री की हैसियत से शिन्दे ने अगर इतने गंभीर आरोप लगाए तो इसकी लिए उन्होंने पहले से पूरी तैयारी की होगी और उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ऐसा करने के लिए हरी झंडी भी मिली होगी.

गृहमंत्री के रुप में शिन्दे के पूर्ववर्ती पी चिदंबरम भी एक अरसे से अलग-अलग मंचों पर ‘भगवा आतंकवाद’ का जिक्र करते आ रहे थे. सुशील शिन्दे ने जो आरोप लगाए, उससे पी चिदंबरम के लगाए आरोपों में बस इतना भर अंतर है कि चिदंबरम ने भगवा या कहे लें हिंदू आतंकवाद को कभी बीजेपी के साथ नत्थी नहीं किया.

चाहे बात समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव, मक्का मस्जिद विस्फोट और इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़ी जांच की हो या फिर सीबीआई या एनआईए के बदल गए चार्जशीट की या महाराष्ट्र एटीएस और इन सबसे जुड़ी उस बहस की जिसे सत्ताधारी कांग्रेस ने अपने नजरिए से गढ़ा- ये सारा कुछ ‘हिंदू आतंकवाद’ को एक तथ्य के रुप में स्थापित करने की कवायद थी. बटला हाऊस एनकाउंटर मामले में दिल्ली पुलिस लगातार दावा करती रही कि मामले में सच्चाई है लेकिन दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद जैसे नेता इसे फर्जी मुठभेड़ बताने के लिए कल्पना के हवाई घोड़े दौड़ाने से बाज नहीं आए. दावा तो यहां तक किया गया कि पुलिस के हाथों ढेर हुए आतंकवादियों की तस्वीर देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थीं.

राहुल गांधी के इस विचार से निकला था बयान

तकरीबन हर दूसरा कांग्रेसी नेता यह बताने में लगा था कि भगवा आतंक का खतरा उठ खड़ा हुआ है. शायद इन सबने अपनी राय पार्टी के सर्वेसर्वा राहुल गांधी के एक खास ख्याल को ध्यान में रखकर बनाई थी. राहुल गांधी ने अमेरिका के राजदूत से 2009 में कहा था कि भारत को मुस्लिम आतंकियों की तुलना में हिंदू अतिवादियों से कहीं ज्यादा खतरा है.

साल 2010 के दिसंबर में विकीलीक्स के खुलासे से पता चला कि 2009 की जुलाई में राहुल गांधी अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को दिए गए एक भोज में शामिल हुए थे. यह भोज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया था. इस भोज में राहुल गांधी ने अमेरिका के राजदूत टिमोथी रोयमर को आगाह करने के अंदाज में कहा कि 'बेशक भारत के मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से में लश्कर-ए-तैयबा सरीखे इस्लामी आतंकी जमात के लिए समर्थन के सबूत हैं लेकिन बड़ा खतरा खांटी (रेडिकल) हिंदू जमातों के उभार से पैदा हो सकता है क्योंकि ये समूह मुस्लिम समुदाय के साथ सियासी झगड़े और धार्मिक तनाव पैदा करते हैं.'

इस्लामी आतंकी जमातों या फिर पाकिस्तान की तरफ से हो रहे आतंकी हमले के बाबत बात करते हुए राहुल ने अमेरिकी राजदूत के सामने घरेलू अतिवादी समूहों से उठ खड़े हुए जोखिम के बारे में बातें कीं और कहा कि इस पर लगातार ध्यान देने की जरुरत है.

लेकिन कांग्रेस की ये थ्योरी धड़ाम हो चुकी है

हिंदू या कह लें भगवा आतंक को लेकर कांग्रेस ने जो आरोप मढ़े थे वे सारे ही आरोप अब औंधे मुंह गिरे हैं और कांग्रेस को इन आरोपों का भूत सता रहा है क्योंकि हैदराबाद में एनआईए की अदालत ने मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद सहित पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है. मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त एक बम-विस्फोट हुआ था जिसमें 8 लोगों की जान गई और अन्य 58 लोग घायल हुए थे.

हैदराबाद पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में कुछ मुस्लिम नौजवानों को बम-विस्फोट की योजना बनाने और इस कार्रवाई को अंजाम देने के आरोप में पकड़ा लेकिन मामला 2007 की जुलाई में सीबीआई और आगे चलकर 2011 की अप्रैल में एनआईए के हवाले हो गया और इसी वक्त से मक्का मस्जिद की घटना ने एक नया मोड़ लिया. केंद्रीय जांच एजेंसियों की खोज-बीन के दौरान बम-विस्फोट के मामले में अभिनव भारत के सदस्यों का नाम सामने आया.

मालेगांव, मक्का मस्जिद और अन्य घटनाओं में भगवा आतंक की बात को भरोसेमंद साबित करने के लिए एनआईए ने जो मामले गढ़े थे वे सभी कानून की अदालत में एक-एक करके धराशायी हो गए हैं. गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि का यह खुलासा भी सामने आया है कि पी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते उनके साथ जोर-जबर्दस्ती की गई थी और इशरत जहां मामले में नए सिरे से सुधारा हुआ हलफनामा दायर करने को कहा गया था. इन सारी बातों के सामने आने के कारण कांग्रेस पार्टी के तेवर ढीले पड़ गए हैं. पार्टी रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है. अदालत ने मालेगांव विस्फोट मामले में कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ लगे मकोका (एमसीओसीए) के आरोपों को भी खारिज कर दिया था और दोनों को जमानत मिल गई थी.

बीजेपी का कांग्रेस पर आरोप

बीजेपी ने अब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर जोरदार पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी आतंकवाद के असली दोषियों (इस्लामी) से ध्यान भटकाने के लिए अपनी भगवा आतंकवाद नाम की ख्याली खिचड़ी पका रही थी.

एनआईए की अदालत के फैसले का वक्त, असीमानंद समेत अन्य आरोपितों का निर्दोष साबित होना और फिर भगवा आतंकवाद के मसले पर बहस को बीजेपी ने जिस तरह से उठाया है- ये तमाम बातें सियासी नतीजों के लिहाज से बहुत अहम हैं.

ये सारी बातें उस वक्त हुई हैं, जब कठुआ और उन्नाव मामले से सही तरह से ना निपटने के लिए बीजेपी की आलोचना हो रही है. अब खबरों की सुर्खियां बदलने से बीजेपी को थोड़ी राहत महसूस होगी.

लेकिन पूरे प्रकरण को बीजेपी ने जिस तेजी और तीखेपन के साथ उठाया और कांग्रेस पर हमला बोला है उससे एक संकेत यह भी मिलता है कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी इस मसले को कर्नाटक में चुनावी मुद्दा बना सकती है. विधानसभा के चुनाव वाले सूबे कर्नाटक में राहुल गांधी पूरी हड़बड़ी के साथ मठों और मंदिरों के चक्कर लगा रहे हैं ताकि खुद को और पार्टी को हिंदुओं का हिमायती साबित कर सकें. इंडिया टुडे ने हाल में एक सम्मेलन का आयोजन किया तो इसमें सोनिया गांधी ने कहा कि राहुल का मंदिरों में जाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा है ताकि बीजेपी के इस आरोप की काट की जा सके कि कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी है.

कांग्रेस लिंगायत जाति-समूह को हिंदू-समुदाय से अलगाते हुए उसे धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने की कोशिश कर रही है. राज्य में इस मुद्दे पर भी बहस सरगर्म है. ऐसे हालात में बीजेपी भगवा आतंकवाद का मसला उछालकर कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगी. हैदराबाद की एनआईए अदालत से फैसला आने के एक घंटे बाद ही पार्टी मुख्यालय से पार्टी प्रवक्ता ने इस दिशा में शुरुआत कर दी है.

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