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कनेक्ट विद राहुल: बोगस कार्यकर्ताओं के बल पर राजनीति नहीं चमकेगी

पार्टी को सत्ता में लाने के लिए राहुल गांधी को ही सोनिया गांधी की तरह सड़क पर निकलना पड़ेगा

Updated On: Mar 09, 2018 08:39 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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कनेक्ट विद राहुल: बोगस कार्यकर्ताओं के बल पर राजनीति नहीं चमकेगी
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कांग्रेस पार्टी राजनीति में हाशिए पर जा रही है. पूरे देश में सिर्फ चार राज्यों में सरकार बची है. कर्नाटक के चुनाव में क्या होगा किसी को पता नहीं है. पार्टी के भीतर क्षत्रप खत्म हो रहे हैं. कांग्रेस के पास अपने दम पर चुनाव जितवाने के लिए किसी राज्य मे नेता नहीं बचा है. सिर्फ कुछ अपवाद छोड़कर खासकर उत्तर भारत में जहां से संसद और सरकार का रास्ता बनता है. दक्षिण में सिर्फ सिद्धारमैया बचे हैं. जिनके पास अपनी और बिरादरी की ताकत है.

कांग्रेस के कमजोर होने के कई कारण हैं लेकिन सबसे बड़ी वजह है लीडरशिप और कार्यकर्ता के बीच संवादहीनता. हालांकि राहुल गांधी जब से केंद्रीय पटल पर राजनीति कर रहे हैं. तब से ही वो ये बात कह रहे है कि कार्यकर्ताओं की कोई नहीं सुनता है. दिल्ली में बैठे या प्रदेश में बैठे नेताओं ने एक गुट बना रखा है. जिसको साधारण कार्यकर्ता पार नहीं कर पा रहा है. लेकिन पूर्वोत्तर में भी कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद राहुल गांधी ने सबक सीखा है. अब कनेक्ट विद राहुल कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है. जिससे राहुल गांधी से सीधे वर्कर संवाद कर सकेगा. ये टू वे संचार माध्यम होगा. जिसमें कार्यकर्ता अपना सुझाव भी लीडरशिप तक भेज सकता है.

शक्ति के जरिए संवाद

राहुल गांधी ने इस प्रोग्राम का नाम शक्ति रखा है. जिसका नारा है, 'हर कांग्रेस कार्यकर्ता को आवाज', कांग्रेस के दिल्ली के महासचिव चत्तर सिंह का कहना है, 'इससे कार्यकर्ताओं के पास ऐसी शक्ति आ जाएगी. जिसके जरिए सीधे अपनी बात पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचा सकते हैं.'

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi meets party workers at AICC Headquarters, in New Delhi on Wednesday. PTI Photo (PTI2_7_2018_000250B)

प्रतीकात्मक तस्वीर

'इस कार्यक्रम को दिल्ली मे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया जा रहा है. इसमें हर कार्यकर्ता को अपने वोटर कार्ड का नंबर अपने मोबाइल से मैसेज करना है. जिसका नंबर पार्टी की तरफ से जारी किया गया है. इसका नंबर 9223113333 है. खास बात है कि एक फोन और एक वोटर कार्ड नंबर से एक ही आदमी का रजिस्ट्रेशन होगा. जिसके बाद एक कनफर्मेशन का मैसेज मिलेगा.

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इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद आप राहुल गांधी तक अपना संदेश भेज सकते हैं. कांग्रेस के लिए आप क्या कर रहे हैं, इसका वीडियो और फोटो भी शेयर कर सकते हैं. इस योजना को बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जाएगा. राहुल गांधी की निगरानी में एक टीम इसको मॉनिटर करेगी. हालांकि वरिष्ठ पत्रकार संजीव आचार्य का कहना है, 'कांग्रेस कैडर बेस्ड पार्टी नहीं है. कांग्रेस में क्षमता के आधार पर नेता का मनोनयन का चलन है. यूथ कांग्रेस के चुनाव में भी प्रभावशाली कांग्रेस के नेताओं ने अपने लोगों को ही जिताया है. हाल के दिल्ली में यूथ के चुनाव में अजय माकन का ऑडियो वॉयरल हुआ था जिसमें वो किसी उम्मीदवार की सिफारिश करते हुए सुने गए हैं.'

हवाई नेताओं की दुकान होगी बंद

कांग्रेस में दस्तूर है कि हर नेता को बूथ कमेटी बनानी होती है. जिनको चुनाव लड़ना है या फिर संगठन में राजनीति करनी है. लेकिन ज्यादातर देखा गया है कि नेता अपने इर्द-गिर्द रहने वालों को नाम भेज कर ही काम को अंजाम दे देते थे. इसको लेकर कांग्रेस के पास चेक करने का कोई तरीका नहीं था. इतने बड़े संगठन में ये संभव भी नहीं हो सकता है.

कांग्रेस के पास बोगस वर्कर की फौज बन जाती थी, जिसका नतीजा पार्टी को हर चुनाव में मिल रहा है. अब ऐसे नेताओं के फर्जीवाड़े पर लगाम लगनी तय है. क्योंकि पार्टी के पास एक डेटाबेस तैयार हो जाएगा. पार्टी के शीर्ष नेताओं को ये पता रहेगा किस बूथ पर उनका कौन वर्कर है. उसका नाम पता और नंबर क्या है.

राजस्थान में शुरू हुआ मेरा बूथ, मेरा गौरव

दरअसल इसका पूरा खाका राजस्थान से तैयार हुआ है. जहां उपचुनाव में कांग्रेस को कामयाबी मिली है. यहां में अलवर और अजमेर लोकसभा सीट पर इसकी शुरुआत की गई है. जिसका नाम 'मेरा बूथ, मेरा गौरव' रखा गया है. जिसमें बूथ स्तर पर फिर न्याय पंचायत स्तर पर कमेटी बनाई गई है. ब्लॉक स्तर पर फिर इनकी बैठक होती है जिनको बड़े नेता संबोधित करते हैं. कार्यकर्ताओं को बड़े नेताओं से मिलने का मौका मिलता है. जिससे कार्यकर्ताओं मे जोश और हौसला बढ़ता है. पार्टी के संगठन के लोगों का कहना है कि फिर जिला स्तर पर बड़ा सम्मेलन किया जाता है. जिसमें प्रदेश अध्यक्ष जरूर रहते हैं. जाहिर है कि इससे कार्यकर्ताओं को देश में चल रहे मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी की राय और कैसे पब्लिक को कांग्रेस की तरफ मोड़ें,  ये सब सिखाया जाता है.

बीजेपी के मिस कॉल अभियान का जवाब है शक्ति

बीजेपी ने सत्ता हासिल करने के बाद मेंबरशिप अभियान शुरू किया था. जिसमें बीजेपी के तकरीबन 7 करोड़ सदस्य बनाए गए थे. बीजेपी ने दावा किया कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. हालांकि मिस कॉल से सदस्य बनने वाला कितना पार्टी के प्रति संवेदनशील होगा ये कहना मुश्किल है. लेकिन बीजेपी की चुनाव दर चुनाव जीत ये गवाही दे रही है कि पार्टी के पास कार्यकर्ताओं की संख्या भी बढ़ रही है. जिससे बूथ तक वोटर पक्ष में वोट दिलवाने में बीजेपी को आसानी हो रही है.

पन्ना प्रमुख- बीजेपी का बड़ा हथियार

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

गुजरात के चुनाव में बीजेपी के संगठन की क्षमता नजर आई है. बीजेपी के पक्ष में माहौल ना होते हुए भी बूथ स्तर पर मैनेंजमेंट के जरिए पार्टी सत्ता पर काबिज हो गई. कांग्रेस भी कुछ कुछ बीजेपी के पन्ना प्रमुख वाली लाइन पर है. मेरा बूथ मेरा गौरव इसका एक हिस्सा है. जिससे वोटर से बूथ कार्यकर्ता का कनेक्ट बना रहेगा. गाहे-बगाहे मिलते भी रहेंगे. चुनाव में प्रचार के दौरान कार्यकर्ताओं को ढूंढना नहीं पड़ेगा. 2019 के लिए  बीजेपी तैयार है. कांग्रेस अभी प्रयोग के दौर से गुजर रही है. पार्टी को सत्ता मे लाने के लिए राहुल गांधी को ही सोनिया गांधी की तरह सड़क पर निकलना पड़ेगा.

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